चर्चा में क्यों?
उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के e-Jagriti (ई-जागृति) प्लेटफॉर्म ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 (National Awards for e-Governance 2026) में सरकारी प्रक्रिया पुनर्रचना (Government Process Re-Engineering) के लिए रजत पुरस्कार (Silver Award) प्राप्त किया है। 1 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया यह पोर्टल विभिन्न उपभोक्ता शिकायत प्रणालियों (consumer grievance systems) को एक एकल पेपरलेस इंटरफ़ेस में एकीकृत करता है और इसने 90% से अधिक की केस निपटान दर (case disposal rate) हासिल की है。
पृष्ठभूमि
भारत के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) ने उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए ढाँचे को आधुनिक बनाया। इसने त्रि-स्तरीय (three-tier) विवाद निवारण तंत्र (dispute redressal mechanism) का निर्माण किया जिसमें ज़िला आयोग (district commissions), राज्य आयोग (state commissions) और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission - NCDRC) शामिल हैं। हालाँकि, कई पुरानी आईटी प्रणालियों (legacy IT systems)—ऑनलाइन उपभोक्ता मध्यस्थता प्रणाली (OCMS), ई-दाखिल (e-Daakhil), NCDRC केस मैनेजमेंट सिस्टम और CONFONET—ने शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने को बोझिल (cumbersome) बना दिया था। ई-जागृति इन सबको मिलाकर एक भूमिका-आधारित (role-based) पोर्टल बनाता है जिसे भारत और विदेश में उपभोक्ता, वकील तथा आयोग एक्सेस (access) कर सकते हैं。
प्रमुख विशेषताएँ
- सिंगल साइन-ऑन (Single sign-on): उपयोगकर्ता एक बार पंजीकरण करते हैं और ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कर सकते हैं, दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं, शुल्क का भुगतान कर सकते हैं और मामले की प्रगति (case progress) की निगरानी कर सकते हैं। यह पोर्टल वर्चुअल सुनवाई (virtual hearings) का समर्थन करता है, जिससे पक्षकार दुनिया में कहीं से भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं।
- पुरानी प्रणालियों का एकीकरण (Integration of legacy systems): ई-जागृति OCMS, ई-दाखिल, NCDRC CMS और CONFONET से डेटा को मिलाता है, यह सुनिश्चित करता है कि ऐतिहासिक मामले संरक्षित रहें और न्यायाधीशों के पास व्यापक जानकारी हो।
- केस निपटान दरें (Case disposal rates): अपने पहले पूरे वर्ष में, प्लेटफ़ॉर्म ने 2.29 लाख से अधिक मामले दर्ज़ करने और 2.07 लाख से अधिक मामलों के निपटान की सुविधा प्रदान की, जिससे समग्र निपटान दर 90.75% हो गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निपटान दर में सुधार होकर 92.3% हो गया।
- वर्चुअल सुनवाई और अनिवासी भारतीयों (NRI) की पहुँच: 2024-25 और 2025-26 के बीच वीडियो-कॉन्फ्रेंस की सुनवाई की संख्या चार गुनी हो गई। प्लेटफ़ॉर्म पर 3,300 से अधिक अनिवासी भारतीयों (NRIs) ने पंजीकरण कराया है; वे भारत लौटे बिना भी शिकायतें दर्ज़ कर सकते हैं, और कई मामलों का पहले ही निपटारा किया जा चुका है।
- सहायता सेवाएँ (Support services): साप्ताहिक जनसुनवाई सत्र (Jansunwai sessions) और एक हेल्प-डेस्क प्रणाली उपयोगकर्ता की शंकाओं (user queries) का समाधान करती है। ईमेल सूचनाओं और आदेशों के अपलोड होने में काफी वृद्धि हुई है, जिससे आयोगों और वादियों (litigants) के बीच समय पर संचार सुनिश्चित होता है।
निष्कर्ष
ई-जागृति प्रदर्शित करता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म न्याय तक पहुँच (access to justice) को बदल सकते हैं। कागज़ी कार्रवाई को कम करके, ऑनलाइन सुनवाई को सक्षम करके और सूचनाओं को केंद्रीकृत करके, इसने उपभोक्ता शिकायत निवारण (consumer grievance redressal) को तेज़ और अधिक पारदर्शी (transparent) बना दिया है। इसकी सफलता को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों का निरंतर प्रशिक्षण और आभासी बुनियादी ढाँचे (virtual infrastructure) का विस्तार महत्वपूर्ण होगा。