चर्चा में क्यों?
International Criminal Court (ICC) ने खालिद मोहम्मद अली अल हिशरी (Khaled Mohamed Ali El Hishri) के खिलाफ मामले में 19-21 मई 2026 के लिए आरोपों की पुष्टि (confirmation-of-charges) की सुनवाई निर्धारित की है। उन पर 2014 और 2020 के बीच त्रिपोली, लीबिया में मितिगा जेल (Mitiga prison) में युद्ध अपराध (war crimes) और मानवता के खिलाफ अपराध (crimes against humanity) करने का आरोप है।
पृष्ठभूमि
ICC एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय है जिसे 2002 में रोम संविधि (Rome Statute) द्वारा नरसंहार (genocide), मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध (crime of aggression) के लिए व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने के लिए स्थापित किया गया था। 2026 की शुरुआत तक, लगभग 125 देश संविधि के पक्षकार (parties) हैं। चीन, भारत, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी प्रमुख शक्तियां इसमें शामिल नहीं हुई हैं।
न्यायालय का अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) तभी होता है जब राष्ट्रीय अदालतें मुकदमा चलाने में अनिच्छुक या असमर्थ हों। इसे सदस्य देशों के योगदान से वित्तपोषित किया जाता है और Assembly of States Parties द्वारा शासित किया जाता है। मामलों की जांच Office of the Prosecutor द्वारा की जाती है और विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 18 न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई की जाती है।
खालिद मोहम्मद अली अल हिशरी का मामला
- एक लीबियाई नागरिक, अल हिशरी ने कथित तौर पर 2014 और 2020 के बीच मितिगा जेल के निदेशक के रूप में कार्य किया। ICC अभियोजक (prosecutor) उन पर युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के 17 आरोपों का आरोप लगाता है, जिसमें हत्या, यातना (torture), बलात्कार, दासता (enslavement) और राजनीतिक, धार्मिक, जातीय या लिंग के आधार पर उत्पीड़न शामिल हैं।
- आरोप 900 से अधिक बंदियों (detainees) के खिलाफ किए गए दुर्व्यवहारों को कवर करते हैं, जिनमें से कई लीबिया के माध्यम से पारगमन (transiting) करने वाले प्रवासी (migrants) थे।
- जुलाई 2025 में अल हिशरी के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। जर्मन अधिकारियों ने उन्हें छह दिन बाद गिरफ्तार कर लिया, और दिसंबर 2025 में उन्हें ICC की हिरासत में स्थानांतरित कर दिया गया। एक अन्य संदिग्ध, ओसामा एलमसरी नजीम (Osama Elmasry Njeem), अभी भी फरार है।
- यह ICC की लंबे समय से चल रही लीबिया जांच में निरोध केंद्रों (detention centres) में प्रवासियों के खिलाफ अपराधों को संबोधित करने वाला पहला मामला है। सुनवाई यह निर्धारित करेगी कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं या नहीं।
International Criminal Court के बारे में
- रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के लिए तदर्थ न्यायाधिकरणों (ad hoc tribunals) के बाद दण्डमुक्ति (impunity) को रोकने की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की इच्छा से ICC का जन्म हुआ था। रोम संविधि को 1998 में अपनाया गया था और यह 2002 में लागू हुआ।
- न्यायालय व्यक्तियों पर मुकदमा चला सकता है - आधिकारिक पद की परवाह किए बिना - जब अपराध किसी सदस्य राज्य के क्षेत्र में या उसके नागरिकों द्वारा किए जाते हैं, या जब United Nations Security Council द्वारा संदर्भित किए जाते हैं।
- ICC ने युगांडा, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सूडान (दारफुर) और मध्य अफ्रीकी गणराज्य जैसे देशों में दो दर्जन से अधिक जांच खोली हैं। इसने कुछ ही सजाएं (convictions) हासिल की हैं, लेकिन धीमी कार्यवाही (slow proceedings) और कथित पूर्वाग्रह (perceived bias) के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है।
निष्कर्ष
अल हिशरी मामले में आगामी सुनवाई गंभीर अपराधों को संबोधित करने में ICC की निरंतर प्रासंगिकता (relevance) को उजागर करती है। यह राज्यों के सहयोग करने की इच्छा का भी परीक्षण करता है: जर्मनी ने संदिग्ध को सौंप दिया, जबकि अन्य सरकारें अनिच्छुक रही हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय के वादे और चुनौतियों दोनों को रेखांकित करता है।