Defence

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2: नौसेना और संयुक्त समुद्री बल

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2: नौसेना और संयुक्त समुद्री बल

समाचारों में क्यों?

भारतीय नौसेना कोच्चि में एक बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी करेगी। यह 20 से 23 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस कार्यक्रम में कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (संयुक्त समुद्री बल) साझेदारी के कर्मी शामिल होंगे। भारत इसका संचालन उस प्रशिक्षण टास्क फोर्स के माध्यम से करेगा जिसका वह वर्तमान में नेतृत्व कर रहा है।

पृष्ठभूमि

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 एक चार दिवसीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम है।

भारतीय नौसेना केरल के कोच्चि में दक्षिणी नौसेना कमान में इसकी मेजबानी करेगी।

यह आयोजन कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (Combined Maritime Forces) के साथ आयोजित किया जा रहा है, जो एक स्वैच्छिक बहुराष्ट्रीय नौसेना साझेदारी है।

इस साझेदारी को संक्षेप में CMF कहा जाता है; इसका मुख्यालय बहरीन में स्थित है।

CMF वर्तमान में 47 देशों को एक साथ लाता है; यह लगभग 3.2 मिलियन वर्ग मील में फैले महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर काम करता है।

CMF खुद को दुनिया की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय नौसैनिक साझेदारी के रूप में वर्णित करता है।

इसकी प्राथमिकताओं में समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी, गैर-कानूनी गतिविधि और गैर-राज्य अभिनेताओं द्वारा अवैध गतिविधियों का मुकाबला करना शामिल है।

नाम को गलत न समझें: आधिकारिक स्रोत "26-2" का विस्तार नहीं करते हैं; इसका मतलब 26 भाग लेने वाले देश नहीं है।

साझेदारी कैसे आयोजित की जाती है?

CMF पांच संयुक्त कार्य बलों (Combined Task Forces) के माध्यम से काम करता है; प्रत्येक बल की एक विशिष्ट समुद्री जिम्मेदारी है।

  • संयुक्त कार्य बल 150 (Combined Task Force 150) अरब की खाड़ी के बाहर समुद्री सुरक्षा को संभालता है।
  • संयुक्त कार्य बल 151 (Combined Task Force 151) समुद्री डकैती विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • संयुक्त कार्य बल 152 (Combined Task Force 152) अरब की खाड़ी के अंदर समुद्री सुरक्षा को कवर करता है।
  • संयुक्त कार्य बल 153 (Combined Task Force 153) लाल सागर की समुद्री सुरक्षा को कवर करता है।
  • संयुक्त कार्य बल 154 (Combined Task Force 154) समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करता है।

अंतिम निकाय को संक्षेप में CTF 154 कहा जाता है; ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस इस प्रशिक्षण कार्य बल के अंतर्गत आता है।

सदस्यता हर देश को युद्धपोत तैनात करने के लिए मजबूर नहीं करती है; योगदान राष्ट्रीय पसंद और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है।

कोई देश संपर्क अधिकारी (liaison officer), विमान या जहाज भेज सकता है; यह केवल चयनित गतिविधियों का समर्थन भी कर सकता है।

प्रशिक्षण कार्य बल का विकास कैसे हुआ?

  1. CMF ने 22 मई 2023 को CTF 154 की स्थापना की।
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका ने सबसे पहले नए कार्य बल का नेतृत्व किया।
  3. जॉर्डन, मिस्र, श्रीलंका और इटली ने बाद में कमान संभाली।
  4. भारत ने 11 फरवरी 2026 को इटली से कमान ग्रहण की।
  5. यह किसी भी CMF कार्य बल की भारत की पहली कमान बन गई।
  6. भारत अब कोच्चि में जुलाई के प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व करेगा।

कोमोडोर मिलिंद मोकाशी ने भारतीय नौसेना के लिए कमान संभाली; मुख्य कर्मचारियों में कई साझेदार देशों के कर्मी शामिल हैं।

कार्यक्रम क्या सिखाएगा?

कार्यक्रम में कक्षा के पाठ, सिमुलेटर, व्यावहारिक अभ्यास और भारतीय नौसेना के जहाजों पर प्रशिक्षण शामिल हैं।

  • समुद्री कानून (Maritime law) समुद्र में आचरण को नियंत्रित करने वाले कानूनी नियमों की व्याख्या करता है।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime domain awareness) जहाजों, जोखिमों और गतिविधियों की साझा तस्वीर बनाता है।
  • सूचना साझाकरण (Information sharing) विभिन्न बलों को चेतावनियों और परिचालन विवरणों का शीघ्र आदान-प्रदान करने में मदद करता है।
  • नारकोटिक्स-रोधी प्रशिक्षण (Counter-narcotics training) मादक पदार्थों की तस्करी का पता लगाने और उसे रोकने में मदद करता है।
  • बल संरक्षण (Force protection) जहाजों, कर्मियों, ठिकानों और आवश्यक उपकरणों की सुरक्षा करता है।
  • असममित-खतरे का प्रशिक्षण (Asymmetric-threat training) सस्ते या अपरंपरागत तरीकों का उपयोग करके किए गए हमलों से निपटता है।
  • मानवरहित समुद्री प्रणालियों (Uncrewed maritime systems) में दूर से संचालित या स्वायत्त सतह और पानी के नीचे के प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
  • क्षति नियंत्रण (Damage control) चालक दल को बाढ़, आग और संरचनात्मक क्षति को नियंत्रित करना सिखाता है।
  • बोर्डिंग प्रक्रियाएं (Boarding procedures) टीमों को किसी जहाज का सुरक्षित और कानूनी रूप से निरीक्षण करने के लिए तैयार करती हैं।
  • अस्तित्व प्रशिक्षण (Survival training) में आपात स्थिति, संचार और समुद्र में बचाव शामिल है।

इंटरऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालनीयता) का क्या अर्थ है?

इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ है कि विभिन्न देशों के बल एक साथ प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।

उन्हें अनुकूल प्रक्रियाओं, स्पष्ट संचार और कानूनी सीमाओं की साझा समझ की आवश्यकता होती है।

संयुक्त प्रशिक्षण किसी वास्तविक आपात स्थिति के होने से पहले मतभेदों को उजागर करता है; यह भाग लेने वाले कर्मियों के बीच विश्वास भी बनाता है।

ऐसी तैयारी बचाव मिशन, समुद्री डकैती की घटनाओं, तस्करी के मामलों और मानवीय आपात स्थितियों के दौरान मदद करती है।

प्रारंभिक परीक्षा का बिंदु (Prelims point): CTF 154 CMF का प्रशिक्षण कार्य बल है; भारत ने फरवरी 2026 में पहली बार इसकी कमान संभाली।

कोच्चि क्यों उपयुक्त है?

दक्षिणी नौसेना कमान भारतीय नौसेना की प्रमुख प्रशिक्षण कमान है।

कोच्चि में प्रशिक्षण स्कूल, सिमुलेटर, बंदरगाह सुविधाएं और परिचालन नौसैनिक प्लेटफार्मों तक पहुंच है।

इसकी स्थिति व्यापक हिंद महासागर सुरक्षा वातावरण के साथ प्रशिक्षण को भी जोड़ती है।

भारत के लिए यह अभ्यास क्यों मायने रखता है?

  • यह एक क्षेत्रीय समुद्री प्रशिक्षण भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है।
  • यह युद्ध अभियान की आवश्यकता के बिना सहयोग में सुधार करता है।
  • यह पश्चिमी हिंद महासागर में सुरक्षित व्यापार मार्गों का समर्थन करता है।
  • यह भारतीय प्रशिक्षकों को विविध नौसैनिक प्रथाओं का अनुभव देता है।
  • यह एक बड़े बहुराष्ट्रीय तंत्र का नेतृत्व करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

निष्कर्ष

ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस मुख्य रूप से एक क्षमता-निर्माण कार्यक्रम है; इसका मूल्य साझा कौशल, विश्वास और समन्वित समुद्री प्रतिक्रियाओं में निहित है।

स्रोत

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