अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ईस्ट एशिया समिट (EAS): सदस्य, ASEAN की केंद्रीयता और भारत की भूमिका

ईस्ट एशिया समिट (EAS): सदस्य, ASEAN की केंद्रीयता और भारत की भूमिका

समाचार में क्यों?

विदेश मंत्री (External Affairs Minister) सुब्रह्मण्यम जयशंकर (Subrahmanyam Jaishankar) ने मनीला (Manila) में East Asia Summit की बैठक में भाग लिया। यह 16वीं विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जो 23 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी। उन्होंने सुरक्षित और निर्बाध (unimpeded) अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों (international waterways) का आह्वान किया। उन्होंने नाविकों, नागरिक जहाज़ों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों का भी विरोध किया।

पृष्ठभूमि

East Asia Summit (EAS) एक नेताओं के नेतृत्व वाला इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) मंच है जो क्षेत्रीय रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक सवालों पर चर्चा करता है।

Association of Southeast Asian Nations (ASEAN) ने वार्षिक शिखर बैठकों (summit meetings) सहित इस प्रक्रिया का निर्माण किया और इसकी अध्यक्षता करता है।

EAS कोई सैन्य गठबंधन (military alliance) या संधि संगठन नहीं है, बल्कि संवाद और सहयोग का एक मंच है।

बैठक-संख्या स्पष्टीकरण: मनीला ने जुलाई में 16वीं EAS विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की। 21वां वार्षिक नेताओं का शिखर सम्मेलन एक अलग बैठक है जो नवम्बर 2026 के लिए नियोजित है।

EAS कैसे विकसित हुआ?

  1. 14 दिसम्बर 2005: पहला EAS कुआलालंपुर (Kuala Lumpur), मलेशिया में मिला।
  2. 2005: भारत सोलह संस्थापक प्रतिभागियों में से एक के रूप में शामिल हुआ।
  3. 2011: रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) शामिल हुए, जिससे सदस्यता बढ़कर अठारह हो गई।
  4. 26 अक्टूबर 2025: तिमोर-लेस्ते (Timor-Leste) ASEAN का ग्यारहवाँ सदस्य बना।
  5. शामिल होने के बाद: तिमोर-लेस्ते उन्नीसवाँ EAS सदस्य भी बन गया।

उन्नीस सदस्य कौन हैं?

ग्यारह ASEAN सदस्य

ब्रुनेई (Brunei), कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस (Philippines), सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम यह समूह बनाते हैं।

आठ अन्य भाग लेने वाले देश

ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूज़ीलैंड, कोरिया गणराज्य (Republic of Korea), रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका यह समूह बनाते हैं।

Prelims focus: भारत एक संस्थापक EAS सदस्य है। तिमोर-लेस्ते अब ग्यारहवाँ ASEAN सदस्य और उन्नीसवाँ EAS सदस्य दोनों है।

"ASEAN centrality (ASEAN केंद्रीयता)" का क्या अर्थ है?

ASEAN बैठकें बुलाता है और उनके एजेंडे का मार्गदर्शन करता है, जबकि बड़ी शक्तियां इसके क्षेत्रीय ढांचे के भीतर भाग लेती हैं।

केंद्रीयता सदस्यों की विदेश नीतियों को नियंत्रित नहीं करती है, बल्कि ASEAN को क्षेत्रीय संवाद के संस्थागत केंद्र में रखती है।

EAS कार्य के विभिन्न स्तर

  • नेताओं का शिखर सम्मेलन (Leaders’ summit): सरकार या राज्य के प्रमुख रणनीतिक दिशा प्रदान करते हैं।
  • विदेश मंत्री: वे क्षेत्रीय मुद्दों की समीक्षा करते हैं और नेताओं की चर्चाओं की तैयारी跨 करते हैं।
  • आर्थिक मंत्री: वे व्यापार और व्यापक आर्थिक सहयोग पर चर्चा करते हैं।
  • वरिष्ठ अधिकारी: वे परियोजनाओं का समन्वय करते हैं और मंत्रिस्तरीय कार्यों की तैयारी करते हैं।

छह स्थापित सहयोग प्राथमिकताएं

  1. पर्यावरण और ऊर्जा सहयोग स्वच्छ और अधिक सुरक्षित विकास का समर्थन करता है।
  2. शिक्षा सहयोग कौशल, आदान-प्रदान और संस्थागत लिंक बनाता है।
  3. वित्त सहयोग लचीलेपन (resilience) और क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता को संबोधित करता है।
  4. वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया शामिल है।
  5. आपदा प्रबंधन (Disaster management) चेतावनी, राहत और पुनर्प्राप्ति क्षमताओं में सुधार करता है।
  6. ASEAN कनेक्टिविटी परिवहन, डिजिटल और लोगों से लोगों के संपर्क (people-to-people links) का समर्थन करती है।

मनीला में भारत के मुख्य संदेश

  • अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सुरक्षित, खुले और निर्बाध (unimpeded) रहने चाहिए।
  • नागरिक नाविकों, वाणिज्यिक जहाज़ों और बुनियादी ढांचे पर हमला नहीं किया जाना चाहिए।
  • कूटनीति और संवाद (Diplomacy and dialogue) को पश्चिम एशिया (West Asia) में संघर्षों को संबोधित करना चाहिए।
  • ASEAN centrality को एक खुले, समावेशी (inclusive) और समृद्ध (prosperous) इंडो-पैसिफिक का मार्गदर्शन करना चाहिए।
  • संघर्षों से लगने वाले आर्थिक झटके विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों पर बोझ डालते हैं।
  • सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय साइबर-घोटाला (transnational cyber-scam) नेटवर्क के खिलाफ सहयोग करना चाहिए।
  • म्यांमार में शांतिपूर्ण समाधान के लिए ASEAN के प्रयास महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और अंतर्राष्ट्रीय कानून

भारत ने 1982 के समुद्री कन्वेंशन का अनुपालन करने वाले एक प्रभावी, कानूनी रूप से बाध्यकारी (legally binding) क्षेत्रीय आचार संहिता (Code of Conduct) का समर्थन किया।

वह संधि United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) है।

एक क्षेत्रीय संहिता (code) को वार्ता के बाहर के देशों के लिए वैध नेविगेशन (lawful navigation) और ओवरफ़्लाइट अधिकारों (overflight rights) को संरक्षित करना चाहिए।

भारत के लिए EAS क्यों मायने रखता है?

  • यह भारत को प्रमुख इंडो-पैसिफिक शक्तियों के साथ एक मेज़ पर रखता है।
  • यह भारत की Act East Policy और ASEAN साझेदारी का समर्थन करता है।
  • यह समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन को कवर करता है।
  • यह एक औपचारिक सैन्य गठबंधन (formal military alliance) की आवश्यकता के बिना चर्चा की अनुमति देता है।
  • यह बड़ी प्रतिद्वंद्विता (rivalries) के बीच ASEAN को छोटे राज्यों की बैठक बुलाने की शक्ति देता है।

निष्कर्ष

EAS, ASEAN के नेतृत्व, अंतर्राष्ट्रीय कानून और निरंतर सदस्य जुड़ाव के माध्यम से संवाद (dialogue) को व्यावहारिक सहयोग से जोड़ता है।

स्रोत

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