भूगोल

Kishau Dam Project: टोंस नदी, उत्तराखंड-हिमाचल समझौता

Kishau Dam Project: टोंस नदी, उत्तराखंड-हिमाचल समझौता

चर्चा में क्यों?

किशाऊ बांध (Kishau Dam) परियोजना को लेकर आठ साल का गतिरोध जून 2026 में हल हो गया, जब केंद्र सरकार और लाभार्थी राज्यों ने फंडिंग व्यवस्था (funding arrangements) पर सहमति व्यक्त की। इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई, पेयजल और पनबिजली (hydro-electric power) प्रदान करने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी (Tons river) पर एक ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध (concrete gravity dam) बनाना है。

पृष्ठभूमि

किशाऊ बांध का प्रस्ताव ऊपरी यमुना बेसिन (Upper Yamuna Basin) समझौतों के हिस्से के रूप में कई दशक पुराना है। इसमें यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी टोंस के पार 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट बांध का निर्माण शामिल है। इस परियोजना में लगभग 660 मेगावाट क्षमता (प्रत्येक 150-165 मेगावाट की चार इकाइयां) का एक पावर हाउस और लगभग 1,300 मिलियन क्यूबिक मीटर का लाइव स्टोरेज (live storage) शामिल है। जलाशय लगभग 97,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति करेगा और सालाना 517 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल प्रदान करेगा。

हाल के घटनाक्रम

  • लागत का बंटवारा: कुल परियोजना लागत लगभग ₹15,000 करोड़ आंकी गई है। नए समझौते के तहत, जल घटक (water component) को केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा, जबकि लाभार्थी राज्य - हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश - लगभग ₹2,000 करोड़ की बिजली घटक (power component) लागत को साझा करेंगे।
  • सामरिक महत्व (Strategic importance): यह बांध टोंस बेसिन में मानसूनी प्रवाह का उपयोग करेगा, पानी की कमी वाले जिलों में सिंचाई में सुधार करेगा और दिल्ली सहित शहरी केंद्रों को पेयजल की आपूर्ति करेगा। पनबिजली घटक नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) क्षमता को बढ़ाएगा।
  • पर्यावरणीय चिंताएं: पर्यावरणविदों ने जंगलों के डूबने और समुदायों के विस्थापन को लेकर चिंता जताई है। निर्माण शुरू होने से पहले विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (environmental impact assessments) और पुनर्वास (rehabilitation) योजनाओं की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

धन के गतिरोध को दूर करने से विस्तृत डिजाइन और मंजूरी का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि इसे जिम्मेदारी से लागू किया जाए, तो किशाऊ बांध कई उत्तरी राज्यों के लिए जल सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान कर सकता है। यह साझा नदी घाटियों के प्रबंधन में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) के महत्व को भी रेखांकित करता है。

स्रोत: HT
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