खबरों में क्यों?
मेघालय कैबिनेट ने परिषद चुनावों में गैर-आदिवासियों की भागीदारी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद मार्च 2026 में गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (Garo Hills Autonomous District Council - GHADC) का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया। यह विस्तार राज्य सरकार को आदिवासी प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए संशोधनों पर विचार करने का समय देता है।
पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्त जिलों (autonomous districts) के रूप में प्रशासित किया जाता है। राज्यपाल जिलों का निर्माण या संशोधन कर सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक 30 सदस्यों तक (राज्यपाल द्वारा चार मनोनीत और बाकी पांच साल के लिए चुने गए) की एक जिला परिषद (District Council) द्वारा शासित होता है। परिषदों को भूमि, वन प्रबंधन, झूम खेती (shifting cultivation), ग्राम प्रशासन, विरासत, विवाह और सामाजिक रीति-रिवाजों पर कानून बनाने का अधिकार है। वे प्राथमिक स्कूलों, बाजारों और सड़कों का प्रबंधन करते हैं, ग्राम न्यायालय स्थापित करते हैं और कर एकत्र करते हैं। ये व्यवस्थाएं पहाड़ी जनजातियों की विशिष्ट जीवन शैली को मान्यता देती हैं और भारतीय संघ के भीतर उनकी संस्कृति को संरक्षित करने का लक्ष्य रखती हैं。
जिला परिषदों की मुख्य विशेषताएं
- विधायी शक्तियां: परिषदें भूमि स्वामित्व, जंगलों, झूम खेती, ग्राम प्रशासन और प्रथागत कानून (customary law) पर कानून बना सकती हैं, जो राज्यपाल की सहमति के अधीन हैं।
- कार्यकारी कार्य: वे प्राथमिक स्कूलों, औषधालयों, बाजारों, पानी की आपूर्ति और सड़क निर्माण का प्रबंधन करते हैं। परिषदें प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की भाषा (language of instruction) निर्धारित कर सकती हैं।
- न्यायिक शक्तियां: ग्राम और जिला परिषद न्यायालय प्रथागत प्रथाओं (customary practices) के अनुसार जनजातियों से जुड़े मामलों का फैसला करते हैं।
- वित्तीय स्वायत्तता (Financial autonomy): परिषदें बजट तैयार करती हैं, भू-राजस्व और व्यापार, जानवरों, वाहनों और बाजारों पर कर एकत्र करती हैं, और खनिजों के निष्कर्षण का लाइसेंस देती हैं।
गारो हिल्स में वर्तमान मुद्दा
मेघालय की तीन परिषदों में से एक, GHADC में उस समय विरोध प्रदर्शन देखा गया जब गैर-आदिवासियों ने स्थानीय परिषद चुनावों में मतदान का अधिकार मांगा। छह महीने का विस्तार चुनाव को अक्टूबर 2026 तक टाल देता है, जिससे सरकार को चुनावी नियमों (electoral rules) की समीक्षा करने की अनुमति मिलती है। समर्थकों का तर्क है कि स्थानीय मामलों का फैसला केवल स्वदेशी जनजातियों (indigenous tribes) को करना चाहिए, जबकि विरोधी बहिष्कार (exclusion) के खिलाफ आगाह करते हैं। यह प्रकरण छठी अनुसूची क्षेत्रों में लोकतांत्रिक भागीदारी और आदिवासी पहचान की सुरक्षा के बीच जारी बातचीत को दर्शाता है।
स्रोत: News on Air