पर्यावरण

Indian Crested Porcupine: पंपोर केसर के खेत, हिस्ट्रिक्स इंडिका और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम

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चर्चा में क्यों?

पंपोर (Pampore), जम्मू और कश्मीर में किसानों ने बताया कि Indian crested porcupines केसर (saffron) के कंदों (corms) को खोद रहे हैं, जिससे केसर की उपज में भारी गिरावट आई है। पिछले एक दशक में क्षेत्र में उत्पादन में नाटकीय रूप से गिरावट आई है, और साही (porcupines) की संरक्षित स्थिति किसानों को उन्हें मारने से रोकती है। इस स्थिति ने मानवीय निवारक उपायों (humane deterrence measures) और बेहतर आवास प्रबंधन के आह्वान को जन्म दिया है。

पृष्ठभूमि

Indian crested porcupine (Hystrix indica) दक्षिण और मध्य एशिया और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक बड़ा कृंतक (rodent) है। यह चट्टानी पहाड़ियों, झाड़ियों, घास के मैदानों और जंगलों में पनपता है, और हिमालय में लगभग 2 400 मीटर तक अच्छी तरह से अनुकूलित है। वयस्कों का वजन 11 और 18 किलोग्राम के बीच हो सकता है और उनकी पीठ और पूंछ पर लंबे तेज कांटे (quills) होते हैं जो खतरा होने पर बजते हैं। ये निशाचर (nocturnal) जानवर मुख्य रूप से शाकाहारी होते हैं, जो जड़ों, कंदों और छाल को खाते हैं। हाल के वर्षों में, निवास स्थान के नुकसान, प्राकृतिक शिकारियों की गिरावट और हल्की सर्दियों ने उन्हें मानव खेतों के करीब ला दिया है।

केसर को खतरा

  • घटती उपज: पंपोर, जिसे भारत की केसर राजधानी (saffron capital) के रूप में जाना जाता है, ने पिछले 15 वर्षों में आंशिक रूप से porcupine के नुकसान के कारण केसर के उत्पादन में लगभग 22 000 किलोग्राम से 1 000 किलोग्राम तक की गिरावट देखी है।
  • साही कंदों (corms) को क्यों निशाना बनाते हैं: porcupine के आहार में बल्ब और कंद जैसे भूमिगत भंडारण अंग शामिल होते हैं। केसर के क्रोकस कंद (saffron crocus corms) कार्बोहाइड्रेट और नमी से भरपूर होते हैं, जो उन्हें कम भोजन वाले महीनों (lean months) के दौरान आकर्षक बनाते हैं।
  • कानूनी बाधाएं (Legal constraints): भारत के Wildlife Protection Act के तहत प्रजातियों को संरक्षित किया गया है, इसलिए किसान बिना अनुमति के porcupines को फंसा या मार नहीं सकते हैं। यह उन्हें गैर-घातक निवारक (non-lethal deterrents) अपनाने के लिए मजबूर करता है।
  • सुझाये गए उपाय: विशेषज्ञ छोड़े गए बिलों (abandoned burrows) को साफ करने, खेतों के चारों ओर गहरी जाली वाली बाड़ लगाने, साही को शिकारियों को अधिक दिखाई देने के लिए पेड़ों के तनों को सफेद रंगने और काली मिर्च स्प्रे जैसे प्राकृतिक रिपेलेंट्स (natural repellents) का उपयोग करने की सलाह देते हैं। वन आवरण (forest cover) को बहाल करने और तेंदुओं (leopards) जैसे शिकारियों की रक्षा करने से पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

पारिस्थितिक भूमिका (Ecological role)

हालांकि porcupines वर्तमान में केसर की खेती के लिए एक चुनौती पेश करते हैं, वे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिकाएं निभाते हैं। जड़ों के लिए खुदाई करके, वे मिट्टी को हवादार करते हैं और पोषक तत्व चक्रण (nutrient cycling) में सहायता करते हैं। उनकी शाकाहारी प्रकृति पौधों के समुदाय की संरचना को प्रभावित करती है, और उनके कांटे शिकारियों के खिलाफ रक्षा प्रदान करते हैं।

स्रोत: The Times of India, Animal Diversity Web

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