विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

IISc Brain Co-Processors: AI, न्यूरोमॉर्फिक तकनीक और स्ट्रोक

IISc Brain Co-Processors: AI, न्यूरोमॉर्फिक तकनीक और स्ट्रोक

चर्चा में क्यों?

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु ने इम्प्लांटेबल (implantable) और नॉन-इनवेसिव ब्रेन को-प्रोसेसर (non-invasive brain co-processors) विकसित करने के लिए एक मूनशॉट परियोजना (moonshot project) की घोषणा की है। इन उपकरणों का उद्देश्य तंत्रिका संकेतों को डिकोड करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके उन्हें संसाधित करना और सुधारात्मक संकेतों (corrective signals) को मस्तिष्क में वापस भेजना है, जिससे संभावित रूप से स्ट्रोक से बचे लोगों को खोए हुए मोटर कौशल (motor skills) को पुनः प्राप्त करने में मदद मिल सके। यह पहल ब्रेन, कम्प्यूटेशन एंड डेटा साइंस प्रोग्राम का हिस्सा है और इसे प्रतीक्षा ट्रस्ट (Pratiksha Trust) द्वारा वित्त पोषित किया गया है।

पृष्ठभूमि

ब्रेन को-प्रोसेसर एक उन्नत प्रणाली है जो तंत्रिका तंत्र (nervous system) के साथ इंटरफेस करती है। यह न्यूरोमोर्फिक हार्डवेयर (neuromorphic hardware) को जोड़ती है, जो परिष्कृत AI एल्गोरिदम के साथ तंत्रिका नेटवर्क की वास्तुकला (architecture) की नकल करता है जो मस्तिष्क गतिविधि की व्याख्या और परिमार्जन (modulating) करने में सक्षम है। ऐसे उपकरण एक बंद लूप (closed loop) में काम करते हैं: वे तंत्रिका संकेतों (neural signals) को रिकॉर्ड करते हैं, इरादे या स्थिति को डिकोड करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं, और फिर मस्तिष्क को उत्तेजित करने और कार्य को बहाल करने के लिए विद्युत या अन्य प्रतिक्रिया (feedback) प्रदान करते हैं।

IISc परियोजना मस्तिष्क, संगणना और डेटा विज्ञान (Brain, Computation and Data Science) पहल के तहत एक प्रायोगिक अध्ययन से विकसित हुई है। तंत्रिका विज्ञान, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान और पुनर्वास चिकित्सा (rehabilitation medicine) सहित कई विभागों के वैज्ञानिक और इंजीनियर सेंसर डिजाइन करने, एल्गोरिदम विकसित करने और प्रोटोटाइप का परीक्षण करने के लिए सहयोग करेंगे। पहला चरण इम्प्लांटेबल और गैर-इनवेसिव उपकरणों के निर्माण पर केंद्रित है जो आंदोलन (movement) से संबंधित मस्तिष्क गतिविधि को डिकोड कर सकते हैं और स्ट्रोक के रोगियों को नियंत्रित आंदोलन को वापस पाने में मदद करने के लिए प्रतिक्रिया प्रदान कर सकते हैं। बाद के चरण प्रौद्योगिकी को परिष्कृत करेंगे, नैदानिक ​​परीक्षण (clinical trials) करेंगे और नियामक अनुमोदन (regulatory approval) के लिए तैयार करेंगे।

मुख्य उद्देश्य

  • AI-संचालित उपकरण विकसित करना: तंत्रिका गतिविधि (neural activity) को डिकोड करने में सक्षम ब्रेन को-प्रोसेसर बनाएं और न्यूरोमोर्फिक हार्डवेयर और मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान करें।
  • मोटर फ़ंक्शन को पुनर्स्थापित करें: बाहों और हाथों के चिकने, समन्वित आंदोलनों को सक्षम करके स्ट्रोक से बचे लोगों के लिए पुनर्वास (rehabilitation) को लक्षित करें।
  • चरणबद्ध विकास: चरण I प्रयोगशाला सेटिंग्स में प्रोटोटाइप का निर्माण और परीक्षण करेगा; चरण II में सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए मानव परीक्षण शामिल होंगे।
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation): आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सेंसर और कंप्यूटिंग हार्डवेयर सहित अधिकांश घटकों को भारत में विकसित किया जाएगा।
  • दीर्घकालिक दृष्टि: अपनी तरह के पहले ब्रेन को-प्रोसेसर प्लेटफॉर्म की नींव रखें जो अंततः अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों (neurological disorders) वाले लोगों की मदद कर सके।

शोधकर्ता इस बात पर जोर देते हैं कि परियोजना महत्वाकांक्षी है और इसे परिपक्व होने में कई साल लगेंगे। हालांकि, संभावित लाभ - विशेष रूप से लाखों स्ट्रोक बचे लोगों के लिए जिनके पास वर्तमान में सीमित पुनर्वास विकल्प हैं - प्रयास को सार्थक बनाते हैं।

स्रोत: The Hindu

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