समाचार में क्यों?
भारी बारिश ने चिनाब (Chenab) नदी और सलाल (Salal) जलाशय में प्रवाह को तेजी से बढ़ा दिया। अधिकारियों ने 21 July 2026 को सभी बांध के गेट खोल दिए। नदी के तेज और गहरी होने के कारण अनुप्रवाह (downstream) के निवासियों को चेतावनियां मिलीं।
पृष्ठभूमि
सलाल जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में एक 690-मेगावाट की जलविद्युत परियोजना है।
यह परियोजना चिनाब का उपयोग करती है, जो सिंधु प्रणाली (Indus system) की एक प्रमुख पश्चिमी नदी है।
NHPC Limited, जिसे पहले National Hydroelectric Power Corporation Limited नाम दिया गया था, स्टेशन का मालिक है और इसका संचालन करता है।
रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना क्या है?
सलाल को आधिकारिक तौर पर चिनाब पर एक रन-ऑफ-द-रिवर (run-of-the-river) जलविद्युत योजना के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
ऐसी परियोजनाएं बड़े मौसमी भंडारण के बजाय मुख्य रूप से बहते नदी के पानी का उपयोग करती हैं।
पानी इंटेक (intakes) और चैनलों से होकर गुजरता है, मशीनरी को घुमाता है जो इसकी ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करता है।
रन-ऑफ-द-रिवर का मतलब यह कभी नहीं होता कि इसमें बांध या जलाशय नहीं है; सलाल में दोनों हैं, लेकिन यह अंतर्वाह-निर्भर (inflow-dependent) बना हुआ है।
सलाल बिजली कैसे उत्पन्न करता है?
- बांध एक उपयोगी ऊंचाई का अंतर बनाता है, जिसे हाइड्रोलिक हेड (hydraulic head) कहा जाता है।
- बड़े पाइप नियंत्रित पानी को सतह के पावरहाउस के भीतर छह Francis turbines की ओर ले जाते हैं।
- प्रत्येक 115-मेगावाट जनरेटर वोल्टेज परिवर्तन के बाद उत्तरी ट्रांसमिशन नेटवर्क (transmission network) को आपूर्ति करता है।
- छोड़ा गया पानी स्टेशन के डाउनस्ट्रीम (downstream) चिनाब में वापस आ जाता है।
सत्यापित परियोजना विनिर्देश
| विशेषता | आधिकारिक NHPC विवरण |
|---|---|
| Installed capacity | प्रत्येक 115 मेगावाट की छह इकाइयों के माध्यम से 690 मेगावाट। |
| Development stages | चरण एक और चरण दो प्रत्येक में तीन जनरेटिंग इकाइयां (generating units) हैं। |
| Turbine type | छह Francis turbines रेटेड 94.5-मीटर हेड के साथ काम करते हैं। |
| Rockfill section | यह 118 मीटर ऊंचा और 630 मीटर लंबा है। |
| Concrete section | यह 113 मीटर ऊंचा और 486.75 मीटर लंबा है। |
| Design energy | 90 प्रतिशत भरोसेमंद वर्ष में 3,082 मिलियन यूनिट, जिसमें 95 प्रतिशत मशीन की उपलब्धता मानी जाती है। |
संरचनात्मक सुधार: सलाल एक 100 मीटर ऊंचा, 1,200 मीटर लंबा तटबंध नहीं है। NHPC उपरोक्त मापों के साथ अलग रॉकफिल (rockfill) और कंक्रीट बांध वर्गों को सूचीबद्ध करता है।
शुरू करने की समय-सीमा
- इकाई एक से तीन ने 20 November 1987 को वाणिज्यिक संचालन शुरू किया।
- इकाई चार 1 July 1993 को शुरू हुई, जबकि इकाई पांच 23 May 1994 को शुरू हुई।
- छठी और अंतिम इकाई ने 1 April 1995 को वाणिज्यिक संचालन शुरू किया।
यह क्रम बताता है कि विभिन्न स्रोत कई कमीशनिंग (commissioning) वर्षों का उल्लेख क्यों करते हैं।
सलाल की बिजली किसे मिलती है?
NHPC के उत्तरी-नेटवर्क के लाभार्थियों में जम्मू और कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश भी सूचीबद्ध हैं।
सिंधु जल संधि के साथ संबंध
भारत और पाकिस्तान ने 1960 के दौरान विश्व बैंक-सहायता प्राप्त सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर हस्ताक्षर किए।
इसने रावी, ब्यास और सतलज मुख्य रूप से भारत को आवंटित किए।
इसने सिंधु, झेलम और चिनाब को मुख्य रूप से पाकिस्तान के उपयोग के लिए रखा।
भारत ने निर्दिष्ट पश्चिमी-नदी के उपयोगों को बरकरार रखा, जिसमें संधि के डिज़ाइन प्रतिबंधों का पालन करने वाली जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।
सलाल इस संधि का पहला बड़ा जलविद्युत डिज़ाइन विवाद बन गया।
भारत और पाकिस्तान ने 14 April 1978 को एक द्विपक्षीय समझौते के माध्यम से उन आपत्तियों का निपटारा किया।
भारत ने सीमा पार आतंकवाद के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए 23 April 2025 को इस संधि को स्थगित कर दिया था।
पाकिस्तान ने भारत के एकतरफा कदम को खारिज कर दिया, जिससे संधि की वर्तमान स्थिति विवादित हो गई है।
नदी समूह: चिनाब सिंधु और झेलम के साथ एक पश्चिमी नदी है। रावी, ब्यास और सतलज पूर्वी समूह का निर्माण करते हैं।
सभी गेट क्यों खोले गए?
लगातार बारिश से रियासी और अपस्ट्रीम (upstream) जलग्रहण क्षेत्र (catchment) से प्रवाह बढ़ गया।
गेट्स ने अतिरिक्त प्रवाह छोड़ दिया और जलाशय को सुरक्षित परिचालन सीमा के भीतर रखा।
इस तरह की रिलीज़ से डाउनस्ट्रीम में जल स्तर और प्रवाह की गति तेजी से बढ़ सकती है।
इसलिए अधिकारियों ने नदी के किनारे और निचले इलाकों के समुदायों को सतर्क रहने की चेतावनी दी।
स्पिलवे (spillway) गेट खोलना एक सुरक्षा अभियान है, न कि अपने आप में बिजली उत्पादन।
तलछट प्रबंधन (sediment management) महत्वपूर्ण क्यों है?
हिमालयी नदियां भारी तलछट (sediment) ले जाती हैं, जो जलाशय के स्थान को कम करती है और हाइड्रोलिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकती है।
निकाली न गई तलछट दीर्घकालिक उत्पादन को कमजोर करती है, जबकि प्रबंधन रिलीज़ को बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को डाउनस्ट्रीम जोखिमों के साथ संतुलित करना चाहिए।
निष्कर्ष
सलाल जलविद्युत, चिनाब के भूगोल और जल की राजनीति को जोड़ता है, जबकि इसके गेटों के लिए बारिश की सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता होती है।