पर्यावरण

Hokersar Lake: श्रीनगर आर्द्रभूमि, रामसर स्थल और पारिस्थितिक क्षरण

Hokersar Lake: श्रीनगर आर्द्रभूमि, रामसर स्थल और पारिस्थितिक क्षरण

खबरों में क्यों?

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General) के हालिया ऑडिट ने श्रीनगर के पास एक महत्वपूर्ण पक्षी अभयारण्य होकर्सर झील (Hokersar Lake) को हुए गंभीर पारिस्थितिक नुकसान को उजागर किया है। रिपोर्ट से पता चला है कि आर्द्रभूमि (wetland) के बड़े हिस्से पर अतिक्रमण किया गया है और प्रदूषित किया गया है, जिससे खुले पानी के क्षेत्रों में गिरावट आई है और प्रवासी पक्षियों (migratory bird) के आवासों को खतरा पैदा हो गया है। निष्कर्षों ने तत्काल संरक्षण उपायों (urgent conservation measures) की मांग को फिर से शुरू कर दिया है。

पृष्ठभूमि

होकर्सर झील जम्मू और कश्मीर में श्रीनगर से लगभग 10 किमी पश्चिम में स्थित एक रामसर-नामित आर्द्रभूमि (Ramsar‑designated wetland) है। लगभग 1,375 हेक्टेयर में फैली यह झील दूधगंगा और सुखनाग (Doodhganga and Sukhnag) नदियों से पानी प्राप्त करती है और साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए एक पड़ाव का काम करती है। कभी अपने साफ पानी और समृद्ध दलदलों (rich marshes) के लिए जानी जाने वाली यह झील अनियंत्रित विकास, अवसादन (sedimentation) और जलीय खरपतवारों (aquatic weeds) की अनियंत्रित वृद्धि के कारण पीड़ित है।

ऑडिट से क्या पता चला

  • खुले पानी का नुकसान: सैटेलाइट विश्लेषण से पता चला है कि 2014 और 2020 के बीच खुले पानी का क्षेत्र लगभग सात प्रतिशत सिकुड़ गया क्योंकि गाद (silt) और खरपतवारों ने झील को अवरुद्ध कर दिया।
  • अतिक्रमण (Encroachments): आर्द्रभूमि के लगभग 2,500 कनाल (125 हेक्टेयर से अधिक) पर अवैध निर्माणों और कृषि का कब्जा हो गया है, जिससे पक्षियों के आवास विखंडित हो गए हैं।
  • आवास में बदलाव: विलो और झाड़ियों (willow and scrub) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में वृद्धि हुई है जबकि दलदली और खुले पानी वाले क्षेत्रों में कमी आई है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ गया है।
  • प्रदूषण: आस-पास की बस्तियों से अनुपचारित सीवेज (untreated sewage) और ठोस अपशिष्ट (solid waste) झील में प्रवेश करते हैं, जिससे आक्रामक पौधों (invasive plants) के विकास को बढ़ावा मिलता है और ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है।
  • खराब प्रबंधन: संरक्षित क्षेत्र की सीमाएँ अचिह्नित (un‑demarcated) बनी हुई हैं, खरपतवार हटाना छिटपुट है और प्रबंधन योजनाएँ पुरानी हैं, जिससे संरक्षण के प्रयास बेतरतीब (haphazard) हो रहे हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • पारिस्थितिक महत्व (Ecological importance): होकर्सर लाखों प्रवासी पक्षियों का समर्थन करता है और श्रीनगर के लिए एक बाढ़ जलाशय (flood reservoir) के रूप में कार्य करता है। इसे खोने से जैव विविधता (biodiversity) कम होगी और बाढ़ का खतरा बढ़ेगा।
  • पुनर्स्थापना की आवश्यकता: ऑडिट में सीमाओं का सीमांकन करने, अतिक्रमण हटाने, गाद निकालने (dredging silt), आक्रामक खरपतवारों को नियंत्रित करने और सीवेज उपचार संयंत्र (sewage treatment plants) स्थापित करने की सिफारिश की गई है।
  • सामुदायिक भागीदारी: संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करना चाहिए, जिसमें इकोटूरिज्म (ecotourism) जैसे टिकाऊ आजीविका के विकल्प प्रदान करना और आर्द्रभूमि के मूल्य के बारे में जागरूकता बढ़ाना शामिल है।
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