विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Project Garud: Dhruva Space, मॉड्यूलर सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और RDIF

Project Garud: Dhruva Space, मॉड्यूलर सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और RDIF

चर्चा में क्यों?

एक निजी भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप, ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) को प्रोजेक्ट गरुड़ (Project Garud) विकसित करने के लिए रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फंड (RDIF) से महत्वपूर्ण समर्थन मिला है। इस परियोजना का उद्देश्य एक स्वदेशी 500-किलोग्राम श्रेणी का सैटेलाइट प्लेटफॉर्म बनाना है जिसका निर्माण तेजी से और बड़ी संख्या में किया जा सकता है। ऐसा प्लेटफॉर्म छोटे प्रायोगिक उपग्रहों और बड़े भूस्थैतिक प्रणालियों (geostationary systems) के बीच की खाई को पाटता है और इससे संचार (communications), पृथ्वी अवलोकन (Earth observation) और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई अनुप्रयोगों (applications) की सेवा की उम्मीद है। हालिया फंडिंग घोषणा ने अपने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ाने की भारत की महत्वाकांक्षा को उजागर किया है。

पृष्ठभूमि

हाल तक, भारत के उपग्रह निर्माण पर 100 किलोग्राम से कम वजन वाले छोटे अंतरिक्ष यानों या सरकार द्वारा उत्पादित बहुत बड़े उपग्रहों का दबदबा था। ध्रुव स्पेस एक मध्यम-वजन वाले प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव करता है जिसे मॉड्यूलर "फ्लैट-पैक (flat-pack)" डिज़ाइन में बनाया जा सकता है, जिससे व्यक्तिगत उप-प्रणालियों (subsystems) को जल्दी से जोड़ा जा सकता है और समानांतर रूप से (in parallel) परीक्षण किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग (consumer electronics industry) से प्रेरणा लेता है जहां मॉड्यूलर निर्माण से लागत कम होती है और उत्पादन में तेजी आती है।

प्रोजेक्ट गरुड़ की प्रमुख विशेषताएं

  • मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म (Modular platform): 500-किलोग्राम की बस को एक किट की तरह डिज़ाइन किया गया है। शक्ति (power), प्रणोदन (propulsion) और संचार (communications) के लिए मानकीकृत इकाइयों (Standardised units) को अलग से जोड़ा और परीक्षण किया जा सकता है, जिससे एकीकरण (integration) में तेजी आती है।
  • उच्च-मात्रा निर्माण (High-volume manufacturing): ध्रुव स्पेस ने असेंबली लाइन परिपक्व (mature) होने के बाद प्रतिदिन दो उपग्रहों तक का उत्पादन करने में सक्षम सुविधा (facility) की योजना बनाई है। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐसा पैमाना अभूतपूर्व (unprecedented) है।
  • व्यापक अनुप्रयोग (Wide applications): यह प्लेटफॉर्म दूरसंचार (telecom), राष्ट्रीय सुरक्षा और पृथ्वी-अवलोकन पेलोड (Earth-observation payloads) का समर्थन करेगा। एक आम बस (common bus) विभिन्न मिशनों के लिए लागत को कम करती है क्योंकि इंजीनियरिंग का पुन: उपयोग (reused) किया जाता है।
  • स्वदेशी विकास (Indigenous development): प्रोजेक्ट गरुड़ विदेशी उपग्रह प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करता है और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए सरकार के "मेक इन इंडिया" विजन का समर्थन करता है।

निष्कर्ष

प्रोजेक्ट गरुड़ को वित्तपोषित (funding) करके, सरकार को एक ऐसे घरेलू उद्योग (domestic industry) को उत्प्रेरित (catalyse) करने की उम्मीद है जो मध्यम आकार के उपग्रहों को जल्दी और सस्ते में बना सके। यदि सफल रहा, तो यह कार्यक्रम भारत को उपग्रह निर्माण का केंद्र (hub) बना सकता है और सरकारी और वाणिज्यिक दोनों मिशनों के लिए सुलभ प्लेटफॉर्म (accessible platforms) प्रदान कर सकता है।

स्रोत

The Hindu

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