समाचार में क्यों?
Indian Navy की पनडुब्बी INS Sindhukesari ने 3 मई 2026 को कोलंबो (Colombo) का एक परिचालन बदलाव (operational turnaround) दौरा किया। श्रीलंका की नौसेना (Sri Lanka Navy) ने नियमित रसद समर्थन (logistics support) और समुद्री सहयोग के हिस्से के रूप में नाव का स्वागत किया। यह यात्रा अप्रैल में आयोजित एक संयुक्त डाइविंग अभ्यास के बाद हुई और दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंधों के गहराने को प्रदर्शित किया।
पृष्ठभूमि
INS Sindhukesari (हिल नंबर S60) Sindhughosh class (Kilo class) की एक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है। रूस द्वारा निर्मित और 16 फरवरी 1989 को कमीशन की गई, यह सतह पर लगभग 2,300 टन और डूबे रहने पर 3,000 टन से अधिक विस्थापित होती है। पोत 72.6 मीटर लंबा है और इसका बीम 9.9 मीटर है। इसमें छह वॉटरटाइट डिब्बों (watertight compartments) के साथ एक डबल-हल (double-hull) डिज़ाइन है और सोनार पहचान को कम करने के लिए एनेकोइक टाइलें (anechoic tiles) हैं। प्रणोदन (Propulsion) डीजल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर्स द्वारा संचालित एक शाफ्ट से आता है, जो डूबे हुए 19 समुद्री मील तक की गति की अनुमति देता है। पनडुब्बी टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों को ले जाती है और यह Strela-3 सतह-से-हवा में मार करने वाले मिसाइल लांचर से सुसज्जित है। यह 52 चालक दल के साथ लगभग 45 दिनों तक समुद्र में रह सकती है।
मुख्य बिंदु
- परिचालन बदलाव (Operational turnaround - OTR): एक OTR यात्रा एक युद्धपोत या पनडुब्बी को विस्तारित तैनाती के दौरान ईंधन भरने, आपूर्ति की भरपाई करने और चालक दल को आराम प्रदान करने की अनुमति देती है। कोलंबो में INS Sindhukesari के पड़ाव में श्रीलंका नौसेना के साथ पेशेवर आदान-प्रदान भी शामिल था।
- हाल के अभ्यास: यह यात्रा 21-28 अप्रैल तक आयोजित भारत-श्रीलंका गोताखोरी अभ्यास DIVEX 2026 के बाद हुई। अभ्यास मिश्रित गैस गोताखोरी (mixed-gas diving) और ऐतिहासिक जहाजों के मलबे के आसपास जटिल पानी के नीचे के संचालन पर केंद्रित था। इसमें Aarogya Maitri पहल के तहत चिकित्सा आपूर्ति दान करने सहित मानवीय आउटरीच भी शामिल थी।
- रणनीतिक सहयोग: भारत के MAHASAGAR विजन (vision) का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग को बढ़ाना है। इस तरह की पोर्ट कॉल्स (Port calls) अंतर-संचालनीयता (interoperability) को मजबूत करती हैं और भागीदारों को एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का आश्वासन देती हैं।
महत्व
यह यात्रा भारत के बढ़ते नौसैनिक पदचिह्न (naval footprint) और पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी पर इसके जोर को प्रदर्शित करती है। INS Sindhukesari की उपस्थिति Sindhughosh class की पनडुब्बियों की परिचालन तत्परता को भी उजागर करती है, जो भारत के पानी के नीचे के बेड़े (undersea fleet) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं।
स्रोत: Tribune India