चर्चा में क्यों?
27 फरवरी 2026 को, भारत ने जैविक विविधता पर सम्मेलन (Convention on Biological Diversity - CBD) के नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि को कवर करती है और बताती है कि देश आनुवंशिक संसाधनों (genetic resources) तक पहुंच का प्रबंधन कैसे करता है और स्थानीय समुदायों के साथ लाभ कैसे साझा करता है।
पृष्ठभूमि
नागोया प्रोटोकॉल सीबीडी (CBD) का एक पूरक समझौता है, जिसे 2010 में अपनाया गया था और 2014 से प्रभावी है। यह आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत साझाकरण सुनिश्चित करता है। हस्ताक्षरकर्ता देशों को जैविक संसाधनों तक पहुंच को विनियमित (regulate) करने और उन संसाधनों का संरक्षण करने वाले स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों के साथ लाभ साझा करने के लिए कानूनी ढांचे स्थापित करने होंगे।
भारत की रिपोर्ट के मुख्य अंश
- त्रि-स्तरीय शासन (Three-tier governance): भारत एक्सेस-एंड-बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) को त्रि-स्तरीय संरचना के माध्यम से लागू करता है: राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), उप-राष्ट्रीय स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) या केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें, और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)। 2.76 लाख से अधिक बीएमसी (BMCs) स्थापित की गई हैं।
- ABS अनुमोदन: 2017 और 2025 के बीच, भारत ने जैविक विविधता अधिनियम के तहत अनुसंधान, जैव-सर्वेक्षण, व्यावसायिक उपयोग और अनुसंधान परिणामों के हस्तांतरण के लिए 12,800 से अधिक अनुमोदन (approvals) जारी किए। वैश्विक ABS क्लियरिंग हाउस पोर्टल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्रों (certificates of compliance) में से 60% से अधिक भारत से हैं।
- साझा किए गए लाभ: रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अनुमोदन के माध्यम से लगभग ₹216 करोड़ के मौद्रिक लाभ जुटाए गए, जिनमें से ₹139 करोड़ बीएमसी, स्थानीय समुदायों, किसानों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को वितरित किए गए।
महत्व
पहली रिपोर्ट प्रस्तुत करना वैश्विक जैव विविधता प्रशासन और पारदर्शिता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह स्थानीय संस्थानों की स्थापना और लाभ साझा करने में प्रगति को प्रदर्शित करता है, साथ ही कार्यात्मक बीएमसी (functional BMCs) और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डालता है। नागोया प्रोटोकॉल जैविक संसाधनों के सतत उपयोग (sustainable use) को प्रोत्साहित करता है और बायोपायरेसी (biopiracy) को रोकता है।
स्रोत: PIB