Science & Technology (विज्ञान और प्रौद्योगिकी)

Bio-Bitumen Technology: CSIR, फसल अवशेष और सड़क निर्माण

Bio-Bitumen Technology: CSIR, फसल अवशेष और सड़क निर्माण

चर्चा में क्यों?

कृषि अवशेषों (agricultural residue) को सड़क निर्माण के लिए बाइंडर (binder) में परिवर्तित करके व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन (bio‑bitumen) का उत्पादन करने वाला भारत पहला देश बनने के लिए तैयार है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research - CSIR) प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित एक नई तकनीक आयातित पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन (imported petroleum‑based bitumen) पर निर्भरता को कम करेगी और फसल-अपशिष्ट (crop‑waste) जलने को दूर करने में मदद करेगी।

पृष्ठभूमि (Background)

बिटुमेन (Bitumen) वह चिपचिपा, काला बाइंडर है जो डामर की सड़कों (asphalt roads) को एक साथ बांधे रखता है। भारत हर साल लाखों टन बिटुमेन की खपत करता है और अपनी आवश्यकता का लगभग आधा आयात (imports) करता है। साथ ही, किसान कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष (crop residue) जलाते हैं, जिससे उत्तरी भारत में वायु प्रदूषण (air pollution) होता है।

CSIR-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (IIP) के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से बायोमास (biomass) से बायो-बिटुमेन (bio‑bitumen) का उत्पादन करने की प्रक्रिया विकसित की है। यह तकनीक पायरोलिसिस (pyrolysis) — ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बनिक पदार्थों (organic material) को गर्म करना — का उपयोग करके कृषि अपशिष्ट को तरल (liquids) और ठोस (solids) पदार्थों में तोड़ने के लिए करती है जिन्हें पारंपरिक बिटुमेन (conventional bitumen) के साथ मिश्रित किया जा सकता है।

यह कैसे काम करता है (How it works)

  • बायोमास का पायरोलिसिस (Pyrolysis of biomass): कृषि अवशेष जैसे धान के पुआल (paddy straw), गन्ने की खोई (sugarcane bagasse) और अन्य फसल अपशिष्टों को सीलबंद रिएक्टरों (sealed reactors) में गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया से बायो-ऑयल (bio‑oil), बायो-चार (bio‑char) और गैसें (gases) प्राप्त होती हैं।
  • निर्माण (Formulation): बायो-ऑयल और बायो-चार को सड़क निर्माण मानकों (road‑construction standards) को पूरा करने वाला बाइंडर बनाने के लिए पॉलिमर (polymers) और एडिटिव्स (additives) के साथ संसाधित किया जाता है। फुटपाथ के प्रदर्शन (pavement performance) से समझौता किए बिना पारंपरिक बिटुमेन का 30 प्रतिशत तक बदला जा सकता है।
  • व्यावसायिक उत्पादन (Commercial production): औद्योगिक स्तर (industrial scale) पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने के लिए एक पायलट प्लांट (pilot plant) स्थापित किया जाएगा, और उत्पाद का राज्यों में सड़क परियोजनाओं (road projects) में परीक्षण किया जाएगा।

लाभ (Benefits)

  • आयात को कम करना (Reducing imports): पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन के एक हिस्से को बदलकर, भारत विदेशी मुद्रा (foreign exchange) में ₹40,000 करोड़ तक बचा सकता है।
  • उत्सर्जन में कटौती (Cutting emissions): फसल अवशेषों का उपयोग उन्हें खुले मैदान में जलने (open‑field burning) से रोकता है, जिससे धुआं और कण प्रदूषण (particulate pollution) कम होता है।
  • किसानों का समर्थन (Supporting farmers): कृषि अपशिष्ट खरीदना किसानों के लिए एक अतिरिक्त राजस्व प्रवाह (additional revenue stream) बनाता है और सर्कुलर-इकोनॉमी (circular‑economy) प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है।
  • टिकाऊ बुनियादी ढांचा (Sustainable infrastructure): बायो-बिटुमेन से बनी सड़कों के पारंपरिक डामर (conventional asphalt) की तुलना में समान या बेहतर स्थायित्व (durability) होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बायो-बिटुमेन (Bio‑bitumen) कृषि, नवाचार (innovation) और बुनियादी ढांचे के अभिसरण (convergence) का प्रतिनिधित्व करता है। इसे अपनाना भारतीय सड़कों को हरा-भरा (greener) बना सकता है, किसानों के लिए नई आय प्रदान कर सकता है और आयातित कच्चे माल (imported raw materials) पर निर्भरता को कम कर सकता है।

स्रोत: Press Information Bureau

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