खबरों में क्यों?
मार्च 2026 में नीति आयोग (NITI Aayog) ने अपने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (Fiscal Health Index - FHI) का दूसरा संस्करण जारी किया, जिसमें यह आकलन किया गया कि भारतीय राज्य अपने वित्त (finances) का कितनी अच्छी तरह प्रबंधन करते हैं। सूचकांक व्यय (expenditure), राजस्व (revenue) और ऋण प्रबंधन (debt management) में ताकत और कमजोरियों की पहचान करने में मदद करता है।
पृष्ठभूमि
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक एक समग्र उपाय है जिसे राज्यों द्वारा जिम्मेदार राजकोषीय व्यवहार (responsible fiscal behaviour) को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पांच स्तंभों में प्रत्येक राज्य का मूल्यांकन करता है:
- व्यय की गुणवत्ता (Quality of expenditure): कुल व्यय में पूंजीगत व्यय (capital spending) की हिस्सेदारी और सामाजिक क्षेत्र के खर्च (social sector spending) का अनुपात।
- राजस्व जुटाना (Revenue mobilisation): स्वयं के स्रोत करों (own-source taxes) और गैर-कर राजस्व (non-tax revenues) की वृद्धि और संरचना।
- राजकोषीय विवेक (Fiscal prudence): बजटीय संतुलन (Budgetary balance), घाटे के लक्ष्यों (deficit targets) का पालन और राजकोषीय उत्तरदायित्व कानूनों (fiscal responsibility laws) का अनुपालन।
- ऋण स्थिरता (Debt sustainability): ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात (Debt-to-GSDP ratio) और राजस्व के सापेक्ष ऋण चुकाने की लागत।
- राजकोषीय बफ़र्स (Fiscal buffers): झटकों को अवशोषित करने के लिए भंडार (reserves) और गारंटी की पर्याप्तता।
2026 संस्करण की मुख्य विशेषताएं
- राज्यों की रैंकिंग: बड़े राज्यों में, ओडिशा, गोवा और झारखंड को स्वस्थ स्वयं-कर अनुपात, कम घाटे और स्थायी ऋण स्तर के साथ "अचीवर्स (Achievers)" के रूप में वर्गीकृत किया गया था। गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य "फ्रंट-रनर (Front-Runners)" थे। मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु और राजस्थान को "परफॉर्मर्स (Performers)" के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जबकि पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश और पंजाब उच्च घाटे और ऋण के कारण "आकांक्षी (Aspirational)" श्रेणी में आ गए।
- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य: अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड "अचीवर्स" के रूप में उभरे। असम, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा "परफॉर्मर" थे, जबकि हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड "आकांक्षी" थे।
- नीतिगत सिफारिशें: नीति आयोग ने राज्यों से अपने कर आधार (विशेष रूप से माल और सेवा कर (GST) को पूरी तरह से लागू करके) को व्यापक बनाने, वेतन और पेंशन जैसे प्रतिबद्ध खर्चों (committed expenditures) को युक्तिसंगत बनाने, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य में पूंजीगत निवेश (capital investments) को प्राथमिकता देने और योजना (planning) को बेहतर बनाने के लिए मध्यम अवधि के राजकोषीय ढांचे (medium-term fiscal frameworks) को अपनाने का आग्रह किया।
- नए राज्यों को शामिल करना: राजकोषीय स्वास्थ्य की व्यापक तस्वीर प्रदान करने के लिए, 2026 सूचकांक ने पहली बार दस पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों सहित सभी 28 राज्यों को शामिल किया।
राजकोषीय स्वास्थ्य क्यों मायने रखता है?
मजबूत राज्य वित्त (Sound state finances) व्यापक आर्थिक स्थिरता (macroeconomic stability) का आधार हैं। राज्य स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारियों को वहन करते हैं, इसलिए लगातार घाटा और बढ़ता कर्ज विकास खर्च को कम कर सकता है। FHI जैसे नियमित आकलन पारदर्शिता और बेंचमार्किंग (benchmarking) को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे राज्यों को साथियों से सीखने और बेहतर राजकोषीय प्रथाओं (fiscal practices) को अपनाने में मदद मिलती है।
स्रोत: PIB.