खबरों में क्यों?
30 अप्रैल 2026 को भारतीय नौसेना ने स्वदेशी नीलगिरि-श्रेणी (Nilgiri‑class - प्रोजेक्ट 17A) फ्रिगेट कार्यक्रम के छठे और अंतिम जहाज INS महेंद्रगिरि (INS Mahendragiri) की डिलीवरी ली। मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा निर्मित, यह जहाज भारत की सतह युद्ध क्षमता (surface warfare capability) को बढ़ाने के लिए जल्द ही बेड़े में शामिल होगा।
पृष्ठभूमि
प्रोजेक्ट 17A (Project 17A) सात स्टील्थ फ्रिगेट्स (stealth frigates) की एक श्रृंखला है जिसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया है और MDSL और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (Garden Reach Shipbuilders) में निर्मित किया गया है। ये बहु-मिशन (multi‑mission) जहाज पहले के शिवालिक-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) फ्रिगेट्स के उत्तराधिकारी हैं। वे भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' (Aatmanirbhar Bharat) पहल के अनुरूप बेहतर स्टील्थ सुविधाओं, स्वचालन (automation) और स्वदेशी हथियार प्रणालियों को शामिल करते हैं।
INS महेंद्रगिरि की प्रमुख विशेषताएं
- स्टील्थ डिज़ाइन: कोणीय सतहें (Angled surfaces), कम-अवलोकन योग्य अधिरचना (low‑observability superstructure) और रडार-अवशोषित (radar‑absorbing) सामग्री जहाज के रडार क्रॉस-सेक्शन को कम करती है।
- प्रणोदन (Propulsion): परिभ्रमण (cruising) के लिए दो डीजल इंजनों का उपयोग करने वाली संयुक्त डीजल-या-गैस (CODOG) प्रणाली और उच्च गति स्प्रिंटिंग (high‑speed sprinting) के लिए एक गैस टरबाइन। नियंत्रणीय-पिच प्रोपेलर (Controllable‑pitch propellers) और एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली (integrated platform management system) कुशल संचालन की अनुमति देती है।
- हथियार और सेंसर: एमएफ-स्टार सक्रिय चरणबद्ध सरणी रडार (MF‑STAR active phased array radar), एंटी-शिप और लैंड-अटैक भूमिकाओं के लिए ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 (Barak‑8) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टॉरपीडो ट्यूब (torpedo tubes) और पनडुब्बी रोधी रॉकेट से लैस। यह टोही (reconnaissance) और पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए एक हेलीकॉप्टर भी ले जा सकता है।
- स्वचालन (Automation): उच्च स्तर का स्वचालन चालक दल के कार्यभार को कम करता है। जहाज मशीनरी, बिजली उत्पादन और क्षति-नियंत्रण (damage‑control) प्रणालियों को नियंत्रित करने के लिए एक एकीकृत प्रबंधन प्रणाली का उपयोग करता है।
- स्वदेशीकरण: जहाज के लगभग 75% उपकरण और सिस्टम भारतीय कंपनियों से प्राप्त किए जाते हैं। 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) ने कार्यक्रम में योगदान दिया, जिससे हजारों नौकरियां पैदा हुईं।
महत्व
नीलगिरि-श्रेणी के फ्रिगेट भारतीय नौसेना की हवा-रोधी (anti‑air), सतह-रोधी और पनडुब्बी-रोधी (anti‑submarine) मिशन करने की क्षमता को मजबूत करते हैं। वे घरेलू जहाज निर्माण (domestic shipbuilding) में प्रगति भी प्रदर्शित करते हैं, रोजगार को बढ़ावा देते हैं और छोटी फर्मों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का समर्थन करते हैं। एक बार चालू होने के बाद, INS महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए अपनी बहनों - INS नीलगिरि, हिमगिरि, उदयगिरि, तारागिरि और विंध्यगिरि - के साथ काम करेगा।