रक्षा

INS Mahendragiri: Project-17A फ्रिगेट, विशेषताएँ और भारतीय नौसेना

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  • भारतीय नौसेना 11 July 2026 को विशाखापत्तनम में अपने छठे Project‑17A stealth frigate, INS Mahendragiri को कमीशन करने के लिए तैयार है।
  • इस पोत को नौसेना के Warship Design Bureau द्वारा डिज़ाइन किया गया था और मुंबई में Mazagon Dock Shipbuilders Limited द्वारा बनाया गया था।
  • इस जहाज का नाम पूर्वी घाट में Mahendragiri पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है और यह स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को प्रदर्शित करता है।

Background

Project‑17A पहले के Shivalik‑class (Project‑17) युद्धपोतों के बाद एक उन्नत frigate कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य बेहतर स्टील्थ, हथियार और स्वचालन के साथ मल्टी‑मिशन युद्धपोत बनाना है। भारत ने June 2022 में INS Mahendragiri की नींव रखी और इसे September 2023 में लॉन्च किया। जहाज को 30 April 2026 को नौसेना को सौंप दिया गया था। यह Mahendragiri नाम वाला पहला भारतीय नौसैनिक पोत होगा।

Key features

  • Design and construction: यह युद्धपोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ Aatmanirbhar Bharat के सिद्धांतों का प्रतीक है। इसके निर्माण में कई भारतीय उद्योग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल थे।
  • Stealth and survivability: उन्नत हल डिज़ाइन और रडार‑अवशोषित सामग्री जहाज के रडार सिग्नेचर को कम करती है। युद्धपोत में बेहतर डैमेज‑कंट्रोल सिस्टम और उच्च स्वचालन की सुविधा भी है, जो युद्ध में जीवित रहने की क्षमता को बढ़ाता है।
  • Propulsion: एक Combined Diesel or Gas (CODOG) प्रणाली उच्च गति और लंबी सहनशक्ति प्रदान करती है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में तेजी से तैनाती में सक्षम बनाता है।
  • Weapons and sensors: जहाज स्वदेशी सतह‑से‑सतह और सतह‑से‑हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पनडुब्बी रोधी युद्धक रॉकेट और टॉरपीडो, 76‑मिमी मुख्य तोप, क्लोज‑इन वेपन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण के एक सूट से लैस है। यह दो हेलीकॉप्टर ले जा सकता है और इसमें एक एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम है।
  • Operational role: युद्धपोत वायु‑रोधी, सतह‑रोधी और पनडुब्बी‑रोधी मिशन कर सकता है। यह समुद्री सुरक्षा, खोज और बचाव और मानवीय सहायता के लिए भी उपयुक्त है।

Conclusion

INS Mahendragiri का कमीशन भारतीय नौसेना की ब्लू‑वाटर क्षमताओं को मजबूत करेगा। यह स्वदेशी जहाज निर्माण कौशल को प्रदर्शित करता है और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के भारत के लक्ष्य का समर्थन करता है। जैसे‑जैसे अधिक Project‑17A जहाज सेवा में प्रवेश करेंगे, वे निरोध बढ़ाएंगे और इंडो‑पैसिफिक में समुद्री हितों को सुरक्षित करेंगे।

Source: PIB

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