समाचार में क्यों?
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR-NCL) ने तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (liquefied petroleum gas - LPG) के विकल्प के रूप में डाइमिथाइल ईथर (dimethyl ether - DME) का उत्पादन करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की। इस परियोजना का उद्देश्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं (geopolitical uncertainties) के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है।
पृष्ठभूमि
DME (CH3OCH3) एक स्वच्छ जलने वाली (clean-burning), रंगहीन गैस है जिसमें उच्च सीटेन संख्या (high cetane number) होती है। इसे प्राकृतिक गैस (natural gas), कोयला (coal), मेथनॉल (methanol) या बायोमास (biomass) से बनाया जा सकता है और यह डीजल या एलपीजी की जगह ले सकता है।
- पायलट विवरण: भागीदारों की योजना पुणे में तीन वर्षों में 2.5 टन-प्रति-दिन प्रदर्शन संयंत्र (demonstration plant) बनाने की है। यदि सफल होता है, तो वे इसे प्रतिदिन 100-500 टन तक बढ़ाने का इरादा रखते हैं।
- DME क्यों? पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई है। DME को बिना किसी बड़े संशोधन के LPG (20 प्रतिशत तक) के साथ मिलाया जा सकता है और यह साफ-सुथरा जलता है, जिससे डीजल की तुलना में कम कालिख (soot) और NOx निकलता है।
- उपयोग: खाना पकाने के ईंधन के अलावा, DME का उपयोग एरोसोल प्रणोदक (aerosol propellant) के रूप में किया जाता है और उच्च दक्षता (high efficiency) और कम उत्सर्जन (low emissions) की पेशकश करते हुए इंजनों में डीजल को प्रतिस्थापित कर सकता है।
- पर्यावरणीय लाभ: बायोमास या कचरे (waste) से DME उत्पादन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse gas emissions) को कम कर सकता है। इसमें कोई सल्फर नहीं होता है और दहन (combustion) के दौरान लगभग कोई कणिका तत्व (particulate matter) उत्पन्न नहीं करता है।
एलपीजी आपूर्ति आधार में विविधता लाकर और घरेलू DME उत्पादन को बढ़ावा देकर, यह परियोजना आयात निर्भरता (import dependence) को कम कर सकती है और स्वच्छ ऊर्जा में योगदान कर सकती है।