विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Rumen Fluke Disease: ओडिशा प्रकोप और पशुधन स्वास्थ्य

Rumen Fluke Disease: ओडिशा प्रकोप और पशुधन स्वास्थ्य

खबरों में क्यों?

मई 2026 में ओडिशा के केंद्रपाड़ा (Kendrapada) जिले में पशु चिकित्सा अधिकारियों (veterinary authorities) ने बताया कि रूमेन फ्लूक रोग (rumen fluke disease), जिसे एम्फिस्टोमियासिस (amphistomiasis) भी कहा जाता है, के प्रकोप के कारण दर्जनों मवेशियों की मौत हो गई। किसानों ने अपने जानवरों में गंभीर दस्त (severe diarrhoea), वजन में कमी और जबड़े के नीचे सूजन देखी। रैपिड रिस्पांस टीमों (Rapid response teams) ने नमूने एकत्र किए और बीमारी को रोकने के लिए इलाज शुरू किया।

पृष्ठभूमि

रूमेन फ्लूक परजीवी चपटे कृमि (parasitic flatworms - paramphistomes) हैं जो मवेशियों और अन्य जुगाली करने वाले जानवरों (ruminants) के अग्र-आमाशय (forestomachs) में रहते हैं। उनके जीवन चक्र के लिए घोंघे (snail) को मध्यवर्ती मेजबान (intermediate host) के रूप में आवश्यकता होती है। खाद (manure) में बहने वाले अंडे पानी में फूटते हैं, और लार्वा अवस्थाएं घोंघों को संक्रमित करती हैं। परिपक्व लार्वा घोंघे को छोड़ देते हैं, वनस्पति पर एनसिस्ट (encyst) हो जाते हैं और चरने वाले जानवरों द्वारा खाए जाते हैं। छोटी आंत में अपरिपक्व फ्लूक के भारी संक्रमण से बीमारी होती है: जानवर भूख कम कर देते हैं, सुस्त हो जाते हैं और पानी जैसे दस्त से पीड़ित होते हैं। यदि इलाज नहीं किया जाता है, तो निर्जलीकरण (dehydration) मृत्यु का कारण बन सकता है। उचित चराई प्रबंधन (grazing management) और कृमिनाशक दवाओं (anthelmintic medicines) का समय पर उपयोग बड़े नुकसान को रोक सकता है।

लक्षण और प्रबंधन

  • नैदानिक ​​संकेत (Clinical signs): संक्रमित मवेशी अत्यधिक दस्त (profuse diarrhoea), तेजी से वजन कम होना, निचले जबड़े के नीचे सूजन (बॉटल जॉ - bottle jaw), दूध की उपज में कमी और सामान्य कमजोरी दिखाते हैं।
  • उपचार (Treatment): पशु चिकित्सक परजीवियों को हटाने के लिए कृमिनाशक दवाओं (anthelmintic drugs) और प्रभावित जानवरों को हाइड्रेट करने के लिए सहायक देखभाल की सलाह देते हैं। प्रारंभिक हस्तक्षेप (Early intervention) से जीवित रहने की संभावना में सुधार होता है।
  • रोकथाम (Prevention): किसानों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, घोंघे से ग्रस्त आर्द्रभूमि (snail‑infested wetlands) में जानवरों को चराने से बचने और चरागाहों (pastures) को घुमाने की सलाह दी जाती है। गर्मियों के दौरान हरा चारा बनाए रखने से जानवरों द्वारा दूषित सूखी घास खाने की संभावना कम हो जाती है।
  • निगरानी (Monitoring): रैपिड रिस्पांस टीमें निदान की पुष्टि करने और प्रसार को ट्रैक करने के लिए रक्त और मल के नमूने (blood and stool samples) एकत्र करती हैं। किसानों द्वारा समय पर रिपोर्टिंग अधिकारियों को प्रकोपों ​​को जल्दी रोकने में मदद करती है।

निष्कर्ष

रूमेन फ्लूक का प्रकोप इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे परजीवी रोग (parasitic diseases) अचानक पशुधन स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका को प्रभावित कर सकते हैं। अच्छे चरागाह प्रबंधन, स्वच्छ पानी और शीघ्र पशु चिकित्सा देखभाल जैसे सरल उपाय बड़े नुकसान को रोक सकते हैं। जागरूकता अभियान और नियमित डी-वर्मिंग (de‑worming) समुदायों को अपने मवेशियों को भविष्य के एपिसोड से बचाने में मदद करेंगे।

स्रोत

TOI

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