विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Vikram-1 Rocket: Skyroot Aerospace, विशेषताएं और कक्षीय मिशन

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समाचार में क्यों?

Skyroot Aerospace ने घोषणा की कि उसका छोटा सैटेलाइट लॉन्चर, Vikram‑1, 12 July से 4 August 2026 तक की लॉन्च विंडो के दौरान अपनी पहली उड़ान के लिए निर्धारित है। यह एक निजी कंपनी द्वारा विकसित भारत का पहला ऑर्बिटल मिशन होगा।

पृष्ठभूमि

2018 में पूर्व ISRO इंजीनियरों द्वारा स्थापित Skyroot Aerospace का उद्देश्य छोटे उपग्रहों के लिए लागत-प्रभावी लॉन्च सेवाएं प्रदान करना है। नवंबर 2022 में सब-ऑर्बिटल Vikram‑S रॉकेट की सफलतापूर्वक उड़ान के बाद, कंपनी ने Vikram‑1 का विकास शुरू किया। 20 मीटर लंबा, चार-चरण लॉन्चर एक ऑल-कार्बन कंपोजिट संरचना और ठोस व तरल प्रणोदन प्रणालियों के मिश्रण का उपयोग करता है।

डिजाइन और क्षमताएं

  • चरण (Stages): पहले तीन चरण—Kalam‑1200, Kalam‑250 और Kalam‑100—ठोस-ईंधन वाले हैं। चौथा चरण सटीक ऑर्बिटल इंसर्शन के लिए एक हाइपरगोलिक रमन इंजन का उपयोग करता है।
  • पेलोड: Vikram‑1 350 kg तक को लो अर्थ ऑर्बिट में और लगभग 260–290 kg को 500 km के आसपास एक सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में ले जा सकता है।
  • सामग्री और निर्माण: रॉकेट की कार्बन कंपोजिट बॉडी इसे हल्का और साथ ही मजबूत बनाती है। इसके इंजन काफी हद तक 3D-प्रिंटेड हैं, जो वजन को लगभग आधा कर देते हैं और उत्पादन के समय को 80 प्रतिशत तक कम कर देते हैं।
  • सेपरेशन और एवियोनिक्स: अल्ट्रा-लो-शॉक न्यूमेटिक सेपरेशन सिस्टम पेलोड पर तनाव को कम करते हैं, जबकि उन्नत एवियोनिक्स और जड़त्वीय नेविगेशन तुरंत लॉन्च की अनुमति देते हैं।
  • लॉन्च बुनियादी ढांचा: रॉकेट को 24 घंटों के भीतर एकीकृत और लॉन्च किया जा सकता है, जो अंतरिक्ष तक उत्तरदायी पहुंच प्रदान करता है और ग्राहकों के लिए लागत को कम करता है।

महत्व

  • निजी क्षेत्र का मील का पत्थर: Vikram‑1 भारत का पहला निजी तौर पर निर्मित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल होगा। इसकी सफलता अधिक व्यावसायिक मिशनों के लिए द्वार खोल सकती है।
  • छोटा उपग्रह बाजार: यह रॉकेट छोटे पृथ्वी-अवलोकन और संचार उपग्रहों को लॉन्च करने की बढ़ती मांग को लक्षित करता है। Skyroot 2027 तक घरेलू और विदेशी ग्राहकों के लिए नियमित उड़ानों की पेशकश करने की योजना बना रहा है।
  • उद्योग का विकास: भारत की नई अंतरिक्ष नीति निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। Skyroot जैसे स्टार्ट-अप ISRO के मिशनों के पूरक हैं और अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और नवाचार को आकर्षित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

Vikram‑1 भारत के अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक नए युग का प्रतिनिधित्व करता है। इसका अभिनव डिजाइन, जल्दी लॉन्च करने की क्षमता और निजी फंडिंग मॉडल यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां वैश्विक लॉन्च बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। आगामी उड़ान प्रणोदन, मार्गदर्शन और सेपरेशन सिस्टम का परीक्षण करेगी तथा भविष्य के व्यावसायिक मिशनों के लिए मंच तैयार करेगी।

स्रोत

The Hindu

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