कला और संस्कृति

पद्मा दोरी: एरी सिल्क, चंदेरी बुनाई

पद्मा दोरी: एरी सिल्क, चंदेरी बुनाई

समाचार में क्यों?

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (Ministry of Development of North Eastern Region) ने हाल ही में क्रॉस-कल्चरल टेक्सटाइल पहल "पद्मा डोरी (Padma Doree)" लॉन्च की है। यह पूर्वोत्तर के एरी सिल्क (Eri silk) यार्न और मध्य प्रदेश की पारंपरिक चंदेरी (Chanderi) बुनाई को एक साथ लाता है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ शिल्प को प्रदर्शित करना और वस्त्रों के माध्यम से एकता को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

एरी (अहिंसा) सिल्क: यह पालतू रेशम कीट Samia ricini से प्राप्त होता है। शहतूत (mulberry) रेशम के विपरीत, कोकून को कीट के निकलने के बाद ही एकत्र किया जाता है, जिससे यह फाइबर क्रूरता-मुक्त (cruelty-free) हो जाता है। एरी यार्न नरम, टिकाऊ, सांस लेने योग्य (breathable) होता है और इसमें प्राकृतिक थर्मल गुण होते हैं। असम, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में इसका सांस्कृतिक महत्व है और इसे 2021 में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication - GI) टैग प्राप्त हुआ।

चंदेरी बुनाई: इसकी जड़ें मध्य प्रदेश के चंदेरी शहर में हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कोष्ठी (Kosthi) बुनकर 13वीं शताब्दी में यहाँ बसे थे। मुगल काल के दौरान शाही संरक्षण में यह शिल्प फला-फूला। बुनकर ताना (warp) में रेशम और बाना (weft) में बढ़िया कपास का उपयोग करके हल्के, पारदर्शी कपड़े बनाते हैं जो ज़री (zari) रूपांकनों (motifs) से सजे होते हैं। पारंपरिक रूपांकनों में पैस्ले (paisley) और पुष्प पैटर्न शामिल हैं। चंदेरी वस्त्र अपने पारदर्शी एहसास के लिए प्रसिद्ध हुए और भारतीय रॉयल्टी द्वारा पसंद किए गए। औद्योगीकरण की चुनौतियों के बावजूद, स्वतंत्रता के बाद शिल्प पुनर्जीवित हुआ और अब इसे GI सुरक्षा प्राप्त है।

पद्मा डोरी की विशेषताएँ

  • सामग्री का संलयन (Fusion of materials): पूर्वोत्तर के एरी सिल्क यार्न को चंदेरी की रेशम-कपास बुनाई के साथ मिश्रित किया जाता है, जिससे नरम और चमकदार दोनों तरह के कपड़े बनते हैं।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान (Cultural exchange): यह परियोजना विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों को सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो विविधता में एकता की "एक भारत श्रेष्ठ भारत" (Ek Bharat Shreshtha Bharat) भावना को बढ़ावा देती है।
  • स्थिरता (Sustainability): एरी रेशम को अहिंसा रेशम (Ahimsa silk) के रूप में जाना जाता है क्योंकि रेशम के कीड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है। इसे हथकरघा बुनाई (handloom weaving) के साथ जोड़ना टिकाऊ और नैतिक फैशन का समर्थन करता है।
  • नवाचार और डिजाइन: प्रदर्शनियां ऐसे कपड़ों, घरेलू वस्त्रों और सहायक उपकरण (accessories) को प्रदर्शित करती हैं जो समकालीन सौंदर्यशास्त्र के साथ पारंपरिक तकनीकों को मिलाते हैं। प्रदर्शन आगंतुकों को कताई (spinning), रंगाई (dyeing) और बुनाई देखने की अनुमति देते हैं।

महत्व

पद्मा डोरी दर्शाती है कि सहयोग के माध्यम से भारतीय शिल्प कैसे विकसित हो सकते हैं। एरी सिल्क के पर्यावरण के अनुकूल गुणों को चंदेरी बुनाई के परिष्कार (refinement) के साथ मिलाकर, यह पहल अद्वितीय उत्पाद बनाती है और कारीगरों को नया करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए दोनों क्षेत्रों में बुनकरों और कातने वालों के लिए आजीविका के अवसर भी प्रदान करता है।

स्रोत: PIB

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