चर्चा में क्यों?
मई 2026 में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (Bhakra Beas Management Board - BBMB) ने पाया कि सतलज नदी (Sutlej river) पर बने 63 साल पुराने भाखड़ा बाँध (Bhakra Dam) की मुख्य दीवार बाहर की ओर लगभग 1.77 इंच झुक गई है - जो कि 1.03 इंच की अनुमेय सीमा (permissible limit) से अधिक है। स्थिति का आकलन करने के लिए, BBMB ने विदेशी सलाहकारों की सहायता से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee) के नेतृत्व में एक आपातकालीन संरचनात्मक अध्ययन (emergency structural study) शुरू किया। अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि तत्काल कोई खतरा नहीं है, लेकिन निवारक कार्रवाई (preventive action) आवश्यक है。
पृष्ठभूमि
भाखड़ा बाँध भाखड़ा गाँव के पास पंजाब-हिमाचल प्रदेश सीमा पर सतलज नदी पर स्थित एक कंक्रीट ग्रेविटी बाँध (gravity dam) है। अमेरिकी इंजीनियर हार्वे स्लोकम (Harvey Slocum) के निर्देशन में 1948 और 1963 के बीच निर्मित, यह 225.55 मीटर ऊँचा और 518 मीटर लंबा है, जो इसे एशिया के सबसे ऊँचे ग्रेविटी बाँधों में से एक बनाता है। इसका जलाशय (reservoir), गोबिंद सागर (Gobind Sagar), 168 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 9.34 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा करता है। यह बाँध संयुक्त रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान द्वारा संचालित किया जाता है और इसे अक्सर भाखड़ा-नंगल (Bhakra-Nangal) कहा जाता है क्योंकि नीचे की ओर (downstream) एक छोटा बैराज पानी को नहरों में मोड़ देता है。
महत्व और समस्याएँ
- कृषि जीवन रेखा: यह बाँध भाखड़ा-ब्यास-इंदिरा गांधी नहर प्रणाली (Bhakra-Beas-Indira Gandhi Canal system) को जल की आपूर्ति करता है, जो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर खेत की सिंचाई करता है। इसके बिजलीघर लगभग 1,325 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं।
- झुकाव का कारण: लगातार उच्च जल स्तर और गोबिंद सागर में भारी गाद (siltation) ने बाँध की दीवार पर निरंतर दबाव डाला है। एक दशक से अधिक समय से जल स्तर 1,472 फीट के न्यूनतम ड्रॉ-डाउन स्तर (minimum draw-down level) तक नहीं गिरा है, जिससे संरचना का लचीलापन (elasticity) कम हो गया है और यह बाहर की ओर झुक (outward deflection) गया है।
- गाद का जमाव: अवसादन (sedimentation) के कारण जलाशय ने अपनी मूल भंडारण क्षमता का 25% से अधिक खो दिया है; बाँध से केवल 10 किमी ऊपर (upstream) 1,535 फीट तक ऊँचे गाद के टीले पड़े हैं। इस गाद को साफ करने के लिए नई ड्रेजिंग (dredging) तकनीकों या तलछट बाईपास सुरंगों (sediment bypass tunnels) की आवश्यकता होगी।
- प्रस्तावित उपाय: विशेषज्ञों ने मानसून से पहले जलाशय को उसके न्यूनतम स्तर तक कम करने, कमज़ोर क्षेत्रों को स्थिर करने के लिए बाँध की नींव में ग्राउट (grout) इंजेक्ट करने, रिलीफ वेल (relief wells) के माध्यम से जल निकासी बढ़ाने और अभिनव तलछट निष्कासन तकनीकों (innovative sediment removal techniques) को अपनाने का सुझाव दिया है। अतिरिक्त टिल्ट-मीटर (tilt-meters) और स्ट्रेस गेज (stress gauges) के साथ रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की भी सिफारिश की गई है।
- सुरक्षा आश्वासन: BBMB अधिकारियों और स्वतंत्र इंजीनियरों का कहना है कि संरचना अभी के लिए मज़बूत है और प्रारंभिक हस्तक्षेप (early intervention) किसी भी संकट को रोक देगा। बहरहाल, पंजाब और हरियाणा के निचले (downstream) ज़िलों ने पारदर्शी अपडेट और आपातकालीन तैयारियों की योजनाओं की माँग की है।
निष्कर्ष
भाखड़ा बाँध उत्तर भारत के लिए एक इंजीनियरिंग का प्रतीक (engineering icon) होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा (lifeline) भी है। हाल ही का यह झुकाव पुराने बुनियादी ढाँचे में नियमित रखरखाव और तलछट प्रबंधन (sediment management) की आवश्यकता को रेखांकित करता है। समय पर मरम्मत और आधुनिक निगरानी (modern monitoring) यह सुनिश्चित करेगी कि भाखड़ा आने वाले दशकों तक सुरक्षित रूप से पानी और बिजली की आपूर्ति करता रहे。