अंतर्राष्ट्रीय संबंध

Wangchhu Hydroelectric Project: India-Bhutan Cooperation और Renewable Energy

Wangchhu Hydroelectric Project: India-Bhutan Cooperation और Renewable Energy

चर्चा में क्यों?

भूटान और भारत की सरकारों ने हाल ही में पश्चिमी भूटान में 570 मेगावाट वांगचू जलविद्युत परियोजना (Wangchhu hydroelectric project) बनाने के लिए शेयरधारक और रियायत समझौतों (shareholder and concession agreements) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह संयुक्त उद्यम भूटान के ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (Druk Green Power Corporation - DGPC) और भारत की अडानी पावर लिमिटेड (Adani Power Limited) को एक साथ लाता है, जिसका निर्माण 2026 में शुरू होने वाला है。

पृष्ठभूमि

जलविद्युत (Hydropower) भूटान की अर्थव्यवस्था और भारत के साथ इसकी साझेदारी के केंद्र में है। 1960 के दशक की शुरुआत में जलढाका परियोजना (Jaldhaka project) पहला सहयोगी उद्यम था, जिसके बाद चूखा (Chukha - 1987), ताला (Tala - 2000 के दशक में चालू) और पुनात्सांगचू (Punatsangchhu) जैसी प्रमुख योजनाएं आईं। 2006 के एक समझौते के तहत, दोनों देशों का लक्ष्य भूटान में 10,000 मेगावाट जलविद्युत विकसित करना है। वांगचू परियोजना किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (Build-Own-Operate-Transfer - BOOT) मॉडल पर क्रियान्वित की जाने वाली पहली परियोजना होगी。

परियोजना का विवरण

  • स्थान और डिज़ाइन (Location and design): वांगचू (जिसे वोंगचू भी कहा जाता है) नदी हिमालयी ग्लेशियर से चुखा (Chhukha) जिले तक बहती है, जहां परियोजना इसके प्रवाह का उपयोग एक पीकिंग रन-ऑफ-रिवर प्लांट (peaking run-of-river plant) के रूप में करेगी। इस योजना में 142.5 मेगावाट की चार इकाइयां होंगी, जिससे कुल स्थापित क्षमता 570 मेगावाट हो जाएगी।
  • वित्तीय और समयरेखा (Financials and timeline): परियोजना की लागत लगभग ₹60 बिलियन होने का अनुमान है। निर्माण 2026 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है, जिसे पांच साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। 25 साल की रियायत अवधि (concession period) के बाद, स्वामित्व भूटान की शाही सरकार (Royal Government of Bhutan) को हस्तांतरित हो जाएगा।
  • लाभ (Benefits): सर्दियों के दौरान भूटान को बिजली की कमी का अनुभव होता है जब नदियों में बहाव कम होता है। वांगचू प्लांट घरेलू खपत के लिए दृढ़ पीकिंग पावर (firm peaking power) प्रदान करेगा, जबकि गर्मियों में अतिरिक्त ऊर्जा भारत को निर्यात की जाएगी। यह उद्यम भूटानी इंजीनियरों के लिए रोजगार और क्षमता निर्माण (capacity-building) के अवसर भी प्रदान करता है।
  • पर्यावरणीय विचार (Environmental considerations): रन-ऑफ-रिवर (run-of-river) योजना होने के कारण, परियोजना में भंडारण बांधों (storage dams) की तुलना में एक छोटा जलाशय (reservoir) होगा और जलमग्नता (submergence) कम होगी। फिर भी, स्थानीय समुदायों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (aquatic ecosystems) पर प्रभाव को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने की आवश्यकता है।

द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्व

भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और उसने लंबे समय से उसके जलविद्युत विकास का समर्थन किया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnership) के तहत क्रियान्वित वांगचू परियोजना एक परिपक्व रिश्ते का प्रतीक है जहां निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता सरकार-से-सरकार सहयोग (government-to-government cooperation) को पूरक बनाती है। सफल समापन दोनों देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा (energy security) को मजबूत करेगा और भविष्य के सहयोग के लिए मंच तैयार करेगा。

निष्कर्ष

वांगचू नदी के तेज प्रवाह का दोहन करके, भूटान और भारत अपनी ऊर्जा साझेदारी (energy partnership) को गहरा कर रहे हैं। परियोजना का समय पर निष्पादन, पर्यावरण प्रबंधन और लाभों का उचित बंटवारा इसकी सफलता को निर्धारित करेगा और सीमा पार नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं (cross-border renewable energy projects) के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकता है。

स्रोत

BS

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