विज्ञान और प्रौद्योगिकी

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB): परमाणु सुरक्षा

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB): परमाणु सुरक्षा

समाचार में क्यों?

Atomic Energy Regulatory Board (AERB) हाल ही में परमाणु सुरक्षा (nuclear safety) और नियामक सुधारों (regulatory reforms) के बारे में चर्चा में रहा है। इसकी कानूनी स्थिति और भारत के परमाणु प्रतिष्ठानों (nuclear installations) की मजबूत स्वतंत्र निगरानी (independent oversight) की आवश्यकता के बारे में चिंताएं उठाई गई हैं।

पृष्ठभूमि

AERB की स्थापना 1983 में परमाणु ऊर्जा अधिनियम (Atomic Energy Act), 1962 के तहत परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) के एक कार्यकारी आदेश (executive order) द्वारा की गई थी। यह परमाणु ऊर्जा आयोग (Atomic Energy Commission) के अधीन कार्य करता है और इसमें एक अध्यक्ष, एक सदस्य-सचिव और अधिकतम पांच सदस्य होते हैं।

बोर्ड का जनादेश (mandate) यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनीकरण विकिरण (ionising radiation) और परमाणु ऊर्जा के उपयोग से श्रमिकों, जनता या पर्यावरण को अनुचित जोखिम न हो। यह परमाणु और विकिरण सुविधाओं के स्थान, डिजाइन, निर्माण, संचालन और डिकमीशनिंग (decommissioning) के लिए सुरक्षा कोड और मानक (safety codes and standards) विकसित करता है। यह अनुपालन लागू करने के लिए लाइसेंस प्रदान करता है और निरीक्षण करता है, जोखिम सीमा (exposure limits) निर्धारित करता है, आपातकालीन तैयारी योजनाओं की समीक्षा करता है, कर्मियों के प्रशिक्षण की निगरानी करता है और जनता को रेडियोलॉजिकल सुरक्षा जानकारी (radiological safety information) का संचार करता है।

प्रमुख मुद्दे

  • वैधानिक स्थिति का अभाव (Lack of statutory status): AERB की स्थापना एक अलग कानून के बजाय एक कार्यकारी आदेश द्वारा की गई थी। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General - CAG) की एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि नियामक में स्वायत्तता (autonomy) का अभाव है और यह परमाणु ऊर्जा विभाग की एक अधीनस्थ एजेंसी (subordinate agency) के रूप में कार्य करता है। अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाएं हितों के टकराव (conflicts of interest) से बचने और जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए परमाणु नियामकों के लिए स्वतंत्र कानूनी स्थिति (independent legal status) की सिफारिश करती हैं।
  • कार्य: लाइसेंसिंग और निगरानी के अलावा, AERB अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क करता है, सुरक्षा में अनुसंधान को बढ़ावा देता है और परमाणु सुरक्षा की समीक्षा करता है। यह विकिरण श्रमिकों (radiation workers) के लिए खुराक सीमा (dose limits) भी निर्धारित करता है और रेडियोधर्मी सामग्री परिवहन (radioactive material transport) के लिए पैकेजों को मंजूरी देता है।
  • सुधार का आह्वान: फुकुशिमा दुर्घटना (Fukushima accident) के बाद, विशेषज्ञों और संसदीय समितियों ने नियामक को अधिक स्वतंत्रता देने के लिए कानून के माध्यम से एक अलग परमाणु सुरक्षा नियामक प्राधिकरण (Nuclear Safety Regulatory Authority) की वकालत की। एक स्वतंत्र परमाणु नियामक के प्रस्तावों पर चर्चा की गई है लेकिन अभी तक अधिनियमित नहीं किया गया है।

महत्व

भारत द्वारा अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (nuclear power programme) का विस्तार करने के साथ, दुर्घटनाओं को रोकने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए एक प्रभावी और स्वतंत्र नियामक आवश्यक है। AERB की कानूनी नींव को मजबूत करने से भारत की प्रथाएं वैश्विक मानदंडों (global norms) के अनुरूप होंगी और जवाबदेही (accountability) सुनिश्चित होगी।

स्रोत: The Hindu

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