समाचार में क्यों?
अंडमान सागर में स्थित Barren Island रुक-रुक कर ज्वालामुखीय गतिविधि प्रदर्शित कर रहा है और भारत तथा दक्षिण एशिया में एकमात्र पुष्टि किया गया सक्रिय ज्वालामुखी बना हुआ है। डार्विन ज्वालामुखी ऐश एडवाइजरी सेंटर (Darwin Volcanic Ash Advisory Centre) की हालिया उपग्रह रिपोर्टों ने 2026 की शुरुआत में ज्वालामुखी से राख के गुबार और थर्मल विसंगतियों (thermal anomalies) को दर्ज किया है, जो शोधकर्ताओं और यात्रियों को इस अनूठी भूवैज्ञानिक विशेषता की याद दिलाता है।
पृष्ठभूमि
Barren Island अंडमान सागर में पोर्ट ब्लेयर से लगभग 138 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित लगभग 3 किलोमीटर चौड़ा एक छोटा निर्जन द्वीप है। यह सुमात्रा से म्यांमार तक फैले उत्तर-दक्षिण ज्वालामुखीय चाप (volcanic arc) का हिस्सा है। इस द्वीप में 1.6 किलोमीटर चौड़ा कैल्डेरा (caldera) है जो पश्चिम की ओर खुलता है और इसमें एक केंद्रीय पाइरोक्लास्टिक (pyroclastic) शंकु है। लेट प्लीस्टोसिन (late Pleistocene) के दौरान एक बड़े विस्फोटक विस्फोट ने कैल्डेरा को उकेरा। बाद के विस्फोटों ने सिंडर (cinder) शंकु का निर्माण किया और लावा प्रवाह को समुद्र में गिरा दिया। पहला दर्ज किया गया विस्फोट 1787 में हुआ था। 1991 में फिर से जागने से पहले ज्वालामुखी एक सदी से अधिक समय तक निष्क्रिय था और तब से रुक-रुक कर फूट रहा है।
भूवैज्ञानिक और पारिस्थितिक तथ्य
- सक्रिय स्थिति: Barren Island सुमात्रा और म्यांमार को जोड़ने वाले ज्वालामुखीय चाप के साथ एकमात्र ऐतिहासिक रूप से सक्रिय ज्वालामुखी है। 1991 और 1994-95 में हुए विस्फोटों ने लावा को तट तक पहुँचा दिया, और 2020 के दशक तक मामूली स्ट्रोमबोलियन (Strombolian) गतिविधि बनी रही।
- ऊंचाई और संरचना: यह द्वीप समुद्र तल से लगभग 354 मीटर ऊपर और समुद्र तल से 2 किलोमीटर ऊपर उठता है। इसका 1.6 किलोमीटर चौड़ा क्रेटर (crater) आंशिक रूप से स्कोरिया शंकु (scoria cone) से भरा है। लावा प्रवाह ने एक पठार का निर्माण किया है जो धीरे-धीरे समुद्र की ओर ढलान करता है।
- गठन (Formation): यह ज्वालामुखी उस सीमा के ऊपर स्थित है जहां भारतीय प्लेट बर्मी (Burmese) माइक्रोप्लेट के नीचे दब रही है। यह सबडक्शन (subduction) बेसाल्टिक मैग्मा उत्पन्न करता है जो नियमित लेकिन मध्यम विस्फोटक विस्फोटों को जन्म देता है।
- विस्फोटों का इतिहास: 1787 के विस्फोट के बाद, 1789, 1795, 1803-04 और 1832 में छिटपुट गतिविधि दर्ज की गई। 159 साल के अंतराल के बाद, 1991 का विस्फोट छह महीने तक चला और इससे द्वीप पर वनस्पति और पशु जीवन को नुकसान पहुंचा। इसके बाद 1994-95, 2005-07, 2008-2010, 2013-14, 2017 और 2022 में भी विस्फोट हुए। सितंबर 2025 में दो मामूली विस्फोटों ने राख के छोटे गुबार पैदा किए जिन्हें 'मामूली' बताया गया।
- पारिस्थितिकी: अपने नाम के अनुरूप, Barren Island का अधिकांश हिस्सा वनस्पति से रहित है, हालांकि इसकी बाहरी ढलानों पर कठोर घास और झाड़ियाँ उगती हैं। यह द्वीप जंगली बकरियों की एक छोटी आबादी का समर्थन करता है और समुद्री पक्षी यहां आते हैं। यह Barren Island Wildlife Sanctuary के अंतर्गत आता है, और यहां प्रवेश प्रतिबंधित है।
- आस-पास के ज्वालामुखी: नारकोंडम द्वीप (Narcondam Island), लगभग 140 किमी उत्तर-उत्तर-पूर्व में, भारतीय क्षेत्र के भीतर एक निष्क्रिय ज्वालामुखी शंकु है। क्षेत्र में अन्य पनडुब्बी ज्वालामुखी समुद्र तल से नीचे रहते हैं लेकिन भविष्य में उभर सकते हैं।
निष्कर्ष
Barren Island भारतीय उपमहाद्वीप में चल रहे ज्वालामुखी का एक दुर्लभ उदाहरण है। इसकी आवधिक गतिविधि सबडक्शन-ज़ोन प्रक्रियाओं में अंतर्दृष्टि प्रदान करती है और द्वीप के अलगाव के कारण न्यूनतम जोखिम पैदा करती है। जैसे-जैसे ज्वालामुखी धड़कता रहेगा, वैज्ञानिक क्षेत्रीय टेक्टोनिक्स को समझने और आस-पास के शिपिंग मार्गों व विमानों की रक्षा करने के लिए इसके राख उत्सर्जन और लावा प्रवाह की निगरानी करते रहेंगे।