रक्षा

फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन: इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, प्रौद्योगिकी

फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन: इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, प्रौद्योगिकी

समाचार में क्यों?

हाल ही में संघर्ष क्षेत्रों में आतंकवादी समूहों ने फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन का इस्तेमाल किया है। इन मानवरहित विमानों को रेडियो सिग्नल के बजाय अल्ट्रा-थिन फाइबर केबल के माध्यम से निर्देशित किया जाता है, जिससे वे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (electronic warfare) के माहौल में काम कर सकते हैं। रिपोर्टों में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे हाल की झड़पों के दौरान ऐसे ड्रोन ने जैमिंग (jamming) के प्रयासों को विफल कर दिया।

पृष्ठभूमि

पारंपरिक ड्रोन रेडियो तरंगों के माध्यम से अपने पायलटों के साथ संचार करते हैं। हालाँकि, आधुनिक युद्धक्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स (electronic countermeasures) से भरे हुए हैं जो रेडियो सिग्नल को जैम (jam) या स्पूफ (spoof) कर सकते हैं। फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन ऑपरेटर को ड्रोन से जोड़ने वाली बाल जैसी पतली केबल को बाहर निकालकर इस चुनौती का समाधान करते हैं। केबल हाई-स्पीड डिजिटल डेटा और नियंत्रण संकेत ले जाती है, जिससे कनेक्शन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (electromagnetic interference) से सुरक्षित हो जाता है। यह तकनीक सैन्य अनुसंधान से उभरी है और इसे कई सेनाओं द्वारा टोही (reconnaissance) और लक्ष्य निर्धारण के लिए अपनाया गया है।

फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन कैसे काम करते हैं

  • ड्रोन के साथ ऑप्टिकल फाइबर की एक छोटी रील (reel) जुड़ी होती है। जैसे-जैसे विमान उड़ता है, यह अपने पीछे केबल को खोलता जाता है।
  • नियंत्रण कमांड और लाइव वीडियो फ़ीड बहुत कम लेटेंसी (low latency) के साथ उच्च गति से फाइबर के माध्यम से यात्रा करते हैं। चूंकि सिग्नल रेडियो-आधारित के बजाय भौतिक है, इसलिए इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों द्वारा इंटरसेप्ट या जैम नहीं किया जा सकता है।
  • फाइबर कई किलोमीटर लंबा हो सकता है, जिससे पायलट के छिपे रहने के दौरान ड्रोन लंबी दूरी पर काम कर सकता है।
  • मिशन समाप्त होने के बाद, फाइबर को अक्सर काट दिया जाता है और जमीन पर छोड़ दिया जाता है। कुछ डिज़ाइन आंशिक री-स्पूलिंग (re-spooling) की अनुमति देते हैं, लेकिन उलझने की समस्या हो सकती है।

फायदे

  • एंटी-जैमिंग क्षमता (Anti-jamming capability): ऑप्टिकल केबल लिंक को रेडियो-फ़्रीक्वेंसी जैमिंग और हैकिंग से सुरक्षित बनाती है।
  • सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन: फाइबर हाई-डेफिनिशन वीडियो और सटीक नियंत्रण के लिए हाई-बैंडविड्थ, लो-लेटेंसी संचार प्रदान करता है।
  • स्टील्थी ऑपरेशन (Stealthy operation): रेडियो उत्सर्जन के बिना, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का उपयोग करके ड्रोन का पता लगाना मुश्किल होता है।

सीमाएँ

  • सीमित रेंज और गतिशीलता (Limited range and manoeuvrability): ड्रोन फाइबर की लंबाई से आगे नहीं उड़ सकता है। बाधाएँ केबल को उलझा सकती हैं या काट सकती हैं।
  • युद्धक्षेत्र का कचरा: फेंका गया फाइबर जमीन पर बना रहता है और कर्मियों और उपकरणों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
  • प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स: फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन के संचालन और तैनाती के लिए कुशल कर्मचारियों और अतिरिक्त उपकरणों की आवश्यकता होती है।

महत्व

फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन उन संघर्षों में उपयोगी साबित हुए हैं जहाँ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तीव्र है, जैसे कि यूक्रेन में। जैमिंग से बचने और विश्वसनीय रीयल-टाइम इंटेलिजेंस प्रदान करने की उनकी क्षमता उन्हें टोही (reconnaissance), आर्टिलरी स्पॉटिंग (artillery spotting) और सटीक हमलों के लिए मूल्यवान बनाती है। जैसे-जैसे सेनाएँ काउंटर-ड्रोन तकनीकों में निवेश करती हैं, फाइबर-ऑप्टिक सिस्टम एक ऐसा विकल्प प्रदान करते हैं जो भविष्य की युद्धक्षेत्र रणनीति को प्रभावित करेगा।

स्रोत: Indian Express
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