रक्षा

Project 18 (P-18) Destroyers: Indian Navy, Next-Generation Warships और Make in India

Project 18 (P-18) Destroyers: Indian Navy, Next-Generation Warships और Make in India

चर्चा में क्यों?

जून 2026 की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अपने प्रोजेक्ट 18 (P-18) डिस्ट्रॉयर्स (destroyers) के कॉन्सेप्ट को अंतिम रूप दे दिया है और इसके डिज़ाइन टेंडर जारी करने की तैयारी कर रही है। ये युद्धपोत कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर्स (Kolkata-class destroyers) की जगह लेंगे और "मेक इन इंडिया" (Make in India) कार्यक्रम के तहत उन्नत स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन करेंगे。

पृष्ठभूमि

भारतीय नौसेना वर्तमान में दिल्ली-क्लास (1997 और 2001 के बीच कमीशन किए गए) और नए कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर्स (2014 से कमीशन किए गए) का संचालन करती है। जैसे-जैसे खतरे बढ़ रहे हैं, नौसेना योजनाकार एक बड़े, अधिक स्टील्थ (stealthy) और अधिक सक्षम डिस्ट्रॉयर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। प्रोजेक्ट 18 की परिकल्पना एक अगली पीढ़ी के सर्फेस कॉम्बैटेंट (surface combatant) को देने के लिए की गई थी जो हवा, सतह और समुद्र के नीचे - कई डोमेन पर हावी हो सके, जबकि भारतीय उद्योग पर काफी हद तक निर्भर रहे। इस क्लास का विकास 2030 के मध्य तक 200 जहाजों के बेड़े (200-ship fleet) को तैयार करने की नौसेना की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है。

मुख्य विशेषताएं

  • डिस्प्लेसमेंट और हल (Displacement and hull): P-18 डिस्ट्रॉयर्स का डिस्प्लेसमेंट 11,000 से 13,000 टन के बीच होने की उम्मीद है, जिससे ये भारतीय बेड़े के सबसे बड़े सर्फेस कॉम्बैटेंट बन जाएंगे। इसके हल (hull) में स्टील्थ शेपिंग (stealth shaping) और रडार-एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (radar-absorbent materials) का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि रडार की पकड़ में आने से बचा जा सके।
  • इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (Integrated Electric Propulsion - IEP): जहाजों में एक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ड्राइव (electric drive) का उपयोग किया जाएगा जहां गैस टर्बाइन और डीजल जनरेटर प्रोपल्शन मोटर्स और ऑनबोर्ड सिस्टम दोनों के लिए बिजली पैदा करेंगे। यह लचीला पावर मैनेजमेंट (power management), शांत संचालन और निर्देशित ऊर्जा हथियारों (directed-energy weapons) के भविष्य के एकीकरण की अनुमति देता है।
  • आयुध (Armament): लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (surface-to-air missiles), एंटी-शिप मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस और भविष्य के हाइपरसोनिक सिस्टम) और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों (land-attack cruise missiles) के मिश्रण के लिए 144 वर्टिकल लॉन्च सेल (vertical launch cells) तक की योजना बनाई गई है। क्लोज-इन वेपन सिस्टम (Close-in weapon systems) और नई पीढ़ी के टॉरपीडो (torpedoes) बहु-स्तरीय रक्षा प्रदान करेंगे।
  • सेंसर और कमांड हब (Sensors and command hub): कथित तौर पर 500 किमी से अधिक की रेंज वाले 360-डिग्री एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (active electronically scanned array - AESA) रडार को उन्नत सोनार सूट (sonar suites) और इन्फ्रारेड सेंसर (infrared sensors) के साथ जोड़ा जाएगा। एक बड़ा कॉम्बैट इंफॉर्मेशन सेंटर (combat information centre) नौसैनिक, वायु और अंतरिक्ष संपत्तियों को जोड़ने वाले बहु-डोमेन कमांड हब (multi-domain command hub) के रूप में कार्य करेगा।
  • ऑटोमेशन और क्रू (Automation and crew): मौजूदा डिस्ट्रॉयर्स की तुलना में चालक दल की संख्या को लगभग एक-चौथाई कम करने के लिए व्यापक ऑटोमेशन (automation) की योजना बनाई गई है, जिससे लाइफ-साइकिल लागत कम होगी और रहने की स्थिति (habitability) में सुधार होगा।
  • स्वदेशी सामग्री (Indigenous content): रिपोर्ट्स बताती हैं कि जहाज के लगभग 75 प्रतिशत घटक और प्रणालियां (components and systems) भारतीय उद्योग से प्राप्त की जाएंगी, जो आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) का समर्थन करेंगी और घरेलू जहाज निर्माण क्षमताओं (shipbuilding capabilities) को बढ़ाएंगी।

अपेक्षित समयरेखा और महत्व

डिज़ाइन का चरण 2026 के उत्तरार्ध में शुरू होने वाला है। विस्तृत डिज़ाइन और परीक्षणों के बाद 2028 के आसपास मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के यार्ड में निर्माण शुरू हो सकता है। 2030 के दशक की शुरुआत में डिलीवरी (Deliveries) शुरू हो सकती है। प्रोजेक्ट 18 स्वदेशी युद्धपोत डिज़ाइन में एक छलांग का प्रतिनिधित्व करता है और नौसेना को एक बहुमुखी प्लेटफॉर्म से लैस करेगा जो भविष्य की तकनीकों जैसे लेजर (lasers) और रेलगन (railguns) को तैनात करने में सक्षम है。

निष्कर्ष

प्रोजेक्ट 18 भारत की बड़े पैमाने पर स्वदेश में निर्मित विश्व स्तरीय सर्फेस कॉम्बैटेंट (surface combatants) को तैनात करने की महत्वाकांक्षा का संकेत देता है। अत्याधुनिक प्रोपल्शन (propulsion), सेंसर (sensors) और हथियारों (weapons) को शामिल करके, ये डिस्ट्रॉयर्स (destroyers) समुद्री प्रतिरोध (maritime deterrence) को मजबूत करेंगे और भारतीय नौसैनिक इंजीनियरिंग की प्रगति को उजागर करेंगे。

स्रोत

TEN News

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources Free downloads Booklist 2026 Previous year papers Video notes YouTube channel