अर्थव्यवस्था

Deendayal Port: कांडला बंदरगाह, गुजरात और समुद्री व्यापार

Deendayal Port: कांडला बंदरगाह, गुजरात और समुद्री व्यापार

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय समुद्री दिवस (National Maritime Day) 2026 पर दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष ने घोषणा की कि बंदरगाह ने 2025-26 के वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड 160.11 मिलियन टन कार्गो को संभाला, जो किसी भी प्रमुख भारतीय बंदरगाह द्वारा दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक थ्रूपुट (throughput) है। यह मील का पत्थर (milestone) दीनदयाल बंदरगाह को भारत की कार्गो रैंकिंग में शीर्ष पर रखता है।

पृष्ठभूमि

गुजरात के कच्छ जिले में कांडला क्रीक (Kandla Creek) पर स्थित, दीनदयाल बंदरगाह- जिसे पहले कांडला बंदरगाह के रूप में जाना जाता था- भारत के पश्चिमी तट पर एक प्राकृतिक ज्वारीय बंदरगाह (tidal harbour) है। विभाजन (partition) के बाद कराची में भीड़भाड़ को कम करने के लिए 1950 के दशक में निर्माण शुरू हुआ। 2017 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सम्मान में बंदरगाह का नाम बदलकर दीनदयाल कर दिया गया।

मुख्य विशेषताएं

  • प्राकृतिक बंदरगाह: बंदरगाह एक ज्वारीय खाड़ी में स्थित है, जहां 13 मीटर की न्यूनतम गहराई वाले 27 किलोमीटर लंबे ड्रेज्ड चैनल (dredged channel) के माध्यम से पहुंचा जा सकता है, जिससे बड़े जहाज (vessels) डॉक कर सकते हैं।
  • बुनियादी ढांचा (Infrastructure): टर्मिनल कांडला, टूना टेकरा (Tuna Tekra) और वाडिनार (Vadinar) में स्थित हैं। बंदरगाह पेट्रोलियम, कोयला, उर्वरक (fertilisers) और खाद्यान्न (food grains) के साथ-साथ कंटेनर यातायात (container traffic) जैसे थोक कार्गो (bulk cargo) को संभालता है।
  • कार्गो वृद्धि: 2025-26 में बंदरगाह ने 160.11 मिलियन टन का थ्रूपुट हासिल किया, जिसमें उर्वरक (32%), तरल कार्गो (liquid cargo) (23.4%) और कंटेनर की मात्रा (54%) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। बंदरगाह ने हरियाली शिपिंग (greener shipping) की दिशा में एक कदम के रूप में मेथनॉल बंकरिंग (methanol bunkering) का भी परीक्षण किया।

महत्व

  • आर्थिक जीवन रेखा: दीनदयाल बंदरगाह उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के भीतरी इलाकों (hinterland) की सेवा करता है, जो आवश्यक वस्तुओं के आयात और निर्यात को सुविधाजनक बनाता है। इसका उच्च थ्रूपुट देश भर में उद्योगों और कृषि का समर्थन करता है।
  • रणनीतिक भूमिका: निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण भारत की लॉजिस्टिक्स (logistics) क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाते हैं। मेथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन (alternative fuels) के साथ प्रयोग टिकाऊ समुद्री प्रथाओं (sustainable maritime practices) के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं।

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