कला और संस्कृति

पद्मा दोरी: एरी सिल्क, चंदेरी बुनाई

पद्मा दोरी: एरी सिल्क, चंदेरी बुनाई

समाचार में क्यों?

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (Ministry of Development of North Eastern Region) ने हाल ही में एक क्रॉस-सांस्कृतिक कपड़ा पहल, "Padma Doree" शुरू की है। यह पूर्वोत्तर (North-East) के Eri Silk के धागे और मध्य प्रदेश की पारंपरिक Chanderi वीविंग (weaving) को एक साथ लाता है, जिसका लक्ष्य टिकाऊ शिल्प को प्रदर्शित करना और वस्त्रों के माध्यम से एकता को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

Eri (अहिंसा) सिल्क पालतू रेशम के कीड़े Samia ricini से आता है। शहतूत रेशम (mulberry silk) के विपरीत, कोकून केवल पतंगे के निकलने के बाद एकत्र किए जाते हैं, जिससे यह फाइबर क्रूरता-मुक्त (cruelty-free) हो जाता है। Eri का धागा नरम, टिकाऊ, सांस लेने योग्य (breathable) होता है और इसमें प्राकृतिक थर्मल गुण होते हैं। यह असम, मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में सांस्कृतिक महत्व रखता है और 2024 में इसे भौगोलिक संकेत (Geographical Indication) टैग प्राप्त हुआ है।

Chanderi वीविंग (Chanderi weaving) मध्य प्रदेश के चंदेरी शहर में निहित है। ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि 14वीं शताब्दी (लगभग 1350) में कोष्ठी (Kosthi) बुनकर यहां बस गए थे। मुग़ल काल के दौरान शाही संरक्षण में यह कला फली-फूली। बुनकर ताने (warp) में रेशम और बाने (weft) में महीन कपास का उपयोग हल्के, पारभासी (translucent) कपड़े बनाने के लिए करते हैं जो ज़री (zari) रूपांकनों (motifs) से सुशोभित होते हैं। पारंपरिक रूपांकनों में पैस्ले (paisley) और पुष्प पैटर्न (floral patterns) शामिल हैं। Chanderi के वस्त्रों ने अपने महीन स्पर्श के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की और भारतीय राजघरानों द्वारा इष्ट (favoured) थे। औद्योगीकरण से चुनौतियों के बावजूद, स्वतंत्रता के बाद शिल्प पुनर्जीवित हुआ और अब इसे GI सुरक्षा प्राप्त है।

Padma Doree की विशेषताएं

  • सामग्रियों का संलयन (Fusion of materials): पूर्वोत्तर के Eri Silk यार्न को Chanderi के रेशम-कपास की बुनाई के साथ मिश्रित किया जाता है, जिससे ऐसे कपड़े बनते हैं जो नरम और चमकदार दोनों होते हैं।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: यह परियोजना विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों को सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो विविधता में एकता की "एक भारत श्रेष्ठ भारत" भावना को बढ़ावा देती है।
  • स्थिरता: Eri Silk को अहिंसा सिल्क (Ahimsa silk) के रूप में जाना जाता है क्योंकि रेशम के कीड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है। इसे हथकरघा बुनाई (handloom weaving) के साथ जोड़ना टिकाऊ और नैतिक फैशन का समर्थन करता है।
  • नवाचार और डिजाइन: प्रदर्शनियां कपड़े, घरेलू वस्त्र और सहायक उपकरण प्रदर्शित करती हैं जो समकालीन सौंदर्यशास्त्र के साथ पारंपरिक तकनीकों का विलय करते हैं। प्रदर्शन (Demonstrations) आगंतुकों को कताई, रंगाई और बुनाई देखने की अनुमति देते हैं।

महत्व

Padma Doree प्रदर्शित करता है कि कैसे भारतीय शिल्प सहयोग के माध्यम से विकसित हो सकते हैं। Eri Silk के पर्यावरण के अनुकूल गुणों को Chanderi वीविंग के शोधन के साथ जोड़कर, यह पहल अद्वितीय उत्पाद बनाती है और कारीगरों को नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए पारंपरिक कौशल को संरक्षित करते हुए दोनों क्षेत्रों में बुनकरों और स्पिनरों (spinners) के लिए आजीविका के अवसर भी प्रदान करता है।

स्रोत: PIB
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