चर्चा में क्यों?
एक हालिया लेख (feature) ने ओडिशा के डोंगरिया कोंध (Dongria Kondh) की ओर ध्यान आकर्षित किया, जो एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group) है, जो अपनी टिकाऊ जीवन शैली (sustainable lifestyle) और नियमगिरी पहाड़ियों (Niyamgiri hills) को खनन (mining) से बचाने के अपने अभियान के लिए जाना जाता है। उनका संघर्ष स्वदेशी अधिकारों (indigenous rights) और पर्यावरण संरक्षण (environmental conservation) का प्रतीक बन गया है।
पृष्ठभूमि
डोंगरिया कोंध ओडिशा के रायगड़ा (Rayagada) और कालाहांडी (Kalahandi) जिलों की नियमगिरी पर्वत श्रृंखला (Niyamgiri hill range) में रहते हैं। पहाड़ियां घने जंगल (densely forested) और गहरी घाटियों (gorges) व नदियों (streams) से भरी हैं। एक डोंगरिया कोंध होने का अर्थ है उपजाऊ ढलानों (fertile slopes) पर खेती करना और पर्वत देवता नियम राजा (mountain deity Niyam Raja) की पूजा करना। समुदाय की आबादी लगभग 8,000 है। 2013 में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने फैसला सुनाया कि ग्राम सभाओं (Gram Sabhas) को यह तय करना चाहिए कि नियमगिरी में खनन हो सकता है या नहीं; डोंगरिया ने सर्वसम्मति से इस परियोजना का विरोध किया।
संस्कृति और आजीविका (Culture and livelihood)
- खेती और चारा खोजना (Farming and foraging): डोंगरिया स्थानांतरित बागवानी (shifting horticulture) करते हैं। वे संतरे, केले, अदरक, हल्दी और अन्य फसलें उगाते हैं। जंगल आम, कटहल, शहद और औषधीय जड़ी-बूटियों (medicinal herbs) जैसे जंगली खाद्य पदार्थ प्रदान करता है। अध्ययनों से पता चलता है कि वे लगभग 200 प्रकार के वन खाद्य पदार्थ (forest foods) इकट्ठा करते हैं और सौ से अधिक फसलें उगाते हैं। वे मुर्गियां, सूअर, बकरियां और भैंस भी पालते हैं।
- आध्यात्मिक मान्यताएं (Spiritual beliefs): उनके नाम झारनिया (Jharnia) का अर्थ है "नदियों का रक्षक" (protector of streams)। उनका मानना है कि वे नियम राजा (Niyam Raja) के शाही वंशज (royal descendants) हैं और पहाड़ पवित्र (sacred) हैं। उनकी कला में त्रिकोणीय रूपांकन (Triangular motifs) पहाड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- विशिष्ट पोशाक और अनुष्ठान: महिलाएं कई कान और नाक के छल्ले और मोतियों के हार पहनती हैं, जबकि पुरुष और लड़के भी नाक की अंगूठी पहनते हैं। गांवों में पवित्र स्थल (sacred sites) होते हैं जहां मातृ देवी धरनी (mother goddess Dharni), नियम राजा और अन्य देवताओं को जानवरों की बलि (sacrificed) दी जाती है।
नियमगिरी को बचाने का संघर्ष
- खनन का खतरा (Mining threat): 2000 के दशक की शुरुआत में वेदांत रिसोर्सेज (Vedanta Resources) ने नियमगिरी पहाड़ियों से बॉक्साइट (bauxite) निकालने की मांग की। डोंगरिया ने तर्क दिया कि खनन उनके जंगलों, नदियों और संस्कृति को नष्ट कर देगा। अंतर्राष्ट्रीय अभियानों (International campaigns) ने उनके कारण का समर्थन किया।
- कानूनी जीत (Legal victory): 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि स्थानीय ग्राम सभाएं (local Gram Sabhas) खनन प्रस्ताव (mining proposal) पर निर्णय लें। बारह ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से खनन को खारिज कर दिया, जिससे परियोजना रुक गई।
- निरंतर दबाव (Continuing pressure): कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट है कि समुदाय के नेताओं को उत्पीड़न (harassment) और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है क्योंकि खनन हित निष्कर्षण (extraction) के लिए दबाव डालना जारी रखते हैं।
संरक्षण का महत्व (Conservation significance)
- जल स्रोत (Water source): बॉक्साइट-कैप्ड नियमगिरी पहाड़ियां (bauxite-capped Niyamgiri hills) मानसूनी बारिश को अवशोषित करती हैं और वंशधारा नदी (Vamsadhara river) सहित एक सौ से अधिक बारहमासी नदियों (perennial streams) को जन्म देती हैं। ये नदियाँ ओडिशा और आंध्र प्रदेश के समुदायों को पीने और सिंचाई (irrigation) का पानी प्रदान करती हैं।
- जैव विविधता (Biodiversity): डोंगरिया के प्रबंधन (stewardship) ने समृद्ध जैव विविधता (rich biodiversity) को संरक्षित किया है, जिसमें बाघ, तेंदुए, विशाल गिलहरी (giant squirrels) और भालू (sloth bears) जंगलों में निवास करते हैं।
- पारंपरिक ज्ञान (Traditional knowledge): पौधों और जानवरों की उनकी विस्तृत समझ यह दर्शाती है कि कैसे स्वदेशी ज्ञान टिकाऊ भूमि प्रबंधन (sustainable land management) और जलवायु लचीलापन (climate resilience) में योगदान कर सकता है।
निष्कर्ष
डोंगरिया कोंध का नियमगिरी का बचाव दर्शाता है कि कैसे समुदाय सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) और पर्यावरण संसाधनों दोनों की रक्षा कर सकते हैं। समावेशी विकास (inclusive development) और संरक्षण के लिए उनके अधिकारों और ज्ञान का सम्मान करना आवश्यक है।