पर्यावरण

Mishmi Takin: सिक्किम में देखा गया, आवास और संरक्षण स्थिति

Mishmi Takin: सिक्किम में देखा गया, आवास और संरक्षण स्थिति
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चर्चा में क्यों?

उत्तरी सिक्किम के टिंगडा रिजर्व फॉरेस्ट (Tingda Reserve Forest) के बकुचेन (Bakuchen) क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान वन अधिकारियों ने आठ मिश्मी ताकिन (Mishmi Takins) के झुंड का वीडियो बनाया। दो दशकों से अधिक समय में सिक्किम में इस मायावी बकरी-मृग (goat-antelope) का यह पहला पुष्ट वीडियो था और यह इस इलाके में प्रलेखित (documented) अब तक के सबसे बड़े समूह का प्रतिनिधित्व करता है。

पृष्ठभूमि

मिश्मी ताकिन (Budorcas taxicolor taxicolor) ताकिन की चार उप-प्रजातियों (subspecies) में से एक है, जो पूर्वी हिमालय में पाया जाने वाला एक बड़ा खुरदार जानवर (ungulate) है। इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट के तहत 'असुरक्षित' (Vulnerable) के रूप में वर्गीकृत किया गया है और भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची I (Schedule I) के तहत संरक्षित किया गया है। यह उप-प्रजाति अरुणाचल प्रदेश की मिश्मी पहाड़ियों, उत्तरी म्यांमार और दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में पाई जाती है। सिक्किम इसके वितरण का सबसे पश्चिमी किनारा है。

विशेषताएं और पारिस्थितिकी

  • शारीरिक बनावट: मिश्मी ताकिन भारी शरीर वाले होते हैं, जिनके छोटे पैर और गहरी छाती होती है। दोनों लिंगों (sexes) में मोटे सींग होते हैं जो बाहर की ओर मुड़ते हैं और फिर पीछे की ओर जाते हैं। वयस्क कंधे तक लगभग 120 सेमी ऊंचे हो सकते हैं और उनका वजन 150 से 400 किलोग्राम के बीच हो सकता है।
  • रोआं (Coat) और अनुकूलन: इनका झबरा रोआं (shaggy coat) भूरे से लेकर लाल भूरे रंग तक का होता है और अंग गहरे रंग के होते हैं। फर पर एक तैलीय स्राव (oily secretion) होता है, जो बारिश और कोहरे से वॉटरप्रूफिंग प्रदान करता है। ये जानवर ठंडी, ऊंचाई वाली जलवायु के अनुकूल होते हैं।
  • आवास: मिश्मी ताकिन 1,000 और 4,500 मीटर के बीच खड़ी पहाड़ी जंगलों और अल्पाइन घास के मैदानों (alpine meadows) में रहते हैं। वे बांस, विलो (willow) और अन्य झाड़ियों को चरते हैं और मौसम के अनुसार ऊंची और निचली ऊंचाइयों के बीच प्रवास (migrate) करते हैं।
  • सामाजिक व्यवहार: वे गर्मियों में बड़े झुंड और सर्दियों में छोटे समूह बनाते हैं। प्रजनन के मौसम को छोड़कर बड़े नर एकांत जीवन जी सकते हैं। खतरा महसूस होने पर, झुंड खांसी जैसी आवाज (coughing call) से दूसरों को चेतावनी देता है और घनी वनस्पतियों में शरण लेता है।

देखे जाने का महत्व

वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि एक स्वस्थ झुंड की उपस्थिति सिक्किम के अल्पाइन पारिस्थितिक तंत्र की पारिस्थितिक अखंडता (ecological integrity) का संकेत देती है। यह क्षेत्र भारत, भूटान और चीन को जोड़ने वाले सीमा पार गलियारों (transboundary corridors) के साथ स्थित है, जो आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) और पहाड़ी प्रजातियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण हैं। निरंतर संरक्षण प्रयासों और आवास सुरक्षा ने संभवतः इस दुर्लभ प्रजाति को सिक्किम में बने रहने में सक्षम बनाया है。

निष्कर्ष

आठ मिश्मी ताकिन की रिकॉर्डिंग संरक्षण की दिशा में एक प्रमुख मील का पत्थर है। इस लुप्तप्राय पहाड़ी जानवर के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी, ​​प्रवासी मार्गों (migratory routes) की सुरक्षा और पड़ोसी राज्यों के साथ सहयोग आवश्यक है。

स्रोत: TP
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