समाचार में क्यों?
डॉक्टरों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि नियमित मैमोग्राम ब्रेस्ट आर्टेरियल कैल्सीफिकेशन (BAC) — स्तन की धमनियों में कैल्शियम के छोटे जमाव — का पता लगा सकते हैं। इन जमावों को अब रक्त वाहिकाओं के नुकसान के संकेतक के रूप में पहचाना जाता है और यह हृदय रोग (cardiovascular disease) के उच्च जोखिम का संकेत दे सकते हैं। भारत और विदेशों में, ऐसे मामले सामने आए हैं जहां BAC दिखाने वाले मैमोग्राम ने आगे के हृदय परीक्षणों और प्रारंभिक उपचार को प्रेरित किया।
पृष्ठभूमि
मैमोग्राम स्तन का एक एक्स-रे (X-ray) है जो डॉक्टरों को स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों को देखने में मदद करता है। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
- स्क्रीनिंग मैमोग्राम: लक्षण प्रकट होने से पहले स्तन कैंसर के लक्षणों के लिए स्वस्थ महिलाओं की नियमित जांच के लिए उपयोग किया जाता है।
- डायग्नोस्टिक मैमोग्राम: यह तब किया जाता है जब किसी को गांठ, दर्द या निप्पल डिस्चार्ज जैसे लक्षण होते हैं। यह असामान्यताओं की तलाश करता है लेकिन अपने आप में कैंसर का निदान नहीं कर सकता।
Indian Council of Medical Research सिफारिश करता है कि 40 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाएं हर दो साल में एक स्क्रीनिंग मैमोग्राम करवाएं, या यदि उनमें उच्च जोखिम कारक हैं तो इससे पहले करवाएं।
ब्रेस्ट आर्टेरियल कैल्सीफिकेशन क्या हैं?
ब्रेस्ट आर्टेरियल कैल्सीफिकेशन (Breast arterial calcifications) स्तन की आपूर्ति करने वाली धमनियों की दीवारों के भीतर मैमोग्राम पर देखे जाने वाले बारीक, सफेद धब्बे हैं। वे स्तन कैंसर से जुड़े नहीं हैं और उन्हें स्तन उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। इसके बजाय, उन्हें एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) — रक्त वाहिकाओं के अंदर पट्टिका (plaque) का निर्माण — का संकेत माना जाता है। हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने BAC को हृदय रोग के चेतावनी मार्कर के रूप में मानना शुरू कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- सरोगेट मार्कर (Surrogate marker): BAC उम्र बढ़ने, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य चयापचय विकारों के कारण रक्त वाहिकाओं में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाते हैं। उन्हें हृदय रोग के निदान के बजाय प्रणालीगत संवहनी उम्र बढ़ने (systemic vascular ageing) के संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए।
- व्यापकता: भारत में अध्ययनों से पता चलता है कि मैमोग्राफी कराने वाली 10-20 प्रतिशत महिलाओं में BAC दिखाई देता है। यह आवृत्ति 40-65 वर्ष की महिलाओं में लगभग 9-16 प्रतिशत से बढ़कर 65 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग आधी महिलाओं में हो जाती है। यह रजोनिवृत्ति (menopause) के बाद और मधुमेह, उच्च रक्तचाप या गुर्दे की बीमारी वाले लोगों में अधिक आम है।
- नैदानिक प्रभाव: जब BAC का पता चलता है, तो डॉक्टर हृदय संबंधी मूल्यांकन और जीवन शैली में बदलाव (आहार, व्यायाम और ग्लूकोज नियंत्रण) की सलाह दे सकते हैं। कई मामलों में मैमोग्राम की खोज ने मूक कोरोनरी धमनी रोग (silent coronary artery disease) और दवाओं या बाईपास सर्जरी जैसे प्रारंभिक हस्तक्षेप का नेतृत्व किया।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका: शोधकर्ता ऐसे AI उपकरण विकसित कर रहे हैं जो हजारों मैमोग्राम का विश्लेषण करते हैं और पारंपरिक जोखिम मॉडल की तरह सटीक रूप से प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं की भविष्यवाणी करते हैं। ये एल्गोरिदम सूक्ष्म संवहनी पैटर्न की पहचान कर सकते हैं जो मानव आंखें चूक सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग संभव हो जाती है। हालांकि, हृदय रोग विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि AI-आधारित जोखिम मूल्यांकन को नैदानिक निर्णय का पूरक होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना चाहिए।
निष्कर्ष
स्तन कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए मैमोग्राफी स्वर्ण मानक (gold standard) बनी हुई है। यह मान्यता कि यह स्तन धमनियों में कैल्शियम जमाव को भी प्रकट कर सकती है, महिलाओं को एक ही समय में हृदय रोग के लिए स्क्रीन करने का एक नया अवसर प्रदान करती है। BAC को एक जोखिम संकेतक — निदान के बजाय — के रूप में समझने से महिलाओं और उनके डॉक्टरों को उचित अनुवर्ती परीक्षणों और जीवन शैली में बदलाव तय करने में मदद मिलती है।
स्रोत: The Times of India