चर्चा में क्यों?
शनि के चंद्रमा टाइटन (Titan) पर स्थितियों का अनुकरण (simulating) करने वाले प्रयोगशाला प्रयोगों से पता चला है कि टाइटन के वायुमंडल में मौजूद एक अणु (molecule) एक्रिलोनिट्राइल (acrylonitrile), तरल मीथेन और इथेन में कोशिका जैसी झिल्ली (cell-like membranes) नहीं बनाता है। इसके बजाय, एक्रिलोनिट्राइल चंद्रमा के क्रायोजेनिक (cryogenic) तापमान पर इथेन के साथ सह-क्रिस्टलीकृत (co-crystallises) होता है। परिणाम उन पहले के कंप्यूटर मॉडलों को पलट देते हैं जिन्होंने सुझाव दिया था कि एक्रिलोनिट्राइल झिल्ली-जैसे "एज़ोटोसोम (azotosomes)" में इकट्ठा हो सकता है, जिससे टाइटन की झीलों में जीवन के निर्माण खंडों (building blocks of life) के बारे में सवाल उठते हैं।
पृष्ठभूमि
एक्रिलोनिट्राइल तेज, प्याज जैसी गंध वाला एक रंगहीन, सिंथेटिक तरल है। उद्योग में इसका उपयोग प्लास्टिक, सिंथेटिक रबर और ऐक्रेलिक फाइबर (acrylic fibres) के निर्माण के लिए किया जाता है। उच्च सांद्रता (high concentrations) के संपर्क में आने से आंख, त्वचा और श्वसन पथ (respiratory tract) में जलन हो सकती है और इसे संभावित कार्सिनोजेन (carcinogen) माना जाता है। एक्रिलोनिट्राइल पानी में घुल जाता है और जल्दी वाष्पित (evaporates) हो जाता है; इसे एक बार कीटनाशक (pesticide) के रूप में इस्तेमाल किया गया था लेकिन उस उद्देश्य के लिए बंद कर दिया गया है।
शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा, टाइटन, नाइट्रोजन युक्त वायुमंडल के नीचे तरल मीथेन और इथेन की झीलों और समुद्रों के होने में अद्वितीय है। 2015 में वैज्ञानिकों ने प्रस्ताव दिया था कि टाइटन पर एक्रिलोनिट्राइल स्थिर झिल्ली बना सकता है, जिसे एज़ोटोसोम नाम दिया गया है, जो संभावित रूप से पृथ्वी की कोशिकाओं में लिपिड झिल्ली (lipid membranes) के समान है। हाल के प्रयोगों में एक्रिलोनिट्राइल, मीथेन और इथेन के मिश्रण को -179 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया गया और पाया गया कि अणु लचीले पुटिकाओं (flexible vesicles) में इकट्ठा होने के बजाय क्रिस्टलीकृत होते हैं।
मुख्य बिंदु
- कोई झिल्ली निर्माण नहीं: अध्ययन से पता चलता है कि टाइटन के तापमान पर, एक्रिलोनिट्राइल और इथेन एक क्रिस्टलीय सह-संरचना (crystalline co-structure) बनाते हैं। झिल्ली जैसे पुटिकाएं नहीं बनीं, जिससे टाइटन की झीलों में पृथ्वी जैसी कोशिका झिल्ली की संभावना कम हो गई।
- खगोल जीव विज्ञान (Astrobiology) के लिए निहितार्थ: जबकि टाइटन जीवन की खोज में एक उम्मीदवार बना हुआ है, ये निष्कर्ष बताते हैं कि तरल हाइड्रोकार्बन (liquid hydrocarbons) में जीवन के उभरने के लिए वैकल्पिक रसायन शास्त्र (alternative chemistries) की आवश्यकता हो सकती है।
- एक्रिलोनिट्राइल को समझना: पृथ्वी पर रासायनिक का उत्पादन औद्योगिक रूप से किया जाता है और यह खतरनाक हो सकता है। टाइटन पर इसकी पहचान जटिल कार्बनिक रसायन शास्त्र (complex organic chemistry) का संकेत देती है लेकिन जरूरी नहीं कि जीव विज्ञान हो।
स्रोत: The Hindu