विज्ञान और प्रौद्योगिकी

TDIP Scheme: टेलीकॉम टेक्नोलॉजी, मानकीकरण और 6G नेटवर्क

TDIP Scheme: टेलीकॉम टेक्नोलॉजी, मानकीकरण और 6G नेटवर्क

चर्चा में क्यों?

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने 2026–2031 की अवधि के लिए प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन (Technology Development and Investment Promotion - TDIP) योजना के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। 203 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ, यह योजना वैश्विक दूरसंचार मानक निकायों में भारत की भागीदारी का विस्तार करना और स्वदेशी अनुसंधान को प्रोत्साहित करना चाहती है।

पृष्ठभूमि

भारतीय उद्योग और शिक्षाविदों को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union - ITU), 3rd जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3GPP) और oneM2M जैसे अंतर्राष्ट्रीय मानक-निर्धारण संगठनों में योगदान करने के लिए समर्थन देने के लिए 2014 में TDIP लॉन्च किया गया था। इन मंचों में विकसित मानक मोबाइल नेटवर्क, ब्रॉडबैंड और 6G जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के तकनीकी विनिर्देशों को आकार देते हैं। यात्रा, सदस्यता शुल्क और पायलट प्रदर्शनों के वित्तपोषण के द्वारा, TDIP भारतीय इंजीनियरों को बैठकों में भाग लेने, तकनीकी योगदान प्रस्तावित करने और प्रोटोटाइप का परीक्षण करने में सक्षम बनाता है।

संशोधित दिशा-निर्देश

  • व्यापक पात्रता: स्टार्ट-अप, सूक्ष्म- और लघु उद्यम, शैक्षणिक संस्थान, अनुसंधान प्रयोगशालाएं, दूरसंचार सेवा प्रदाता और विनिर्माण कंपनियां अब समर्थन के लिए आवेदन कर सकती हैं। पहले, सहायता मुख्य रूप से बड़ी फर्मों तक सीमित थी।
  • वित्तीय सहायता: यह योजना अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भाग लेने, तकनीकी कागजात जमा करने, भारत में मानकीकरण (standardisation) कार्यक्रमों की मेजबानी करने, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (proof-of-concept) प्रदर्शन आयोजित करने और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को मान्य करने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स से संबंधित खर्चों की प्रतिपूर्ति करेगी।
  • कार्यान्वयन एजेंसियां: दूरसंचार मानक विकास सोसायटी, भारत (Telecommunications Standards Development Society, India - TSDSI), दूरसंचार उत्कृष्टता केंद्र (Telecom Centres of Excellence - TCoE) और टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) योजना के विभिन्न घटकों का प्रबंधन करेंगे। वे ओवरलैप से बचने के लिए भारत 6G मिशन और टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के साथ समन्वय करेंगे।
  • फोकस क्षेत्र: 5G और 6G के अलावा, TDIP इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things), मशीन-टू-मशीन (machine-to-machine) संचार, ऑप्टिकल नेटवर्क और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड पर काम को प्रोत्साहित करता है। ऊर्जा-कुशल डिजाइन और ग्रामीण कनेक्टिविटी समाधानों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

महत्व

  • वैश्विक मानकों को प्रभावित करना: सक्रिय भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि भारतीय आवश्यकताओं—जैसे कम लागत वाले उपकरण, बहुभाषी इंटरफेस और दूरदराज के क्षेत्रों में लचीलापन—को अंतरराष्ट्रीय विशिष्टताओं में शामिल किया गया है।
  • नवाचार को बढ़ावा देना: वित्त पोषण विश्वविद्यालयों और स्टार्ट-अप को प्रोटोटाइप का परीक्षण करने और बौद्धिक संपदा (intellectual property) विकसित करने की अनुमति देता है जिसे दूरसंचार क्षेत्र में व्यावसायीकृत किया जा सकता है।
  • निर्यात को बढ़ावा देना: वैश्विक मानकों के अनुपालन से भारतीय उत्पादों को विदेशों में स्वीकृति प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे भारत को दूरसंचार निर्माण केंद्र बनाने के दृष्टिकोण का समर्थन मिलता है।

स्रोत: Press Information Bureau

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