पर्यावरण

ग्रेट निकोबार विकास (Great Nicobar Development): बंदरगाह परियोजना और पर्यावरणीय चिंताएं

ग्रेट निकोबार विकास (Great Nicobar Development): बंदरगाह परियोजना और पर्यावरणीय चिंताएं

चर्चा में क्यों?

संसद सदस्यों और पर्यावरण समूहों ने ग्रेट निकोबार द्वीप को विकसित करने की सरकार की योजनाओं पर बहस की है, जिसमें एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और टाउनशिप शामिल हैं। समर्थकों का तर्क है कि इस परियोजना से अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक उपस्थिति मजबूत होगी, जबकि आलोचकों ने वनों की कटाई और स्वदेशी समुदायों के लिए खतरों की चेतावनी दी है।

पृष्ठभूमि

ग्रेट निकोबार, अंडमान और निकोबार श्रृंखला का सबसे दक्षिणी द्वीप, लगभग 921 वर्ग किमी को कवर करता है और शोम्पेन (Shompen) और निकोबारी (Nicobarese) लोगों का घर है। यह घने उष्णकटिबंधीय (tropical) जंगलों और तटीय मैंग्रोव को होस्ट करता है जो निकोबार मेगापोड, केकड़ा खाने वाले मकाक (crab-eating macaque) और निकोबार ट्री श्रू जैसी स्थानिक (endemic) प्रजातियों का समर्थन करते हैं। द्वीप का अधिकांश हिस्सा ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है, जिसे 2013 में यूनेस्को द्वारा नामित किया गया था। 2021 में सरकार ने एक समग्र विकास योजना प्रस्तावित की जिसमें गैलाथिया खाड़ी (Galathea Bay) में एक गहरे पानी का ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक टाउनशिप और बिजली संयंत्र शामिल हैं। परियोजना को पारिस्थितिक नुकसान को कम करने की शर्तों के साथ पर्यावरण मंजूरी मिल गई है।

प्रमुख पहलू और चिंताएं

  • रणनीतिक महत्व: प्रस्तावित बंदरगाह का उद्देश्य पूर्वी एशिया और हिंद महासागर के बीच कंटेनर जहाजों के लिए ग्रेट निकोबार को एक प्रमुख केंद्र (hub) में बदलना है, जिससे सिंगापुर जैसे बंदरगाहों पर निर्भरता कम हो सके। एक हवाई अड्डा अंडमान और निकोबार कमान के लिए निगरानी और रसद (logistics) में सुधार करेगा।
  • जैव विविधता: बायोस्फीयर रिजर्व में फूल वाले पौधों की लगभग 650 प्रजातियाँ, 14 स्तनधारी, 71 पक्षी और कई सरीसृप और कीड़े हैं। यह द्वीप लेदरबैक कछुओं (leatherback turtles) के लिए घोंसला बनाने का महत्वपूर्ण आवास भी है।
  • पर्यावरणीय चिंताएं: निर्माण में 8 लाख से अधिक पेड़ों को काटना और तटीय क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करना शामिल होगा, जिससे कछुओं के घोंसले बनाने वाले समुद्र तटों और प्रवाल भित्तियों (coral reefs) में संभावित व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। संरक्षणवादियों (Conservationists) को डर है कि इससे आवास खंडित हो सकते हैं और अर्ध-घुमंतू (semi‑nomadic) शोम्पेन समुदाय विस्थापित हो सकता है।
  • सरकारी आश्वासन: अधिकारियों का दावा है कि केवल खराब हो चुके जंगल को ही साफ किया जाएगा और प्रतिपूरक वनीकरण (compensatory afforestation) और सामाजिक प्रभाव आकलन आदिवासी अधिकारों की रक्षा करेंगे। विपक्षी दलों ने स्वतंत्र समीक्षा और अधिक पारदर्शिता की मांग की है।

स्रोत

Times of India

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources Free downloads Booklist 2026 Previous year papers Video notes YouTube channel