इतिहास

Tughlaqabad Fort: गयासुद्दीन तुगलक, इतिहास और सर्वेक्षण

Tughlaqabad Fort: गयासुद्दीन तुगलक, इतिहास और सर्वेक्षण

चर्चा में क्यों?

दिल्ली में अदालतें 14वीं सदी के गढ़ तुगलकाबाद किले (Tughlaqabad Fort) के आसपास अतिक्रमण (encroachments) को सर्वे करने और हटाने की योजना की निगरानी कर रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देरी और इस भ्रम पर चिंता व्यक्त की है कि सर्वेक्षण किस एजेंसी को करना चाहिए। हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi), जिसे शुरू में सर्वेक्षण का काम सौंपा गया था, ने निजी फर्मों (private firms) को काम आउटसोर्स (outsourcing) करने पर विचार किया, जिसके कारण न्यायिक चेतावनी (judicial admonitions) दी गई।

पृष्ठभूमि

तुगलकाबाद किले की स्थापना 1321 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) के तुगलक वंश (Tughlaq dynasty) के पहले शासक गयास-उद-दीन तुगलक (Ghiyas-ud-din Tughlaq) ने की थी। दिल्ली के तीसरे शहर के रूप में निर्मित, इसने एक किले और राजधानी (capital city) दोनों के रूप में कार्य किया। किले की विशाल पत्थर की दीवारें, 10-15 मीटर ऊंची और 6.5 किलोमीटर से अधिक फैली हुई थीं, जिसमें एक गढ़ (citadel), महल परिसर (palace complex) और मुख्य शहर घिरा हुआ था। लोकप्रिय किंवदंती (popular legend) के अनुसार, सूफी संत निजामुद्दीन औलिया (Nizamuddin Auliya) द्वारा दिए गए श्राप के कारण किले को कुछ ही वर्षों में छोड़ दिया गया था, जिनका सुल्तान से विवाद हुआ था। श्राप में कथित तौर पर कहा गया था, "या तो यह वीरान रहे, या गुज्जरों द्वारा आबाद हो (May it remain uninhabited or be occupied by Gujjars)," और कुछ ही समय बाद गयास-उद-दीन की मृत्यु हो गई और राजधानी स्थानांतरित हो गई।

वर्तमान मुद्दे

  • अतिक्रमण (Encroachments): समय के साथ, किले के आसपास मलिन बस्तियां (slums) और अनधिकृत संरचनाएं (unauthorised structures) कुकुरमुत्ते की तरह उग आई हैं, जिससे इसके विरासत मूल्य (heritage value) और संरचनात्मक सुरक्षा (structural safety) से समझौता हुआ है।
  • सर्वेक्षण भ्रम (Survey confusion): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने उन्नत उपकरणों का उपयोग करके आधुनिक सर्वेक्षण करने के लिए आईआईटी दिल्ली से अनुरोध किया। हालांकि, आईआईटी दिल्ली ने कार्य को उप-अनुबंध (subcontracting) करने पर विचार किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले प्रतिबंधित कर दिया था, जिससे गतिरोध (stalemate) पैदा हो गया।
  • न्यायिक निगरानी (Judicial oversight): दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं, यह निर्देश देते हुए कि सर्वेक्षण शीघ्रता (expeditiously) से और निजी संस्थाओं को आउटसोर्स किए बिना पूरा किया जाए।
  • सांस्कृतिक महत्व (Cultural significance): सर्वेक्षण न केवल अतिक्रमण हटाने के लिए बल्कि किले के संरक्षण (conservation) की योजना बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो ढलान वाली दीवारों (sloping battered walls) और गयास-उद-दीन के मकबरे तक जाने वाले पुल (causeway) वाले तुगलक वास्तुकला (Tughlaq architecture) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

निष्कर्ष

तुगलकाबाद किले को और अधिक क्षरण (degradation) से बचाने के लिए सर्वेक्षण विवाद को सुलझाना आवश्यक है। सरकारी निकायों के बीच एक स्पष्ट योजना और समन्वय (coordination) इस मध्ययुगीन स्मारक (medieval monument) को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने में मदद करेगा।

स्रोत

MSN

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