चर्चा में क्यों?
8 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री ने भारत के भूमि बंदरगाहों (land ports) पर सीमा पार व्यापार और यात्रा को आधुनिक बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (Land Port Management System - LPMS) का अनावरण किया। यह प्रणाली सीमा शुल्क (customs), आप्रवासन (immigration), सुरक्षा और रसद (logistics) कार्यों को एकीकृत करेगी, जिससे भूमि बंदरगाहों को हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों पर पहले से मौजूद डिजिटल प्रक्रियाओं के समकक्ष लाया जा सकेगा。
पृष्ठभूमि
गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (Land Ports Authority of India - LPAI), बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और म्यांमार के साथ भारत की सीमाओं पर 15 भूमि बंदरगाहों का प्रबंधन करता है। ये गेटवे हर साल लाखों यात्रियों और बड़ी मात्रा में कार्गो को संभालते हैं। अब तक, भूमि बंदरगाहों पर प्रक्रियाएँ काफी हद तक कागज़-आधारित थीं, जिससे देरी होती थी और पारगमन के समय (transit times) का अनुमान लगाना कठिन था। LPMS का उद्देश्य स्लॉट बुकिंग (slot booking) से लेकर कस्टम क्लीयरेंस तक के पूरे वर्कफ़्लो (workflow) को डिजिटल बनाना है。
मुख्य विशेषताएँ
- एंड-टू-एंड वर्कफ़्लो: यह प्लेटफ़ॉर्म व्यापारियों और यात्रियों को ऑनलाइन स्लॉट बुक करने, भुगतान करने, दस्तावेज़ जमा करने और कार्गो को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है। अधिकारी निरीक्षण (inspections) और क्लीयरेंस को अधिक कुशलता से निर्धारित कर सकते हैं।
- राष्ट्रीय पोर्टल्स के साथ एकीकरण: LPMS रीयल-टाइम में सुरक्षित रूप से जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक गेटवे (ICEGATE), यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफ़ेस प्लेटफ़ॉर्म (ULIP) और राष्ट्रीय मोटर वाहन डेटाबेस (national motor vehicle database) के साथ इंटरफ़ेस करता है।
- सिंगल-विंडो क्लीयरेंस: कई सरकारी एजेंसियाँ—जिनमें कस्टम, इमिग्रेशन, सुरक्षा और संगरोध (quarantine) अधिकारी शामिल हैं—एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँचती हैं। इससे कागज़ी कार्रवाई का दोहराव (duplication) कम होता है और क्लीयरेंस तेज़ी से होता है।
- भूमि बंदरगाहों की सूची: LPAI वर्तमान में पंजाब में अटारी और डेरा बाबा नानक; उत्तर प्रदेश और बिहार में रुपईडीहा और रक्सौल; असम में जोगबनी और दररंगा; पश्चिम बंगाल और असम में पेट्रापोल, डौकी, सुतरकंडी, गोलकगंज और मनकचर; और पूर्वोत्तर में अगरतला, श्रीमंतपुर, सबरूम और मोरेह का संचालन करता है।
- लाभ: इस प्लेटफ़ॉर्म से लेन-देन के समय और लागत में कमी आने, ट्रेस करने योग्य (traceable) प्रक्रियाओं के माध्यम से सुरक्षा में सुधार होने और व्यापारियों व यात्रियों के लिए पारदर्शिता (transparency) बढ़ने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
डिजिटल लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) निर्बाध सीमा प्रबंधन (seamless border management) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विविध एजेंसियों को एक मंच पर एकीकृत करके, भारत व्यापार को सुविधाजनक बना सकता है, सुरक्षा बढ़ा सकता है और यात्रा के अनुभव को बेहतर कर सकता है। इसकी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए भूमि बंदरगाहों पर निरंतर प्रशिक्षण और बुनियादी ढाँचे (infrastructure) के उन्नयन की आवश्यकता होगी。