पर्यावरण

Painted Leopard Gecko: यूबलेफेरिस पिक्टस, पूर्वी घाट और निशाचर छिपकली

Painted Leopard Gecko: यूबलेफेरिस पिक्टस, पूर्वी घाट और निशाचर छिपकली

चर्चा में क्यों?

शोधकर्ताओं ने भारत में लेपर्ड गेको (leopard gecko) की एक विशिष्ट प्रजाति की पहचान की है, जिसका नाम पेंटेड लेपर्ड गेको (Painted Leopard Gecko) (यूबलफेरिस पिक्टस - Eublepharis pictus) रखा गया है। ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के शुष्क जंगलों में पाई जाने वाली इस रातचर (nocturnal) छिपकली की पहले किसी अन्य प्रजाति के रूप में गलत पहचान की गई थी। यह खोज पूर्वी घाटों (Eastern Ghats) की समृद्ध जैव विविधता (biodiversity) को उजागर करती है और अवैध वन्यजीव व्यापार (illegal wildlife trade) के खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

पृष्ठभूमि

लेपर्ड गेको यूबलफेरिस (Eublepharis) जीनस से संबंधित हैं और अपने आकर्षक पैटर्न (striking patterns) के कारण पालतू व्यापार (pet trade) में लोकप्रिय हैं। 2022 में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), कोलकाता और सेल्युलर और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी सेंटर (CCMB), हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने पूर्वी घाटों के गेको की जांच की जिन्हें यूबलफेरिस हार्डविकी (Eublepharis hardwickii) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। उनकी आकृति विज्ञान (morphology) और डीएनए (DNA) के विस्तृत अध्ययन से पता चला कि ये नमूने एक अलग प्रजाति के थे, जिसका नाम उन्होंने यूबलफेरिस पिक्टस (Eublepharis pictus) रखा। प्रजाति के नाम का अर्थ "पेंट किया हुआ (painted)" है, जो छिपकली के चमकीले पैटर्न वाले बैंड को दर्शाता है।

मुख्य विशेषताएं

  • आकार और रूप: वयस्क लंबाई में लगभग 11-12 सेंटीमीटर तक पहुंचते हैं। मादाओं की तुलना में नर के सिर बड़े होते हैं और पूर्व-गुदा छिद्र (pre-anal pores) लंबे होते हैं। उनके पृष्ठीय भाग (dorsal side) में पीले और गहरे भूरे रंग के बैंड एकांतर होते हैं, जो पेंट किए हुए रूप (painted appearance) देते हैं।
  • आवास (Habitat): यह प्रजाति पूर्वी घाटों के शुष्क सदाबहार और पर्णपाती जंगलों में निवास करती है, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम के पास और दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में। ये गेको सख्ती से रातचर होते हैं और जमीन पर रहते हैं।
  • व्यवहार: अन्य लेपर्ड गेको की तरह, वे अपने परिवेश का पता लगाने और संवाद करने के लिए अपनी जीभ का उपयोग करते हैं। वे कीड़े और अन्य छोटे अकशेरुकी (invertebrates) खाते हैं।
  • संरक्षण चिंता: उनके आकर्षक रंगों के कारण, पेंटेड लेपर्ड गेको को पालतू व्यापार के लिए एकत्र किया जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि व्यक्तियों की सीमाओं के पार तस्करी (smuggled) की जा रही है। वनों की कटाई और उत्खनन (quarrying) से निवास स्थान का नुकसान प्रजातियों के लिए और खतरा पैदा करता है। वैज्ञानिकों ने इसे IUCN रेड लिस्ट में नियर थ्रेटेंड (Near Threatened) के रूप में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव दिया है।

महत्व

  • जैव विविधता की खोज: यूबलफेरिस पिक्टस की पहचान दर्शाती है कि भारत के सरीसृप जीवों (reptile fauna) के बारे में कितना अज्ञात है, विशेषकर पूर्वी घाट जैसे कम अध्ययन किए गए क्षेत्रों में।
  • संरक्षण संदेश: एक नई प्रजाति की मान्यता आवास संरक्षण और विदेशी पालतू व्यापार के नियमन की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
  • वैज्ञानिक मूल्य: छिपकली के आनुवंशिकी और पारिस्थितिकी को समझना संरक्षण रणनीतियों को सूचित कर सकता है और लेपर्ड गेको समूह के भीतर विकासवादी संबंधों को स्पष्ट कर सकता है।

निष्कर्ष

पेंटेड लेपर्ड गेको भारत के पूर्वी घाटों में स्थानिक प्रजातियों (endemic species) की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है। इसके सीमित आवास की रक्षा करना और अवैध संग्रह को रोकना इस रंगीन सरीसृप के अस्तित्व के लिए आवश्यक है。

स्रोत: Sci.News; ScienceDaily

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