समाचार में क्यों?
जून 2026 में वन्यजीव रिपोर्टों ने दक्षिण एशिया की गिद्धों (vulture) की आबादी में लगातार गिरावट का उल्लेख किया, जिससे white‑rumped vulture की ओर ध्यान आकर्षित हुआ। 1990 के दशक तक भारत में शिकार करने वाले पक्षियों में सबसे आम होने के बावजूद, मुख्य रूप से डिक्लोफेनैक (diclofenac) जैसी पशु चिकित्सा दवाओं से विषाक्तता (poisoning) के कारण इसकी संख्या में 99% से अधिक की गिरावट आई है।
पृष्ठभूमि
White‑rumped vulture (Gyps bengalensis) ग्रिफॉन गिद्ध समूह (griffon vulture group) का एक मध्यम आकार का सदस्य है। यह पहले भारतीय उपमहाद्वीप में पाकिस्तान और भारत से लेकर बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार तक प्रचुर मात्रा में था। यह प्रजाति ऊंचे पेड़ों और चट्टानों पर घोंसला बनाती है और पशुओं के शवों (carcasses) को खाती है, जिससे पर्यावरण को साफ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 1990 के दशक के मध्य में आबादी में तब भारी गिरावट आई जब गिद्धों ने मृत मवेशियों (dead cattle) से सूजन-रोधी दवा (anti-inflammatory drug) diclofenac खा ली। यह दवा गिद्धों में किडनी फेल होने का कारण बनती है, जिससे तीन Gyps प्रजातियों का लगभग पूरी तरह से पतन हो गया। भारत ने 2006 में पशु चिकित्सा डिक्लोफेनैक पर प्रतिबंध लगा दिया और बाद में केटोप्रोफेन (ketoprofen) और निमेसुलाइड (nimesulide) जैसी अन्य हानिकारक दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन रिकवरी अभी भी धीमी है।
श शारीरिक विवरण
- आकार (Size): वयस्कों (Adults) की लंबाई लगभग 75-85 cm होती है। उनके पंखों का फैलाव (wingspan) 1.8 m से 2.1 m तक होता है और वजन 3.5 से 7.5 kg के बीच होता है। नर और मादा एक जैसे दिखते हैं।
- पंख (Plumage): वयस्कों में काले रंग के पंख होते हैं जिनमें एक विशिष्ट सफेद गर्दन रफ (white neck ruff) और पीठ के निचले हिस्से तथा ऊपरी पूंछ पर एक सफेद पैच होता है। मुड़े होने पर पंख एक हल्का भूरा (pale grey) पैच दिखाते हैं। अपरिपक्व पक्षी (Immatures) अधिक भूरे होते हैं और उनमें चमकदार सफेद हिस्सा (bright white rump) नहीं होता है।
- सिर और चोंच (Head and bill): अन्य गिद्धों की तरह, सिर और गर्दन काफी हद तक पंखहीन होते हैं, जो सड़े हुए मांस (carrion) को खाते समय स्वच्छता में मदद करते हैं। मांस फाड़ने के लिए चोंच छोटी, गहरी और मजबूत (stout) होती है।
पारिस्थितिकी और खतरे (Ecology and threats)
- आवास (Habitat): White‑rumped vultures मानव बस्तियों के पास खुले ग्रामीण इलाकों, गांवों और कस्बों में पाए जाते हैं। वे पेड़ों या चट्टानों पर बैठते हैं और घोंसला बनाते हैं तथा शवों की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं।
- पारिस्थितिक भूमिका (Ecological role): मृत जानवरों को खाकर, गिद्ध बीमारियों के प्रसार को रोकते हैं और मानव स्वास्थ्य का समर्थन करते हैं। उनकी गिरावट को आवारा कुत्तों की आबादी और संबंधित रेबीज (rabies) मामलों में वृद्धि से जोड़ा गया है।
- मुख्य खतरे (Main threats): Diclofenac विषाक्तता अभी भी गिरावट का प्रमुख कारण बनी हुई है। अन्य खतरों में आवारा कुत्तों को मारने के लिए कीटनाशकों (pesticides) के साथ रखे गए शवों से विषाक्तता, बिजली लाइनों (power lines) से टकराव और करंट लगना, आवास का नुकसान तथा घोंसले के स्थानों पर मानव गड़बड़ी शामिल है।
- संरक्षण कार्य: भारत, नेपाल और पाकिस्तान ने पशु चिकित्सा डिक्लोफेनैक (diclofenac) पर प्रतिबंध लगा दिया है और मेलोक्सिकैम (meloxicam) जैसे सुरक्षित विकल्पों को बढ़ावा दिया है। गिद्ध संरक्षण कार्यक्रम कैप्टिव ब्रीडिंग (captive breeding) केंद्र चलाते हैं और Vulture Safe Zones स्थापित करते हैं जहां हानिकारक दवाओं को समाप्त कर दिया जाता है। शिक्षा और प्रवर्तन (enforcement) का काम जारी है।
निष्कर्ष
White‑rumped vulture दक्षिण एशिया के पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दवा विषाक्तता के कारण बड़े पैमाने पर आबादी में गिरावट ने नीतिगत बदलाव और संरक्षण कार्रवाई को प्रेरित किया, लेकिन रिकवरी धीमी और अनिश्चित है। इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय अपमार्जक (critically endangered scavenger) को बचाने के लिए निरंतर निगरानी, हानिकारक पशु चिकित्सा दवाओं का सख्त नियंत्रण और घोंसले के स्थानों की सुरक्षा आवश्यक है。
स्रोत: TH