पर्यावरण

सफेद पेट वाला बगुला (White-Bellied Heron): भूटान और भारत में संरक्षण अद्यतन

सफेद पेट वाला बगुला (White-Bellied Heron): भूटान और भारत में संरक्षण अद्यतन

समाचार में क्यों?

संरक्षणवादियों (Conservationists) की रिपोर्ट है कि भूटान अब लगभग 31 सफेद पेट वाले बगुलों (white-bellied herons) का घर है, जो दुनिया भर में जंगल में 60 से कम इन गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षियों की पुष्टि की गई संख्या का लगभग आधा है। प्रजातियों की अनिश्चित संख्या और भूटान के संरक्षण प्रयासों की सफलता ने इसे वापस सुर्खियों में ला दिया है।

पृष्ठभूमि

White-bellied heron (Ardea insignis) दुनिया के सबसे दुर्लभ बगुलों (herons) में से एक है। यह भूटान, उत्तर-पूर्वी भारत और म्यांमार (Myanmar) में पूर्वी हिमालय की साफ, तेज बहने वाली नदियों और आर्द्रभूमि (wetlands) में निवास करता है। IUCN Red List वैश्विक आबादी का अनुमान 250 से कम परिपक्व व्यक्तियों (mature individuals) का लगाती है। पक्षी स्लेट-ग्रे (slate-grey) रंग और सफेद पेट के साथ लगभग एक मीटर लंबे होते हैं। वे गड़बड़ी (disturbance) के प्रति संवेदनशील होते हैं और पर्याप्त मछली वाले बड़े क्षेत्रों की आवश्यकता होती है। निवास स्थान (Habitat) के नुकसान, रेत खनन, जलविद्युत बांधों (hydropower dams) और शिकार ने प्रजातियों को विलुप्त होने की ओर धकेल दिया है।

वर्तमान स्थिति और संरक्षण

  • भूटान में जनसंख्या: भूटान की Royal Society for Protection of Nature द्वारा किए गए सर्वेक्षणों में देश में 31 व्यक्तियों को दर्ज किया गया है, जिससे यह प्रजातियों के लिए एक वैश्विक गढ़ (global stronghold) बन गया है। पक्षी Pho Chhu और अन्य नदी घाटियों (river basins) के साथ पाए जाते हैं।
  • भारत की आबादी: भारत में, white-bellied heron मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के Namdapha Tiger Reserve और असम में कुछ स्थानों पर जीवित रहता है। प्रजनन सफलता (Breeding success) बेहद कम है, जंगल में शायद 10 से कम पक्षी हैं।
  • खतरे: नदी के जंगलों का विनाश, रेत और बजरी निष्कर्षण, जलविद्युत परियोजनाएं और अवैध मछली पकड़ना निवास की गुणवत्ता (habitat quality) को कम करता है। जलवायु परिवर्तन और बाढ़ भी घोंसले के स्थलों (nesting sites) को प्रभावित करते हैं।
  • संरक्षण के उपाय: भूटान ने संरक्षण प्रजनन केंद्र (conservation breeding centres) और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम स्थापित किए हैं। भारत में घोंसले के स्थलों के पास संरक्षित क्षेत्र स्थापित करने और रेत खनन को विनियमित करने के प्रस्ताव हैं। प्रजातियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International cooperation) महत्वपूर्ण है।

स्रोत

The Indian Express.

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