राजव्यवस्था

Rajya Sabha Elections: सिंगल ट्रांसफरेबल वोट, आनुपातिक प्रतिनिधित्व और STV

Rajya Sabha Elections: सिंगल ट्रांसफरेबल वोट, आनुपातिक प्रतिनिधित्व और STV

चर्चा में क्यों?

चूंकि कई राज्यों ने अप्रैल 2026 में राज्यसभा चुनावों (Rajya Sabha elections) की तैयारी की थी, इसलिए भारत की राज्यों की परिषद (Council of States) के सदस्यों के चुनाव के तरीके के बारे में सवाल उठे। यह प्रक्रिया लोकसभा के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रत्यक्ष चुनावों (direct elections) से भिन्न है और संसद के संघीय चरित्र (federal character) को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

राज्यसभा भारत की संसद का उच्च सदन (upper house) है। इसमें अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; वर्तमान में इसके 245 सदस्य हैं। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (union territories) का प्रतिनिधित्व करते हैं और राज्य विधानसभाओं (state legislative assemblies) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से बारह सदस्यों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित (nominated) किया जाता है। सदन एक स्थायी निकाय (permanent body) है और इसके विघटन (dissolution) का विषय नहीं है। हालाँकि, इसके एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं और प्रत्येक सदस्य छह साल का कार्यकाल पूरा करता है।

चुनाव प्रक्रिया

  • आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional representation): राज्यसभा चुनाव एकल संक्रमणीय वोट (single transferable vote - STV) के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली का उपयोग करते हैं। विधायक प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग वोट नहीं देते हैं; इसके बजाय, वे वरीयता क्रम (order of preference) में उम्मीदवारों को रैंक करते हैं।
  • कोटा सूत्र (Quota formula): चुने जाने के लिए, एक उम्मीदवार को सूत्र द्वारा गणना की गई न्यूनतम संख्या में वोट हासिल करने चाहिए: कोटा = (वोटों की कुल संख्या ÷ (भरी जाने वाली सीटों की संख्या + 1)) + 1। इस कोटे से परे किसी भी अधिशेष वोट को बाद की प्राथमिकताओं के आधार पर शेष उम्मीदवारों को स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • खुला मतदान (Open ballot): मतदान गुप्त नहीं होता है। किसी राजनीतिक दल से संबंधित सदस्य को सत्यापन के लिए एक अधिकृत पार्टी एजेंट (authorised party agent) को चिह्नित मतपत्र (marked ballot paper) दिखाना होगा। निर्दलीय विधायक अपना वोट किसी को नहीं बता सकते। इन नियमों का पालन करने में विफलता वोट को अमान्य (invalidates) कर देती है।
  • नामांकन (Nominations): राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान या समाज सेवा में उनके योगदान के लिए 12 सदस्यों को नामित करता है। ये नामांकित व्यक्ति सदन में विशेषज्ञता और विविधता लाते हैं।
  • रोटेशन (Rotation): चूँकि एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं, इसलिए चुनाव लड़खड़ा (staggered) जाते हैं। किसी सदस्य द्वारा सेवा किए जा सकने वाले कार्यकाल की संख्या पर कोई अधिकतम सीमा नहीं है।

निष्कर्ष

राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए, जबकि छोटी पार्टियों को प्रतिनिधित्व का मौका दिया जाए। इसकी अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली (indirect voting system), कोटा फॉर्मूला और खुला मतपत्र इसे लोकसभा के प्रत्यक्ष, फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (first‑past‑the‑post) चुनावों से अलग बनाते हैं।

स्रोत: Hindustan Times

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