समाचार में क्यों?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक एकीकृत Mission Vatsalya Portal बनाया है। यह एक प्रणाली के भीतर तीन पुराने बाल-ट्रैकिंग प्लेटफार्मों को जोड़ता है। पुलिस रिकॉर्ड अब लापता बच्चों के तेजी से मिलान का समर्थन कर सकते हैं। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं।
पृष्ठभूमि
भारत पहले अलग-अलग प्रशासनिक और वित्त पोषण व्यवस्था के साथ अलग-अलग बाल-संरक्षण कार्यक्रम चलाता था।
2009–10 में, ऐसे तीन कार्यक्रम Integrated Child Protection Scheme में विलय हो गए।
यह कार्यक्रम 2017 में Child Protection Services बन गया और 2021–22 के दौरान Mission Vatsalya में प्रवेश किया।
संशोधित Mission Vatsalya दिशानिर्देश 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी हुए।
यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।
Mission Vatsalya क्या है?
Mission Vatsalya बाल संरक्षण और कल्याण के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारें इसे केंद्र सरकार के वित्तीय सहयोग से लागू करती हैं।
इसकी मुख्य कानूनी नींव Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 है।
Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 भी प्रासंगिक सुरक्षा सेवाओं का मार्गदर्शन करता है।
यह मिशन किशोर न्याय ढांचे के तहत दो व्यापक समूहों की सेवा करता है।
| कानूनी श्रेणी | सरल अर्थ |
|---|---|
| देखभाल और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चे (Children in Need of Care and Protection) | परित्याग, दुर्व्यवहार, तस्करी, बेघर होने या इसी तरह के गंभीर जोखिमों का सामना कर रहे बच्चे। |
| कानून के साथ संघर्ष में बच्चे (Children in Conflict with Law) | अठारह वर्ष के होने से पहले अपराध करने के कथित या पाए गए बच्चे। |
कौन सा सिद्धांत योजना का मार्गदर्शन करता है?
एक सुरक्षित परिवार और समुदाय को पहले देखभाल प्रदान करनी चाहिए, जिसमें संस्थागत प्लेसमेंट (institutional placement) अंतिम उपाय रहना चाहिए।
यह योजना अलग होने से पहले परिवारों का समर्थन करती है और जब भी सुरक्षित हो शीघ्र बहाली की मांग करती है।
प्रत्येक निर्णय को बच्चे के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिक विचार के रूप में मानना चाहिए।
पुरानी ट्रैकिंग प्रणालियाँ कैसे काम करती थीं?
- TrackChild ने आधिकारिक ट्रैकिंग और बहाली के लिए लापता और मिले हुए बच्चों को रिकॉर्ड किया।
- Khoya-Paya ने नागरिकों को लापता बच्चे या देखे गए बच्चे की रिपोर्ट करने की अनुमति दी।
- Go Home and Re-Unite ने विभिन्न न्यायालयों के बीच बहाली और प्रत्यावर्तन (repatriation) में सहायता की।
नया पोर्टल इन कार्यों को जोड़ता है, बार-बार डेटा प्रविष्टि और खंडित खोजों को कम करता है।
पुलिस एकीकरण कैसे मदद कर सकता है?
यह पोर्टल Crime and Criminal Tracking Network and Systems से जुड़ता है।
यह पुलिस नेटवर्क First Information Reports और संबंधित आपराधिक रिकॉर्ड से जानकारी लेता है।
अब लापता बच्चे की रिपोर्ट की तुलना पाए गए बच्चों के रिकॉर्ड से अधिक तेज़ी से की जा सकती है।
मिलान के लिए अभी भी वैध पहचान सत्यापन की आवश्यकता होती है क्योंकि डिजिटल समानता किसी बच्चे की पहचान तय नहीं कर सकती है।
याद रखें: एक First Information Report पुलिस रिकॉर्ड है जो संज्ञेय अपराध (cognisable offence) की जांच शुरू करती है।
एकीकृत प्रणाली का उपयोग कौन करता है?
प्रमुख उपयोगकर्ताओं में केंद्रीय मंत्रालय, रेलवे, पुलिस इकाइयां और राज्य बाल-संरक्षण प्राधिकरण शामिल हैं।
Child Welfare Committees संरक्षण मामलों का फैसला करती हैं, जबकि Juvenile Justice Boards बच्चों द्वारा किए गए कथित अपराधों को संभालते हैं।
National Legal Services Authority सहायता प्रदान करता है, जबकि नोडल अधिकारी जिलों और राज्यों में समन्वय करते हैं।
Mission Vatsalya किन सेवाओं का समर्थन करता है?
| देखभाल का रूप | महत्वपूर्ण सेवाएं |
|---|---|
| संस्थागत देखभाल | बाल गृह, खुले आश्रय (Open Shelters), दत्तक ग्रहण एजेंसियां, अवलोकन गृह (Observation Homes), विशेष गृह और सुरक्षा के स्थान। |
| गैर-संस्थागत देखभाल | प्रायोजन (Sponsorship), फोस्टर केयर, गोद लेना, सुरक्षित परिवारों में बहाली और आफ्टरकेयर (aftercare) समर्थन। |
प्रायोजन वित्तीय सहायता प्रदान करता है जबकि बच्चा परिवार के साथ रहता है। फोस्टर केयर एक बच्चे को स्वीकृत वैकल्पिक परिवार के साथ रखता है।
गोद लेने से स्थायी माता-पिता-बाल संबंध बनता है, जबकि आफ्टरकेयर संस्थानों के बाद स्वतंत्र जीवन का समर्थन करता है।
दिशानिर्देश निर्दिष्ट गैर-संस्थागत देखभाल के तहत पात्र बच्चों के लिए ₹4,000 मासिक समर्थन की अनुमति देते हैं।
आफ्टरकेयर में आमतौर पर 18–21 वर्ष की आयु शामिल होती है, जिसमें असाधारण समर्थन 23 वर्ष की आयु तक जारी रहता है।
योजना को वित्तपोषित कैसे किया जाता है?
| कार्यान्वयन क्षेत्र | संघ और राज्य का हिस्सा |
|---|---|
| विधायिका वाले अधिकांश राज्य और केंद्र शासित प्रदेश | 60:40 |
| आठ पूर्वोत्तर राज्य और निर्दिष्ट हिमालयी क्षेत्र | 90:10 |
| बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश | 100 प्रतिशत संघ वित्तपोषण |
90:10 श्रेणी में पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर शामिल हैं।
एक पोर्टल उपयोगी क्यों है?
- एक रिकॉर्ड प्रशासनिक सीमाओं के पार बच्चे के साथ जा सकता है।
- पुलिस और कल्याण एजेंसियां कनेक्टेड जानकारी अधिक तेज़ी से खोज सकती हैं।
- प्रबंधक बहाली, पूछताछ या सेवा वितरण में देरी की पहचान कर सकते हैं।
- जब विभाग सामान्य पहचानकर्ताओं के माध्यम से काम करते हैं तो डुप्लिकेट रिकॉर्ड में गिरावट आ सकती है।
इन अभिलेखों में संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी होती है, जिससे मजबूत पहुंच नियंत्रण और नियमित सुरक्षा जांच आवश्यक हो जाती है।
निष्कर्ष
एकीकृत पोर्टल बाल संरक्षण में सुधार कर सकता है जब तकनीक सावधान, मानवीय और जवाबदेह क्षेत्रीय कार्रवाई का समर्थन करती है।