चर्चा में क्यों?
18 अप्रैल 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹12,980 करोड़ (लगभग US$1.4 बिलियन) की सॉवरेन गारंटी (sovereign guarantee) के साथ भारत समुद्री बीमा पूल (Bharat Maritime Insurance Pool - BMI Pool) के निर्माण को मंजूरी दी। घरेलू पूल (domestic pool) का उद्देश्य भू-राजनीतिक अस्थिरता, प्रतिबंधों (sanctions) या युद्ध की अवधि के दौरान भारतीय शिपिंग (Indian shipping) के लिए निरंतर बीमा कवरेज सुनिश्चित करना है, जब विदेशी बीमाकर्ता पीछे हट जाते हैं।
पृष्ठभूमि
समुद्री बीमा में यूरोप स्थित अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण और क्षतिपूर्ति (Protection and Indemnity - P&I) क्लबों का दबदबा है। ये क्लब तेल प्रदूषण, मलबे को हटाने (wreck removal), चालक दल (crew) की चोट और अन्य जोखिमों के लिए देयता कवरेज (liability coverage) प्रदान करते हैं। हाल के संघर्षों और प्रतिबंधों के दौरान कुछ पुनर्बीमाकर्ताओं (reinsurers) ने लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से नौकायन करने वाले जहाजों को कवर करना बंद कर दिया, जिससे प्रीमियम (premiums) में वृद्धि हुई और व्यापार को खतरा पैदा हो गया। भारत कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं के आयात पर निर्भर है; समुद्री बीमा में व्यवधान लदान (shipments) को रोक सकता है।
एक घरेलू पूल भारतीय बीमाकर्ताओं को जोखिम साझा करने और भारतीय ध्वज फहराने वाले जहाजों, भारतीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित जहाजों और भारतीय बंदरगाहों में प्रवेश करने या छोड़ने वाले जहाजों के लिए पॉलिसियों (policies) की पेशकश करने की अनुमति देता है। सरकारी समर्थन बीमाकर्ताओं के लिए जोखिम को कम करता है और नुकसान बड़ा होने पर भी दावों (claims) का भुगतान सुनिश्चित करता है।
BMI पूल की विशेषताएं
- पतवार और मशीनरी क्षति (hull and machinery damage), माल की हानि (cargo loss), सुरक्षा और क्षतिपूर्ति (protection and indemnity), और युद्ध जोखिम सहित जोखिमों की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करता है।
- पॉलिसियां सदस्य बीमाकर्ताओं द्वारा उनकी संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता (combined underwriting capacity - लगभग ₹950 करोड़) का उपयोग करके जारी की जाएंगी। सॉवरेन गारंटी (sovereign guarantee) इस राशि से अधिक के बड़े दावों को कवर करेगी।
- माल के मूल स्थान की परवाह किए बिना जहाजों को बीमा प्रदान करता है जब तक कि भारत प्रारंभिक बिंदु या गंतव्य है। कवरेज तब भी लागू होता है जब जहाज अस्थिर समुद्री गलियारों (volatile maritime corridors) से गुजरते हैं।
- एक शासी निकाय (governing body) पूल के गठन और कामकाज की देखरेख करेगा। इस पहल का उद्देश्य भारत के भीतर विशेष समुद्री अंडरराइटिंग और दावों की विशेषज्ञता विकसित करना है।
फायदे
यह पूल विदेशी बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमा बाजारों पर निर्भरता को कम करता है, जिससे संकट के दौरान नौवहन संचालन (shipping operations) को बनाए रखने में मदद मिलती है। यह बीमा प्रीमियम पर विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह (foreign exchange outflow) को भी कम करता है और अपने समुद्री व्यापार पर भारत की संप्रभुता (sovereignty) को बढ़ाता है।
स्रोत: The Hindu