खबरों में क्यों?
पर्यावरण विशेषज्ञों और भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ पैनल (expert panel) ने शहरी परिदृश्य (urban landscapes) में कोनोकार्पस (Conocarpus) प्रजाति के रोपण पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध (nationwide ban) लगाने का आग्रह किया है। तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्य पहले से ही इसके उपयोग पर रोक लगाते हैं, और स्वास्थ्य समस्याओं और पारिस्थितिक क्षति (ecological damage) की रिपोर्टों के बाद अदालतें व्यापक प्रतिबंधों (broader restrictions) पर विचार कर रही हैं।
पृष्ठभूमि
कोनोकार्पस, जिसे आमतौर पर बटनवुड (buttonwood) या मैंग्रोव (mangrove) का पेड़ कहा जाता है, फ्लोरिडा (Florida), कैरिबियन (Caribbean) और पश्चिम अफ्रीका (West Africa) के तटीय क्षेत्रों का मूल निवासी है। 2000 के दशक के दौरान अहमदाबाद (Ahmedabad) और चेन्नई (Chennai) जैसे शहरों में भारत में यह लोकप्रिय हो गया क्योंकि यह तेजी से बढ़ता है, सूखे (drought) को सहन करता है और घनी हरी छतरी (dense green canopy) बनाता है। नगर पालिकाओं ने छाया बनाने और परिदृश्य (landscapes) को सुंदर बनाने के लिए इसे सड़कों और रिवरफ्रंट (riverfronts) के किनारे लगाया।
हालाँकि, क्षेत्रीय अध्ययनों और उपाख्यानात्मक रिपोर्टों (anecdotal reports) से पता चलता है कि कोनोकार्पस पक्षियों और कीड़ों के लिए कम भोजन प्रदान करता है, जिससे इसे "ग्रीन डेजर्ट (green desert)" उपनाम मिला है। इसका पराग (pollen) और रस श्वसन एलर्जी (respiratory allergies), खांसी और अस्थमा (asthma) को ट्रिगर कर सकता है। पेड़ की आक्रामक जड़ें (aggressive roots) भूजल को चूसती हैं और नालियों, फुटपाथों और नींव को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मुद्दे और सिफारिशें (Issues and recommendations)
- पारिस्थितिक प्रभाव (Ecological impact): कोनोकार्पस में स्थानीय जीवों (local fauna) के लिए मकरंद (nectar) और फलों का अभाव है और यह देशी प्रजातियों (native species) को मात दे सकता है। विशेष रूप से इस पेड़ के साथ लगाए गए क्षेत्रों में पक्षियों और परागणकों (pollinator) की विविधता में कमी दिखाई देती है।
- स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं (Health concerns): डॉक्टरों ने इसके फूलों के मौसम में एलर्जी (allergy) के मामलों में वृद्धि की रिपोर्ट की है। पौधे का वायुजनित पराग (airborne pollen) संवेदनशील व्यक्तियों के श्वसन पथ (respiratory tract) को परेशान कर सकता है।
- बुनियादी ढांचे की क्षति (Infrastructure damage): इसकी जड़ें पाइपलाइनों, सीवर लाइनों (sewer lines) और फुटपाथों में प्रवेश करती हैं। सिटी इंजीनियरों का कहना है कि जहां पेड़ सघन रूप से (densely) लगाया गया है वहां रखरखाव की लागत (maintenance costs) अधिक है।
- नीतिगत प्रतिक्रियाएँ (Policy responses): गुजरात ने 2017 में इस पेड़ पर प्रतिबंध लगा दिया, और तमिलनाडु ने 2025 में इसे हटाना शुरू कर दिया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को सलाह देने वाले एक विशेषज्ञ पैनल ने देश भर में प्रतिबंध का विस्तार करने और कोनोकार्पस को नीम (neem), जामुन (jamun) और पीपल (peepal) जैसी देशी प्रजातियों से बदलने की सिफारिश की है।
निष्कर्ष
कोनोकार्पस विवाद यह दर्शाता है कि तेजी से बढ़ने वाले आभूषणों (ornamentals) की छिपी हुई लागत हो सकती है। शहरी योजनाकार अब उन देशी पेड़ों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो जैव विविधता (biodiversity) का समर्थन करते हैं, कम पानी का उपयोग करते हैं और कम स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं। हरियाली (greener), स्वस्थ शहर बनाने के लिए सावधानीपूर्वक प्रजातियों का चयन और नियमित निगरानी आवश्यक होगी।