चर्चा में क्यों?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board - PNGRB) ने घोषणा की है कि वह सामूहिक रूप से लगभग 2,500 किलोमीटर लंबी नौ तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (liquefied petroleum gas - LPG) पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए बोलियां (bids) आमंत्रित करेगा। इन पाइपलाइनों का उद्देश्य सड़क मार्ग से होने वाले थोक एलपीजी परिवहन (bulk LPG transport) को प्रतिस्थापित करना, सुरक्षा बढ़ाना और ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन (greenhouse‑gas emissions) को कम करना है। परियोजनाओं के लिए अनुमानित निवेश (estimated investment) लगभग ₹12,500 करोड़ है।
PNGRB की पृष्ठभूमि
भारत में मध्य और अनुप्रवाह (midstream and downstream) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संचालन (petroleum and natural‑gas operations) को विनियमित (regulate) करने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम 2006 (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board Act 2006) के तहत PNGRB की स्थापना की गई थी। बोर्ड में एक अध्यक्ष (chairperson), तीन सदस्य (members) और एक सदस्य (कानूनी) (member - legal) शामिल हैं। इसे उपभोक्ता हितों (consumer interests) की रक्षा करने, प्रतिस्पर्धा (competition) को बढ़ावा देने और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र (petroleum and natural‑gas sector) की व्यवस्थित वृद्धि (orderly growth) सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है।
बोर्ड के कार्य
- पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइनों (petroleum product pipelines), सिटी गैस वितरण नेटवर्क (city gas distribution networks), एलएनजी टर्मिनलों (LNG terminals) और भंडारण सुविधाओं (storage facilities) को बिछाने, बनाने, संचालित करने या विस्तार करने के लिए संस्थाओं (entities) को पंजीकृत और अधिकृत करना।
- खुली पहुंच (open access) और उचित टैरिफ (fair tariffs) सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइनों को सामान्य वाहक (common carriers) या अनुबंध वाहक (contract carriers) के रूप में घोषित करना।
- पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और गुणवत्ता की निगरानी (Monitoring) करना और तकनीकी और सुरक्षा मानकों (technical and safety standards) को लागू करना।
- आर्थिक रूप से स्थिर उद्योग (economically stable industry) बनाए रखने के लिए शुल्क लगाना और परिवहन टैरिफ (transportation tariffs) निर्धारित करना।
- यह सुनिश्चित करना कि ग्राहकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों (competitive prices) पर माल मिले और उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के हितों की रक्षा हो।
नई एलपीजी पाइपलाइनों का विवरण
- परियोजनाएं (Projects): चार पाइपलाइनें वर्तमान में बोली चरण (bidding stage) में हैं—चेरलापल्ली-नागपुर (Cherlapally–Nagpur), शिकरापुर-हुबली-गोवा (Shikrapur–Hubballi–Goa), पारादीप-रायपुर (Paradip–Raipur) और झांसी-सितारगंज (Jhansi–Sitarganj)—जबकि पांच और योजना चरण (planning phase) में हैं।
- उद्देश्य (Objective): पाइपलाइन एलपीजी आयात टर्मिनलों (LPG import terminals) और रिफाइनरियों (refineries) को विभिन्न क्षेत्रों में बॉटलिंग संयंत्रों (bottling plants) से जोड़ेंगी। 2030 तक बोर्ड का लक्ष्य एलपीजी के थोक सड़क परिवहन (bulk road transport) को समाप्त करना है, जो वर्तमान में ड्राइवरों को दुर्घटना के जोखिम (accident risks) में डालता है और भीड़भाड़ (congestion) में योगदान देता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental impact): सड़क से पाइपलाइन में जाने से कार्बन उत्सर्जन (carbon emissions) कम होगा, ईंधन की खपत (fuel consumption) कम होगी और रिसाव (spillage) एवं दुर्घटनाओं (accidents) में कमी आएगी।
- निवेश और नौकरियां (Investment and jobs): ₹12,500 करोड़ के खर्च से निर्माण के दौरान रोज़गार (employment) पैदा होने और पाइपलाइन बुनियादी ढांचा नेटवर्क (pipeline infrastructure network) के मजबूत होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क (LPG pipeline network) का विस्तार करके, PNGRB भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (energy supply chain) में सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता (environmental sustainability) और दक्षता (efficiency) में सुधार करना चाहता है। यह पहल यह भी दर्शाती है कि उपभोक्ता हितों (consumer interests) की रक्षा करते हुए नियामक (regulators) बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण (modernising infrastructure) में कैसे सक्रिय भूमिका (proactive role) निभा सकते हैं।