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Appemidi Mango GI Tag: कर्नाटक, अघनाशिनी नदी बेसिन और जैव विविधता संरक्षण

Appemidi Mango GI Tag: कर्नाटक, अघनाशिनी नदी बेसिन और जैव विविधता संरक्षण

समाचार में क्यों?

30 March और 1 April 2026 के बीच, स्वयंसेवकों, शोधकर्ताओं और ग्रामीणों ने कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में नदी बेसिन के किनारे 35 किमी की यात्रा करते हुए Aghanashini Appemidi Tree Diversity Survey शुरू किया। उनका उद्देश्य Appemidi आम की आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) का दस्तावेजीकरण करना और इस अनूठी किस्म के लिए खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।

पृष्ठभूमि

कन्नड़ में appemidi शब्द छोटे, कच्चे आमों को संदर्भित करता है जो अचार बनाने के लिए बेशकीमती हैं। Appemidi आम कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ और शिवमोग्गा जिलों के नम जंगलों और नदी घाटियों में, विशेष रूप से अघनाशिनी, बेदती और शरावती नदियों के किनारे स्थानीय (endemic) हैं। वाणिज्यिक आम की किस्मों के विपरीत, वे बागों के बजाय जंगली परिदृश्य में स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। उनकी अनूठी सुगंध और लंबी शेल्फ लाइफ की मान्यता में, Appemidi आमों को 2009 में एक Geographical Indication (GI) tag प्राप्त हुआ।

Appemidi आम की विशेषताएं

  • आकार और रूप (Size and shape): फल छोटे होते हैं - अक्सर लगभग 10 ग्राम वजन के - और तोते की चोंच के आकार के होते हैं। पकने पर भी वे हरे रहते हैं और मुलायम होने पर ही काट लिए जाते हैं।
  • सुगंध और स्वाद: प्रत्येक पेड़ अपने फल को एक विशिष्ट सुगंध प्रदान करता है, जिसमें जीरा और कपूर से लेकर खट्टे (citrus) नोट तक शामिल हैं। इसका गूदा सख्त और खट्टा होता है, जो इसे अचार बनाने के लिए आदर्श बनाता है।
  • किस्मों की विविधता (Varietal diversity): सर्वेक्षण ने लगभग 75 विशिष्ट Appemidi किस्मों का दस्तावेजीकरण किया। स्थानीय नामों में अनंत, भट्टना, कंचप्पा और कर्णकुंडल शामिल हैं। Indian Institute of Horticultural Research के शोधकर्ताओं ने एक्स-सीटू (ex-situ) संग्रह में लगभग 33 किस्मों को संरक्षित किया है।
  • आवास (Habitat): पेड़ खड़ी घाटी की ढलानों और नदी के किनारों पर उगते हैं जहाँ मिट्टी की नमी अधिक रहती है। वे अबाधित वन बेल्ट में पनपते हैं और शायद ही कभी इनकी खेती की जाती है।

संरक्षण संबंधी चिंताएँ

  • जलवायु परिवर्तन और जल संकट: स्थानीय लोगों ने बताया कि अनियमित वर्षा और नदी के कम होते प्रवाह के कारण फसल में भारी गिरावट आई है - जो कुछ साल पहले 40,000-50,000 फल हुआ करती थी, वह अब लगभग 10,000-12,000 फल ही रह गई है।
  • आवास में गड़बड़ी: अर्थ-मूविंग उपकरण, भूस्खलन और नदी के किनारे के कटाव से कई पेड़ों को खतरा है। गिरे हुए फल अक्सर अंकुरित होने से पहले ही बह जाते हैं।
  • इन-सीटू संरक्षण (in-situ protection) की आवश्यकता: शोधकर्ता अघनाशिनी नदी बेसिन के एक हिस्से को जैव विविधता विरासत स्थल (biodiversity heritage site) घोषित करने और Appemidi को Spices Board of India के दायरे में शामिल करने की वकालत करते हैं। इन-सीटू संरक्षण - उनके प्राकृतिक आवास में पेड़ों की रक्षा करना - एक्स-सीटू नर्सरियों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुआ है।

महत्व

  • सांस्कृतिक विरासत: Appemidi का अचार मलनाड व्यंजनों (Malnad cuisine) का अभिन्न अंग है और इसे पीढ़ियों से बनाया जा रहा है। वे अब पूरे भारत में लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।
  • आर्थिक क्षमता: उचित ब्रांडिंग और संरक्षण के साथ, Appemidi एक विशिष्ट कृषि उत्पाद बन सकता है, जिससे स्थानीय समुदायों को लाभ होगा।

निष्कर्ष

Appemidi आम पश्चिमी घाटों (Western Ghats) की समृद्ध कृषि-जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करने और पारंपरिक कटाई प्रथाओं का समर्थन करने से यह सुनिश्चित होगा कि यह छोटी सी डेलिकेसी आने वाले वर्षों में भी रसोई की शोभा बढ़ाती रहे।

स्रोत: The Times of India · The New Indian Express

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