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National Shipping Board: समुद्री विजन 2047 और NSB

National Shipping Board: समुद्री विजन 2047 और NSB

ख़बरों में क्यों?

12 मार्च 2026 को, केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड (National Shipping Board - NSB) की एक बैठक की अध्यक्षता की। चर्चा भारत के नौवहन क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों, चल रहे मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 (Maritime Amrit Kaal Vision 2047) और प्रस्तावित मर्चेंट शिपिंग (विधेयक) 2026 (Merchant Shipping Bill 2026) पर केंद्रित थी। बैठक ने समुद्री नीति (maritime policy) पर सरकार को सलाह देने में NSB की भूमिका को रेखांकित किया।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड समुद्री मामलों पर भारत का प्रमुख सलाहकार निकाय (advisory body) है। इसे पहली बार नौवहन और बंदरगाह के मुद्दों पर केंद्र सरकार को सलाह देने के लिए मर्चेंट शिपिंग एक्ट 1958 (Merchant Shipping Act 1958) के तहत गठित किया गया था। 2025 में जारी नियमों के एक मसौदे (draft rules) में संसद, समुद्री प्रशासन और नौवहन विशेषज्ञों के सदस्यों के साथ दो साल के कार्यकाल के लिए बोर्ड के पुनर्गठन (reconstituting) का प्रस्ताव है। बोर्ड का व्यापक जनादेश (mandate) जहाज निर्माण, सुरक्षा, श्रम कल्याण और भारतीय नौवहन के विकास पर सिफारिशें करना है।

संरचना और कार्य

  • विविध सदस्यता (Diverse membership): मसौदा नियमों के तहत बोर्ड में सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष (Chairperson), लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) के प्रतिनिधि, बंदरगाह और नौवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और नौवहन, वित्त और कानून का अनुभव रखने वाले गैर-आधिकारिक (non-official) सदस्य शामिल होंगे।
  • सलाहकार भूमिका (Advisory role): NSB कैबोटेज नीतियों (cabotage policies), सुरक्षा नियमों, नाविकों (seafarer) के प्रशिक्षण, बंदरगाह विकास और भारतीय-ध्वजांकित जहाजों (Indian-flagged vessels) को बढ़ावा देने के तरीकों जैसे मुद्दों की जांच करता है। यह मौजूदा कानूनों में संशोधन (amendments) का प्रस्ताव कर सकता है और उद्योग के लिए नई पहलों का सुझाव दे सकता है।
  • समुद्री विकास को बढ़ावा देना: सरकार और उद्योग के बीच बातचीत के लिए एक मंच (platform) प्रदान करके, बोर्ड मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी रणनीतिक योजनाओं (strategic plans) को आकार देने में मदद करता है, जिसका उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण (modernise) करना, जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाना और रसद लागत (logistics costs) को कम करना है।

महत्व

  • नीतिगत सामंजस्य (Policy coherence): भारत के नौवहन क्षेत्र में बंदरगाह अधिकारियों और कार्गो मालिकों से लेकर नाविकों और बीमाकर्ताओं (insurers) तक कई हितधारक (stakeholders) शामिल हैं। बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि नियम संतुलित (balanced) हों और मंत्रालयों में दीर्घकालिक उद्देश्य (long-term objectives) संरेखित (aligned) हों।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना (Enhancing competitiveness): NSB की सिफारिशें समुद्री सुरक्षा मानकों (safety standards) को बेहतर बनाने, हरित प्रौद्योगिकियों (green technologies) को प्रोत्साहित करने और कौशल विकास (skill development) को बढ़ावा देने में मदद करती हैं, जिससे भारतीय नौवहन विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी (competitive) बन जाता है।
  • भविष्य का दृष्टिकोण (Future outlook): बैठक में कानूनों को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों (international conventions) के साथ संरेखित करने और तटीय नौवहन (coastal shipping), क्रूज पर्यटन (cruise tourism) और अंतर्देशीय जलमार्ग (inland waterways) जैसे उभरते अवसरों के लिए क्षेत्र को तैयार करने पर जोर दिया गया।

स्रोत: PIB

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