समाचार में क्यों?
तमिलनाडु सरकार ने April 2026 में लुप्तप्राय (endangered) नीलगिरि तहर (Nilgiri Tahr) के तीसरे सिंक्रोनाइज़्ड जनसंख्या सर्वेक्षण (synchronised population survey) के निष्कर्ष जारी किए। सर्वेक्षण में 1,364 तहरों का अनुमान लगाया गया है, जो 2025 में दर्ज 1,303 से अधिक है। इस वृद्धि का श्रेय प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर (Project Nilgiri Tahr) के तहत ठोस संरक्षण प्रयासों (concerted conservation efforts) को दिया जाता है。
पृष्ठभूमि
नीलगिरि तहर (Nilgiritragus hylocrius) बकरी जैसा एक खुरदार जानवर (ungulate) है, जो तमिलनाडु और केरल में पश्चिमी घाट (Western Ghats) के उच्च ऊंचाई वाले घास के मैदानों (grasslands) में पाया जाता है। नर (Males) का शरीर गठीला और सींग पीछे की ओर मुड़े होते हैं, जबकि मादाएं (females) छोटी होती हैं और आमतौर पर उनके सींग नहीं होते। ऐतिहासिक रूप से उनकी आबादी 10,000 से अधिक रही होगी, लेकिन आवास के नुकसान (habitat loss), शिकार और पशुओं के साथ प्रतिस्पर्धा ने इनकी संख्या को काफी कम कर दिया है। इस प्रजाति को IUCN Red List में "लुप्तप्राय (Endangered)" के रूप में वर्गीकृत किया गया है। December 2022 में तमिलनाडु सरकार ने राज्य के पशु के संरक्षण के लिए लगभग ₹25 करोड़ के बजट के साथ एक पांच वर्षीय पहल, प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर (Project Nilgiri Tahr) शुरू किया। यह परियोजना संगम साहित्य (Sangam literature) में इस जानवर के सांस्कृतिक संदर्भों (cultural references) को आकर्षित करती है और इसका उद्देश्य खंडित आवासों (fragmented habitats) को बहाल करना और फिर से जोड़ना है。
सर्वेक्षण के निष्कर्ष (Survey findings)
- जनसंख्या वृद्धि: April 2026 के सर्वेक्षण में 1,364 जानवरों की गिनती की गई, जो 2025 में 1,303 से 4.68 प्रतिशत अधिक है और 2024 में 1,031 से 32 प्रतिशत अधिक है।
- वितरण (Distribution): फील्ड टीमों (Field teams) ने अनामलाई, नीलगिरि और पलानी परिदृश्यों (landscapes) में 14 वन प्रभागों (forest divisions) में 177 सर्वेक्षण ब्लॉकों को कवर किया। अनामलाई पहाड़ियों (Anamalai Hills) में लगभग 45 प्रतिशत आबादी थी, जबकि नीलगिरि परिदृश्य में लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा था।
- जनसांख्यिकीय अनुपात (Demographic ratios): नर से मादा का अनुपात लगभग 55:100 था, और मादा से बच्चे का अनुपात 100:66 था, जो स्वस्थ भर्ती (healthy recruitment) का संकेत देता है।
- निगरानी उपकरण (Monitoring tools): शोधकर्ताओं ने रियल-टाइम डेटा प्रविष्टि (real-time data entry) और जियोरेफरेंसिंग (georeferencing) के लिए VARUDAI मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया। वन कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की भागीदारी ने गिनती की सटीकता में सुधार किया।
प्रोजेक्ट नीलगिरि तहर (Project Nilgiri Tahr)
- आवास की बहाली (Habitat restoration): यह परियोजना पर्वतीय घास के मैदानों (montane grasslands) को पुनर्स्थापित करती है, आक्रामक प्रजातियों (invasive species) को हटाती है और अलग-थलग आबादी के बीच गलियारों (corridors) को फिर से बनाती है।
- वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific management): योजनाओं में आवाजाही (movement) का अध्ययन करने के लिए जानवरों को रेडियो कॉलर (radio collaring) पहनाना, एक संभावित कैप्टिव-ब्रीडिंग कार्यक्रम (captive-breeding programme) स्थापित करना और ऐतिहासिक श्रेणियों (historical ranges) में तहर (Tahrs) को फिर से पेश करना शामिल है जहां से वे गायब हो गए हैं।
- सामुदायिक जुड़ाव (Community engagement): यह परियोजना इको-टूरिज्म (eco-tourism), जागरूकता अभियानों और जंगल की आग को रोकने और आवास की रक्षा करने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देती है।
निष्कर्ष
सिंक्रोनाइज़्ड सर्वेक्षण (synchronised survey) के सकारात्मक रुझान (positive trends) बताते हैं कि निरंतर संरक्षण उपाय (sustained conservation measures) और निगरानी रंग ला रही है। नीलगिरि तहर (Nilgiri Tahr) के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए, अधिकारियों को आवास की बहाली जारी रखनी चाहिए, जंगल की आग को नियंत्रित करना चाहिए और स्थानीय समुदायों को शामिल करना चाहिए。