चर्चा में क्यों?
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority - APEDA) ने हाल ही में भारत से न्यूजीलैंड (New Zealand) को बॉटनिकल-इन्फ्यूज्ड मिलेट-आधारित (botanical-infused millet-based) कार्यात्मक खाद्य पदार्थों (functional foods) की पहली समुद्री खेप (sea shipment) की सुविधा प्रदान की। यह मील का पत्थर बाजरा और मूल्य वर्धित (value-added) कृषि-उत्पादों के लिए भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता (export potential) को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
APEDA एक वैधानिक निकाय (statutory body) है जिसे 1985 में संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था और यह 13 फरवरी 1986 को लागू हुआ। यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) के तहत कार्य करता है जिसका उद्देश्य अनुसूचित कृषि और प्रसंस्कृत उत्पादों (processed products) के निर्यात को बढ़ावा देना है। प्राधिकरण का मुख्यालय नई दिल्ली में है और देश भर में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
APEDA की जिम्मेदारियों में निर्यातकों (exporters) को पंजीकृत करना, निर्यात के लिए मानक (standards) और विनिर्देश (specifications) निर्धारित करना, गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रसंस्करण सुविधाओं का निरीक्षण करना, पैकेजिंग और विपणन (marketing) में सुधार करना, निर्यात बुनियादी ढांचे और बाजार के विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, आंकड़े (statistics) एकत्र करना और प्रकाशित करना तथा कृषि निर्यात के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षण देना शामिल है। यह जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Organic Production) के सचिवालय के रूप में कार्य करता है और राज्य सरकारों, निर्यातकों तथा किसानों के साथ मिलकर काम करता है।
भूमिका और हालिया पहल
- विविध उत्पाद बास्केट (Diversified product basket): APEDA मांस और पोल्ट्री (poultry) उत्पादों, डेयरी उत्पादों, ताजे और प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों, अनाज, गुड़ और चीनी, शहद, फूलों, जड़ी-बूटियों और जैविक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है। जब से संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने 2023 को बाजरा का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (International Year of Millets) घोषित किया है, तब से बाजरा पर विशेष ध्यान दिया गया है, और APEDA ने मूल्य-वर्धित बाजरा उत्पादों का समर्थन किया है।
- व्यापार सुविधा (Trade facilitation): APEDA निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों (international trade fairs), क्रेता-विक्रेता बैठकों (buyer-seller meets) और निर्यात प्रचार में भाग लेने में मदद करता है। इसने कड़े वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए जैविक उपज और गुणवत्ता प्रमाणन योजनाओं (quality certification schemes) के लिए ट्रैसेबिलिटी सिस्टम (traceability systems) विकसित किए हैं।
- किसानों को सहायता: प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण (capacity-building) कार्यक्रमों के माध्यम से, प्राधिकरण किसानों और प्रोसेसरों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानदंडों, पैकेजिंग तकनीकों और बाजार के अवसरों पर शिक्षित करता है। किसान उत्पादक संगठनों (farmer producer organisations) को निर्यातकों से जोड़कर, APEDA का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है।
- हालिया मील का पत्थर: न्यूजीलैंड को बॉटनिकल-इन्फ्यूज्ड बाजरा कार्यात्मक खाद्य पदार्थों की पहली समुद्री खेप स्वस्थ भारतीय खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग और नए बाजार खोलने में APEDA की भूमिका को प्रदर्शित करती है। इस तरह की पहल निर्यात गंतव्यों (export destinations) के विविधीकरण (diversification) और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में मूल्य संवर्धन (value addition) को प्रोत्साहित करती है।
निष्कर्ष
भारत को कच्चे माल के निर्यातक (exporter of raw commodities) से उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (processed foods) के आपूर्तिकर्ता में बदलने में APEDA का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मानक, क्षमता निर्माण और बाजार समर्थन प्रदान करके, यह वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने के लिए किसानों और उद्यमियों (entrepreneurs) को सशक्त बनाता है। बाजरा, जैविक उत्पादों और मूल्य-वर्धित उत्पादों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने से एक लचीला और टिकाऊ कृषि-निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र (agri-export ecosystem) बनाने में मदद मिलेगी।