समाचार में क्यों?
एक नए विश्लेषण (analysis) ने दिल्ली के व्यापक एयरशेड (airshed) के आसपास coal plants की जांच की। छूट प्राप्त (Exempted) संयंत्रों (plants) ने अधिकांश अनुमानित sulphur dioxide उत्सर्जन (emissions) का उत्पादन किया। कई इकाइयों (units) में परिचालन प्रदूषण-नियंत्रण उपकरण (operating pollution-control equipment) का अभाव था। निष्कर्षों ने भारत के शिथिल (relaxed) 2025 नियमों पर बहस को नवीनीकृत (renewed) किया।
पृष्ठभूमि
Sulphur dioxide एक रंगहीन (colourless) गैस है जिसकी तेज, जलन पैदा करने वाली गंध (irritating smell) होती है, और इसका रासायनिक सूत्र (chemical formula) SO2 है।
सल्फर युक्त कोयला या तेल जलाने से गैस निकलती है, और धातु प्रगलन (metal smelting) और कुछ औद्योगिक प्रक्रियाएं भी इसका उत्पादन करती हैं।
ज्वालामुखी (Volcanoes) एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत हैं, और मानव संपर्क अक्सर बिजली संयंत्रों, उद्योगों और व्यस्त बंदरगाहों के पास सबसे अधिक होता है।
Sulphur dioxide एक प्राथमिक प्रदूषक (primary pollutant) है क्योंकि स्रोत इसे सीधे छोड़ते हैं, और यह बाद में हानिकारक द्वितीयक (secondary) प्रदूषक बना सकता है।
यह महीन-कण प्रदूषण (fine-particle pollution) कैसे बनाता है?
- कोयला दहन (Coal combustion) वायुमंडल में sulphur dioxide छोड़ता है।
- वायुमंडलीय (Atmospheric) प्रतिक्रियाएं कुछ गैस को सल्फर यौगिकों (sulphur compounds) में ऑक्सीकृत (oxidise) करती हैं।
- ये यौगिक आगे पानी और अमोनिया (ammonia) के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।
- तब हवा में छोटे सल्फेट (sulphate) कण बनते हैं।
- हवा इन कणों को लंबी दूरी तक ले जा सकती है।
2.5 माइक्रोमीटर (micrometres) या उससे कम आकार वाले कणों को particulate matter 2.5 कहा जाता है। वे मानव बाल से बहुत छोटे होते हैं।
Sulphate इस महीन प्रदूषण (fine pollution) का एक महत्वपूर्ण घटक है, और इसलिए शहर के बाहर उत्सर्जन शहरी वायु गुणवत्ता (urban air quality) को प्रभावित कर सकता है।
भ्रमित न हों: Sulphur dioxide एक प्राथमिक गैस है, और sulphate कण बाद में बनते हैं और द्वितीयक (secondary) कण प्रदूषण बन जाते हैं।
Sulphur dioxide स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
गैस नाक, गले और फेफड़ों में जलन पैदा करती है, और अस्थमा (asthma) वाले लोग थोड़े समय के संपर्क के बाद प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
बच्चों, बड़े वयस्कों (older adults) और बाहरी श्रमिकों (outdoor workers) को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है, और व्यायाम फेफड़ों में प्रवेश करने वाली प्रदूषित हवा की मात्रा को बढ़ाता है।
महीन (Fine) sulphate कण गहरे फेफड़ों के ऊतकों (lung tissue) तक पहुंच सकते हैं, और लंबा संपर्क श्वसन और हृदय रोग (respiratory and cardiovascular disease) से जुड़ा है।
वायुमंडलीय (Atmospheric) सल्फर यौगिक (sulphur compounds) भी अम्लीय वर्षा (acid rain) में योगदान करते हैं, और एसिड निक्षेपण (acid deposition) पौधों, मिट्टी, झीलों और इमारतों को नुकसान पहुंचा सकता है।
Flue gas desulphurisation क्या है?
Flue gas बॉयलर या भट्टी (furnace) से निकलने वाला निकास (exhaust) है। Desulphurisation उस निकास के हवा में पहुंचने से पहले sulphur dioxide को हटा देता है।
कई संयंत्र (plants) गैस के माध्यम से चूना पत्थर (limestone) या चूने का मिश्रण (lime mixture) स्प्रे (spray) करते हैं। सामग्री sulphur dioxide के साथ प्रतिक्रिया करती है और इसे पकड़ लेती है।
प्रक्रिया एक प्रयोग करने योग्य उप-उत्पाद (by-product) के रूप में जिप्सम (gypsum) का उत्पादन कर सकती है, और अच्छी तरह से संचालित प्रणालियां लगभग 95 प्रतिशत तक हटा सकती हैं।
अकेले स्थापना पर्याप्त नहीं है, और संयंत्रों को लगातार उपकरण संचालित करना चाहिए और अवशेषों (residues) का सुरक्षित रूप से निपटान (dispose) करना चाहिए।
भारत के नियम कैसे बदले?
- भारत ने December 2015 में कड़े थर्मल-पावर उत्सर्जन मानक (thermal-power emission standards) पेश किए।
- Coal plants को शुरू में 2017 की अनुपालन समय सीमा (compliance deadline) मिली।
- अधिकारियों ने बाद में कई बार समय सीमा बढ़ाई।
- एक 2021 ढांचे (framework) ने संयंत्रों को तीन स्थान श्रेणियों (location categories) में विभाजित किया।
- Category A ने सबसे प्रदूषित शहरों के पास संयंत्रों को कवर किया।
- Category B ने कुछ संवेदनशील (sensitive) क्षेत्रों के पास संयंत्रों को कवर किया।
- Category C ने शेष संयंत्रों को कवर किया।
- July 2025 में जारी नियमों ने कई संयंत्रों के लिए आवश्यकताओं में ढील दी।
Category A संयंत्रों को 2027 तक संशोधित (revised) आवश्यकता को पूरा करना होगा, और Category B संयंत्रों को मामले-दर-मामले मूल्यांकन (case-by-case assessment) प्राप्त होता है।
Category C संयंत्रों को अनिवार्य (mandatory) flue gas desulphurisation से छूट दी गई है। परिवर्तन ने भारत के लगभग 78 प्रतिशत coal plants को कवर किया।
नया विश्लेषण किसने किया?
Centre for Research on Energy and Clean Air ने इसका संचालन किया। यह स्वतंत्र अनुसंधान संगठन वायु प्रदूषण और ऊर्जा प्रणालियों का अध्ययन करता है।
टीम ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में बारह (twelve) coal plants की जांच की, और इन संयंत्रों (plants) में सैंतीस उत्पादन इकाइयाँ (thirty-seven generating units) शामिल थीं।
सार्वजनिक उत्सर्जन डेटा (Public emissions data) केवल पच्चीस (twenty-five) इकाइयों के लिए उपलब्ध था, और शोधकर्ताओं ने उपलब्ध संचालन और ईंधन की जानकारी का उपयोग करके वार्षिक उत्सर्जन का अनुमान लगाया।
मुख्य निष्कर्ष क्या थे?
- पच्चीस मूल्यांकित इकाइयों (assessed units) ने 2025 के दौरान अनुमानित 154 किलोटन (kilotonnes) का उत्सर्जन किया।
- Category C इकाइयों ने लगभग 125 किलोटन का उत्पादन किया।
- यह अनुमानित उत्सर्जन के लगभग 81 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
- Category A इकाइयों ने शेष 29 किलोटन का उत्पादन किया।
- desulphurisation के बिना इकाइयों ने लगभग 90 प्रतिशत का उत्पादन किया।
- बीस (Twenty) इकाइयाँ लागू उत्सर्जन मानकों से अधिक हो गईं।
- पांच इकाइयों (Five units) ने उन मानकों का अनुपालन किया।
- मूल्यांकन (assessment) के लिए बारह (Twelve) इकाइयों में पर्याप्त सार्वजनिक डेटा का अभाव था।
एक किलोटन (kilotonne) एक हजार टन (tonnes) के बराबर होता है, और आंकड़े अनुमानित वार्षिक उत्सर्जन का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि दिल्ली के एक मॉनिटर पर प्रदूषण सांद्रता (pollution concentrations) का।
विश्लेषण ने दो नियंत्रित इकाइयों के लिए 1,775 और 2,154 टन का अनुमान लगाया। तुलनीय अनियंत्रित (comparable uncontrolled) इकाइयों ने बहुत बड़े अनुमानों का उत्पादन किया।
राजपुरा (Rajpura) इकाइयों का अनुमान 20,851 और 22,690 टन था। वे अध्ययन के सबसे बड़े स्रोत थे।
दूरी-आधारित छूट (distance-based exemption) को आलोचना का सामना क्यों करना पड़ता है?
2025 का ढांचा चयनित शहरों या संवेदनशील स्थानों से दूरी पर दृढ़ता से निर्भर करता है। वायु प्रदूषण उन सीमाओं पर नहीं रुकता है।
लंबी चिमनियाँ (Tall chimneys) ऊंची चलती हवा में प्रदूषण छोड़ती हैं, और हवाएँ कई राज्यों में गैसों और कणों को ले जा सकती हैं।
इसलिए अध्ययन दिल्ली और आसपास के राज्यों को एक एयरशेड (airshed) के रूप में मानता है। एक एयरशेड (airshed) एक ऐसा क्षेत्र है जो वायुमंडलीय प्रदूषण (atmospheric pollution) आंदोलन को साझा करता है।
दिल्ली के व्यापक क्षेत्र को National Capital Region कहा जाता है, और इसकी औपचारिक (formal) सीमा के बाहर के स्रोत अभी भी इसकी हवा को प्रभावित कर सकते हैं।
अध्ययन की सीमाएं (limitations) क्या हैं?
विश्लेषण (analysis) ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा और अनुमानों का उपयोग किया, लेकिन इसने 2025 के दौरान हर चिमनी को लगातार नहीं मापा।
डेटा में सैंतीस (thirty-seven) में से केवल पच्चीस (twenty-five) इकाइयाँ शामिल थीं, और जानकारी का अभाव पूर्ण क्षेत्रीय योग के बारे में निश्चितता (certainty) को कम करता है।
मौसम यह निर्धारित करता है कि किसी भी समय दिल्ली में कितना प्रदूषण पहुंचता है, और वार्षिक उत्सर्जन स्वयं दैनिक जोखिम (daily exposure) नहीं दिखाते हैं।
रिपोर्ट एक संभावित El Niño मौसम पैटर्न (weather pattern) पर भी चर्चा करती है, और वह भविष्य का परिदृश्य (scenario) एक प्रक्षेपण (projection) है, निश्चितता नहीं।
साक्ष्य सावधानी: 81 प्रतिशत का आंकड़ा मूल्यांकित (assessed) संयंत्रों से अनुमानित उत्सर्जन (estimated emissions) से संबंधित है। यह दिल्ली का कुल sulphur dioxide हिस्सा नहीं है।
निष्कर्षों से क्या नीतिगत (policy) कदम उठते हैं?
- बड़े उत्सर्जकों (Large emitters) को प्रभावी नियंत्रण स्थापित और संचालित करना चाहिए।
- रीयल-टाइम (Real-time) मॉनिटरिंग डेटा सार्वजनिक रूप से सुलभ (accessible) होना चाहिए।
- नियामकों (Regulators) को केवल स्थापना (installation) का ही नहीं, बल्कि उपकरण संचालन का ऑडिट (audit) करना चाहिए।
- Airshed मॉडलिंग को स्थान-आधारित आवश्यकताओं (location-based requirements) का मार्गदर्शन करना चाहिए।
- पुरानी अकुशल (inefficient) इकाइयों को स्पष्ट सेवानिवृत्ति (retirement) योजनाओं की आवश्यकता है।
- अक्षय ऊर्जा (Renewable power) कोयला दहन (coal combustion) पर निर्भरता को कम कर सकती है।
निष्कर्ष
विश्लेषण से पता चलता है कि दूर की छूट (distant exemptions) क्षेत्रीय लागत ले सकती है। स्वच्छ हवा के लिए पारदर्शी निगरानी (Transparent monitoring) और कार्य नियंत्रण (working controls) आवश्यक हैं।