पर्यावरण

Motijheel Fanged Frog: नया उभयचर, अरुणाचल प्रदेश और नमदाफा

Motijheel Fanged Frog: नया उभयचर, अरुणाचल प्रदेश और नमदाफा

चर्चा में क्यों?

भारतीय शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश के नमदाफा टाइगर रिजर्व (Namdapha Tiger Reserve) में एक दुर्लभ उभयचर (amphibian) की खोज की है। खोज स्थल के पास मोतीझील झील के नाम पर रखे गए इस फेंगड फ्रॉग (fanged frog) लिम्नोनेक्टेस मोतीझील (Limnonectes motijheel) ने ध्यान आकर्षित किया क्योंकि यह अपने अंडों की रक्षा के लिए भूमिगत घोंसले खोदता है। यह खोज उत्तर-पूर्व भारत की समृद्ध लेकिन छिपी हुई विविधता को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

मोतीझील फेंगड फ्रॉग लिम्नोनेक्टेस (Limnonectes) जीनस से संबंधित है, जो निचले जबड़े पर नुकीले दांतों (fangs) के समान हड्डी के विकास के लिए जाने जाने वाले मेंढकों का एक समूह है। ये उभयचर आमतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं, लेकिन इस प्रजाति को नमदाफा टाइगर रिजर्व के सदाबहार जंगलों की गहराई में खोजा गया था। शोधकर्ताओं ने देखा कि मेंढक नम मिट्टी में बिल बनाते हैं, जहां मादाएं अंडे देती हैं और विकसित हो रहे टैडपोल (tadpoles) की रक्षा करती हैं - यह व्यवहार भारी वर्षा और कई शिकारियों वाले क्षेत्र में संतानों के जीवित रहने में मदद करता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • मध्यम आकार: वयस्कों की लंबाई लगभग 2.3–3.5 सेमी होती है। नर के निचले जबड़े पर अधिक स्पष्ट "दांत (fangs)" होते हैं जिनका उपयोग वे बचाव और खुदाई के लिए करते हैं।
  • विशिष्ट निशान: आँखों के बीच एक गहरे भूरे रंग की धारी होती है, और पीठ के साथ एक उल्टे V-आकार की रेखा फैली होती है। शरीर पर टूटी हुई सिलवटें और धब्बेदार पैटर्न होते हैं जो मेंढक को जंगल के फर्श पर छलावरण (camouflage) में मदद करते हैं।
  • कीचड़ में घोंसला बनाने का व्यवहार: अधिकांश मेंढकों के विपरीत, यह प्रजाति जमीन में छोटी गुहाओं (cavities) की खुदाई करती है। मादा घोंसले के अंदर अंडे देती है और शिकारियों से छिपने के लिए मिट्टी और पत्तियों के कूड़े (leaf litter) से प्रवेश द्वार को सील कर देती है।
  • छिपा हुआ निवास स्थान: यह प्रजाति घने सदाबहार जंगल में छायादार धाराओं के साथ पाई जाती है। इसकी गुप्त प्रकृति और दूरस्थ निवास स्थान बताते हैं कि बार-बार सर्वेक्षण के बावजूद यह क्यों खोजा नहीं जा सका।

महत्व

  • जैव विविधता पर प्रकाश: खोज इस बात को रेखांकित करती है कि उत्तर-पूर्व भारत में उभयचर जीवन के बारे में कितना कम ज्ञात है। प्रत्येक नई प्रजाति विकासवादी अनुकूलन (evolutionary adaptations) और आवास संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।
  • संरक्षण चेतावनी: जंगल की कटाई, सड़क निर्माण और जलवायु परिवर्तन नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा हैं। नई प्रजातियों की पहचान करने से नमदाफा जैसे जैव विविधता हॉटस्पॉट में संरक्षण उपायों को उचित ठहराने में मदद मिलती है।
  • सांस्कृतिक मान्यता: मोतीझील झील के नाम पर मेंढक का नामकरण स्थानीय भूगोल और उन समुदायों का सम्मान करता है जो खोज स्थल के पास रहते हैं।

स्रोत: Moneycontrol

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